भावाँजलि….

 

पवन नही यह आँधी है,
छत्तीसगढ का गाँधी है।
हाँ यही नारा लगा था तब,
जेल मंत्री बन आए जब।

सिंह सी थी चाल मतवाली,
मुक्त-हँसी जिसकी निराली।
काठ का पहने चरण -पादुका,
तन पर ओढ़े वस्त्र -गेरुआ।

माथे पर था तेज टपकता,
वाणी में थी ओज प्रखरता।
निपुण- नेता कवि -ओजस्वी,
भागवत -कर्ता रहे यशस्वी।

कलम कहे भावों की भाषा,
तत्व- दर्शन कहीं प्रेम- पिपाशा।
राख बताती सत्य जीवन का,
चंदा गीत प्रबल प्रियतम का।

मेरा हर स्वर इसका पूजन
भावाँजलि करते हैं वंदन।
छतीसगढ की महान विभूति ,
प्रणम्य सदा हो जयति- जयति।

छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय कवि, प्रखर नेता और प्रसिद्ध कथा वाचक संत पवन दीवान जी की पुण्यतिथि पर सादर नमन।🙏🙏🙏

सागर शर्मा राजिम
(व्याख्याता एवं एनसीसी अधिकारी)
सेजेस राजिम
मोबाइल- ९९९३०४८७८६