वर्ष 2023-24 में ही 5 करोड़ से अधिक जॉब कार्ड रद्द किए गए, साल दर साल मनरेगा बजट में कटौती कर रही केंद्र।
प्रमोद दुबे
महासमुंद :- पूर्व संसदीय सचिव विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के लिए आवंटन में साल दर साल कटौती कर रही है और सामाजिक न्याय की इस योजना को खत्म करने पर तुली हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि मनरेगा में उपस्थिति के लिए ‘नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम’ ऐप का उपयोग बंद किया जाए तथा ‘सोशल ऑडिट’ के माध्यम से इस योजना में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
चंद्राकर ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान मनरेगा के तहत कार्यों के लिए 1,11,500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए (संशोधित बजट अनुमान 2020-21), जिससे काफी संख्या में कामगारों को राहत मिली। हालाकि, यह आवंटन भी देश में उपलब्ध कार्यबल को 100 दिन का रोजगार प्रदान करने के लिए पर्याप्त नहीं था। प्रत्येक वर्ष के बजट में इसे घटाया गया है। 2022 23 में इसे घटाकर 60,000 करोड़ रुपये,लगभग आधा कर दिया गया। मनरेगा के बजट में कटौती के कारण राज्य सरकारों को मनरेगा के कार्यों को जारी रखने में काफी मुश्किल हुई। बकाया राशि के लिए कई राज्य बार-बार मोदी सरकार से संपर्क करते रहे। लेकिन उसे अनसुना कर दिया गया।
चंद्राकर ने कहा कि वित्त वर्ष 2022-23 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत पांच करोड़ से अधिक जॉब कार्ड रद्द कर दिए गए, जो 2021-22 की तुलना से 247 प्रतिशत अधिक है। मनरेगा को 2005 में ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका सुरक्षा बढ़ाने के प्राथमिक लक्ष्य के साथ लागू किया गया था, जिसमें प्रत्येक परिवार को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों का वेतन रोजगार प्रदान किया गया था। मनरेगा काम के अधिकार की गारंटी देता है, जिससे ग्रामीण परिवारों के लिए योजना के तहत रोजगार की मांग करना कानूनी अधिकार बन जाता है। मनरेगा का उद्देश्य ग्रामीण श्रमिकों के लिए।
रोजगार के अवसर पैदा करते हुए टिकाऊ
संपत्ति बनाना और सतत विकास को बढ़ावा देना है। साथ ही नियोजित श्रमिक काम पूरा होने के 15 दिनों के भीतर सरकार से सीधे मजदूरी प्राप्त करने के हकदार होते हैं। यह एक श्रम-प्रधान परियोजना है। इसके तहत सिंचाई, सड़क निर्माण, जल संरक्षण, वनीकरण और समुदाय को लाभ पहुंचाने वाली अन्य गतिविधियों पर जोर दिया जाता है। श्री चंद्राकर ने बताया कि भारत सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी और गरीबी की समस्या के समाधान के लिए 2005 में मनरेगा सामाजिक कल्याण कार्यक्रम की शुरुआत की थी। ग्रामीण भारत में, विशेष रूप से आबादी के वचित समूहों के बीच, बेरोजगारी और गरीबी की उच्च दर को देखते हुए, इस तरह के कार्यक्रम की आवश्यकता उत्पन्न हुई। ऐसे जनहित और सामाजिक न्याय की योजना को केंद्र की मोदी सरकार द्वारा धीरे-धीरे खत्म किया जा रहा है, जो ग्रामीण मजदूरों के साथ अन्याय है।
