मुड़ागांव(कोरासी) :- सहित अंचल के ग्रामों में दिपावली पर्व कुछ ही दिन शेष हैं गांव गांव गली मुहल्लो में इन दिनों सुआ नृत्य की धूम मची हुई है। छत्तीसगढ़ की पारम्परिक नृत्य सुआ अब विलुप्त की कगार पर है। विलुप्त होती इस परम्परा को सहेज कर रखने की आवश्यकता है। इस त्योहार की खुमारी एक माह पूर्व से प्रारंभ हो जाती थी। लेकिन धीरे धीरे रौनकता खत्म होती नजर आ रही है। अब केवल महज दो तीन दिन ही शेष रहती है तब धीरे धीरे रौनकता बनती है। लेकिन अब सुआ नृत्य याने पड़की नृत्य अब विलुप्त हो रहे हैं। सुआ नृत्य में पारिवारिक, श्रृंगार,मौसम,पशु पक्षी, को जोड़ते हुए नृत्य करती हुई छोटे छोटे बालिकाओं के द्वारा तथा बड़ी माताओं के द्वारा यह संदेश परक शिक्षा दी जाती है । ताली का स्वर इसमें मुख्य होता है।लय बद्ध ताली की आवाज से मन गदगद हो जाता है ।
