आयुर्वेद के अनुसार, पत्थरचट्टा में तमाम तरह के औषधीय गुण पाए जाते हैं और इसका प्रयोग कई तरह की बीमारियों की दवा बनाने में किया जाता है। पत्थरचट्टा के अलावा इसे एयर प्लांट, कैथेड्रल बेल्स, लाइफ प्लांट और मैजिक लीफ के नाम से जाना जाता है। आयुर्वेद में इस पौधे को भष्मपथरी, पाषाणभेद और पणपुट्टी के नाम से जानते हैं जबकि मेडिकल साइंस में मानती हैं। इस पौधे की पत्तियां स्वाद में खट्टी और नमकीन होती हैं।
फायदे
पथरी और पेट पर्द को खत्म करता है पत्थरचट्टा
अगर आपको पथरी की समस्या है तो पत्थरचिट्टा आपकी सेहत के लिए रामबाण औषधि है। इसके लिए आपको पत्थरचट्टा के पत्तों का गुनगुने पानी के साथ सेवन करना है। ऐसा रोज करने से आपको पथरी की समस्या से राहत मिलेगी। अच्छे परिणाम के लिए इसके 2 पत्तों का खाली पेट सेवन करें। अगर आप पत्थरचिट्टा के रस में सौंठ का चूर्ण मिलाकर सेवन करते हैं तो पेट दर्द से भी राहत पा सकते हैं। ये पेट से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने के लिए भी प्रयोग में लाया जाता है।
किडनी की समस्या को दूर करता है पत्थरचट्टा
मूत्र विकारों को दूर करने के लिए आयुर्वेद में सदियों से पत्थरचट्टा का इस्तेमाल हो रहा है। अगर आप इसका काढ़ा पीते हैं तो पेशाब में जलन, रुक-रुक पेशाब आने जैसी परेशानियां दूर हो सकती हैं। इसके अलावा पत्थरचट्टा बवासीर की समस्या को दूर करने के लिए भी उपयोगी माना जाता है।
वेजाइनल इंफेक्शन को ठीक करता है पत्थरचट्टा
महिलाएं आमतौर पर वजाइनल इंफेक्शन की समस्या से जूझती हैं। इसमें उनके जेनिटल या कहें प्राइवेट एरिया में खुजली, जलन के साथ-साथ वेजाइनल डिस्चार्ज होता है। इस परेशान को दूर करने के लिए पत्थरचट्टा उपयोगी हो सकता है। इसके लिए आपको इसके पत्तों को उबालकर काढ़ा पीना है और स्वाद के लिए आप इसमें शहद मिला सकते हैं।
