राजिम :- साहित्यकार समाज को आइना दिखाता है यह बात नोहर लाल साहू अधमरहा के लिए सटीक साबित होती है। उन्होंने जीते जी साहित्य की सेवा की महतारी भाषा को पोठ करने जी तोड़ मेहनत की और मरणोपरांत अपना देहदान कर मानवता का संदेश दिया। उल्लेखनीय हैं कि 20 मई1951 में ग्राम हसदा नंबर वन में जन्मे वरिष्ठ साहित्यकार नोहर लाल साहू अधमरहा ने गांव में रहकर माध्यमिक शिक्षा आठवीं तक की पढ़ाई की धीरे-धीरे कृषि कार्य करते हुए टेलरिंग कार्य में जुड़ गए उनकी माता दया देवशीर साहू पिता स्वर्गीय गोविंद राम साहू थे उनकी धर्मपत्नी स्वर्गीय तुलसी देवी साहू और चार बेटे और बेटी भी है। साहू जी बहुत दिनों से साहित्य सेवा करते रहे। साहित्य के माध्यम से जहां समाज सेवा किया उन्होंने गीत, कविता, कहानी, नाटक का पठन-पाठन करते हुए विभिन्न कृतियां लिखी जिसमें मानसून की पाती , मुरहा छत्तीसगढ़ी नाटक के साथ साथ अप्रकाशित कृति बैरी मितान उपन्यास,हाना के तराना, कुंडलियां, कहानी, नाटक की संख्या भी ढेरों है उन्हें विभिन्न समाज एवं सामाजिक संस्थानों से साहित्यिक सेवा के लिए अनेक सम्मानों से नवाजा गया है । रत्नांचल जिला साहित्य परिषद के अध्यक्ष शायर जितेंद्र सुकुमार साहिर बताते हैं की अधमरहा जी बहुत ही सरल स्वभाव के थे मिलनसार और व्यक्तित्व के धनी थे साधारण जीवन जिया करते थे मगर उनकी सोच विचारधारा समाज को क्रांति देने वाली थी।आज 2 मार्च 2024 को हम-सब को छोड़कर दिवंगत हो गये। अंचल के साहित्यकारों के लिए बहुत ही दुखद खबर है । विभिन्न साहित्यिक संस्थानों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
साहित्यकार अधमरहा ने देहदान कर दिया मानवता का संदेश।
