जिले के सभी पत्रकार अब कर सकेंगे पत्रकार भवन का उपयोग।

पूर्व में भवन में लिखाया गया एमसीबी प्रेस क्लब विलोपित कर उसे किया गया पत्रकार भवन।

सुरेन्द्र मिनोचा

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी :- जिले के सभी पत्रकारों के लिए बेहतर बैठक व्यवस्था बनाने एवं विभिन्न राजनीतिक दलों के लिए प्रेस वार्ता आयोजित करने पत्रकार भवन बनाने हेतु पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा 15 लख रुपए की राशि प्रदान की गई थी. उक्त राशि से शहर के चैनपुर में एक भव्य भवन बनाया गया लेकिन कुछ लोगों द्वारा उस भवन पर जबरिया कब्जा करने के हिसाब से उस भवन का नाम पत्रकार भवन न रखकर एमसीबी प्रेस क्लब रख दिया गया और इसी नाम का उपयोग करते हुए उक्त भवन का उद्घाटन करने के लिए प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री को गुमराह करते हुए मुख्य अतिथि बना दिया गया

लेकिन जब इस बात की जानकारी प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री व मनेन्द्रगढ़ के विधायक श्याम बिहारी जायसवाल व भरतपुर सोनहत विधायक को हुई तो उन्होंने कार्यक्रम में शामिल होने से इनकार कर दिया, जिसके बाद आनन फानन में उक्त पत्रकार संगठन ने मनेन्द्रगढ़ नगर पालिका अध्यक्ष प्रभा पटेल को मुख्य अतिथि बनकर भवन का लोकार्पण तो कर दिया लेकिन पत्रकारों का यह विवाद पूरे जिले में फैल गया, जिससे एमसीबी प्रेस क्लब की मंशा पर तरह-तरह के सवाल उठने लगे।आखिर उन्हें किसने यह अधिकार दिया कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा बनाए गए भवन में अपना नाम अंकित करवा ले क्योंकि जिले भर में कई पत्रकारों के संगठन कार्यरत हैं और छत्तीसगढ़ सरकार ने यह राशि किसी पत्रकार संगठन को नहीं दी है बल्कि जिले के सभी पत्रकारों की सुविधा के लिए दी है।जब इस आशय की जानकारी प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल और भरतपुर सोनहत की विधायक रेणुका सिंह को हुई तो दोनों ने कार्यक्रम में शामिल होने से इंकार कर दिया। ऐसे में सवाल यह उठता है कि इस तरह का प्रायोजित कार्यक्रम करने व पत्रकार बिरादरी को बदनाम करने के पीछे आखिर किसकी मंशा थी?और अब पत्रकार भवन के लोकार्पण के 24 घंटे के भीतर ही उक्त भवन का नाम बदल दिया गया, इससे जाहिर सी बात है कि पूर्व में जो नाम इस भवन का रखा गया था वह पूरी तरह से किसी षड्यंत्र के तहत रखा गया था। नहीं तो भवन के उद्घाटन के बाद भवन का नाम क्यों बदला जाता?वहीं इस आयोजन में जिले भर के पत्रकारों को क्यों नहीं बुलाया गया?इस संबंध में क्षेत्र के बुद्धिजीवियों का कहना है कि किसी ने भी पत्रकार भवन के लिए राशि की मांग की हो, प्रदेश के जन प्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षण कराया हो, लेकिन जब जिले में कोई भवन बनेगा तो उसमें सभी पत्रकारों का समान रूप से हक रहेगा।मनेन्द्रगढ़ प्रेस क्लब के पदाधिकारियों ने कलेक्टर एमसीबी का ध्यानाकर्षण करते हुए अनुरोध किया है कि उक्त पत्रकार भवन में किसी भी संस्था का नाम अथवा किसी पत्रकार का नाम ना लिखा जाए,जिससे जिले भर के पत्रकारों के अलावा पूरे प्रदेश से आने वाले पत्रकार उसका बेझिझक उपयोग कर सके और शासन के पैसे का सदुपयोग हो सके।वही इस मामले में इस बात को लेकर भी नगर में काफी चर्चा रही की पूर्व विधायक एवं राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त गुलाब कमरों के प्रयासों से ही प्रदेश के मुख्यमंत्री ने मनेन्द्रगढ़ के चैनपुर में भवन निर्माण करने के लिए 15 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की थी, लेकिन इसे दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि वह चुनाव हार गए और एमसीबी प्रेस क्लब के पदाधिकारी ने उनको भवन के लोकार्पण समारोह में पूछना भी जरूरी नहीं समझा, इससे साफ है कि पत्रकारों में राजनीति को लेकर किस तरह से अवसरवादिता हावी है,.राजनीति में हार जीत तो चलते रहती है लेकिन पूर्व विधायक ने जिस प्रकार से पत्रकार भवन के लिए प्रयास किया उनको आयोजन में ना बुलाए जाने के पीछे क्या मंशा थी यह तो आयोजक ही बेहतर बता सकते हैं।बहरहाल मनेन्द्रगढ़ प्रेस क्लब के पदाधिकारियों ने कलेक्टर एमसीबी से आग्रह किया है कि उक्त भवन के रखरखाव एवं संचालन की जिम्मेदारी प्रशासनिक अधिकारियों के पास हो, ताकि उक्त भवन के उपयोग को लेकर किसी तरह का विवाद पैदा ना हो।