सुरेन्द्र मिनोचा
मनेंद्रगढ़/एमसीबी :- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक दिवसीय छत्तीसगढ़ पंचायत महासम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें प्रदेश के काफी संख्या में पंचायत प्रतिनिधि शामिल हुए।राष्ट्रीय आदिवासी एकता मंच के प्रदेश अध्यक्ष ने भी कार्यक्रम में शिरकत की लेकिन उन्होंने पूरे कार्यक्रम को निराशाजनक बताया।
राष्ट्रीय आदिवासी एकता मंच के प्रदेश अध्यक्ष और जनपद अध्यक्ष डॉ विनय शंकर सिंह ने कहा कि रायपुर में आयोजित छत्तीसगढ़ पंचायत महासम्मेलन में प्रदेश की भाजपा सरकार ने पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश से पंचायत प्रतिनिधियों जिसमे की पंच, सरपंच, जनपद सदस्य,जनपद अध्यक्ष, जिला पंचायत के सदस्य और जिला पंचायत के अध्यक्षों को आमंत्रित किया गया था। इस सम्मेलन में प्रदेश के त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के पंचायत के प्रतिनिधियों ने बहुत ही उत्साह के साथ भाग लिया। सभी पंचायत प्रतिनिधियों को यह लग रहा था कि प्रदेश में भाजपा सरकार पंचायती राज व्यवस्था को आर्थिक और न्यायिक संबलता जरूर प्रदान करेगी, लेकिन पूरे प्रदेश भर से पंचायत प्रतिनिधियों को रायपुर के साइंस कॉलेज ग्राउंड में बुलाकर हाथ में केवल वायदों का झुनझुना देकर वापस लौटा दिया गया।पूरे प्रदेश के पंच और सरपंच बहुत उत्साह के साथ इस सम्मेलन में शामिल हुए थे। सभी प्रतिनिधियों को यह उम्मीद थी कि उनके मानदेय को यह सरकार जरूर पूरा करेगी लेकिन इस सरकार ने पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय को देने के बजाय पूरी भरी दुपहरी में बैठा करके केवल पंचायत प्रतिनिधियों को उपयोग कैसे किया जाए इस उद्देश्य के निहित स्वार्थ की पूर्ति के लिए रायपुर के साइंस कॉलेज ग्राउंड में बुलाया था। इस पंचायत महासम्मेलन के बाद पूरे प्रदेश भर के पंचायत प्रतिनिधियों के मन में जो रोष का भाव पैदा हुआ है, वह निश्चित ही आने वाले लोकसभा चुनाव में देखने को मिलेगा।

डॉक्टर विनय शंकर सिंह ने यह भी कहा है कि छत्तीसगढ़ प्रदेश आदिवासी बाहुल्य राज्य है। यहां के पंचायत प्रतिनिधियों में आदिवासी बहुलता के लोग प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और इन भोले भाले आदिवासियों के साथ हम खिलवाड़ नहीं करने देंगे। प्रदेश में चाहे कोई भी सरकार रहे। अगर आदिवासी हितों की विरोधी सरकार रहेगी तो हम इसका पुरजोर विरोध करेंगे। विगत 1 वर्ष से पंचायत प्रतिनिधियों का मानदेय रुका हुआ है।जनपद अध्यक्षों को ना तो किसी प्रकार की साइन अथॉरिटी दिया गया है ना तो जिला पंचायत अध्यक्षों को किसी प्रकार की साइन अथॉरिटी दिया गया है।

पंचायती राज अधिनियम 1994 के तहत नियम (4) जनपद पंचायत अध्यक्षों के कृत्य एवं शक्तियों में उल्लिखित है जिसमें जनपद अध्यक्षों को वित्तीय अधिकार देने की बात कही गई है।अगर सरकार त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करना चाहती है तो इनके लिए सशक्त कदम उठाने की सख्त जरूरत है और जिस भी सरकार में आदिवासी बहुलता राज्य वाले पंचायत प्रतिनिधियों के प्रति और उनके हितों की रक्षार्थ ठोस निर्णय लेने की क्षमता है उसी के साथ पूरा आदिवासी समाज एकजुट होकर के रहेगा। अन्यथा आने वाले लोकसभा चुनाव में उसका परिणाम भुगतना पड़ेगा। पूरे प्रदेश भर से पंचायत प्रतिनिधि रायपुर के साइंस कॉलेज ग्राउंड में नमकीन और बिस्किट खाने नही गए थे उनको उम्मीद थी कि भाजपा की यह सरकार उनकी मांगों को जरूर पूरा करेगी और जो उनका अधिकार है उनके मानदेय को जरूर पूरा करेगी।जनपद अध्यक्षों, जिला पंचायत अध्यक्षों के लिए साइन पावर की मांग को जरूर पूरा करेगी लेकिन इस महासम्मेलन के बाद पूरे पंचायत प्रतिनिधि केवल और केवल निराश होकर वापस लौटे हैं।
