श्रद्धालुओं ने कहा- धर्म नगरी होने के कारण राजिम जिला बना देना चाहिए।

रविवार को भीड़ सुबह से शाम रात तक रही।

राजिम :- तीर्थो के राजा प्रयाग नगरी राजिम की प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ या फिर पूरे हिंदुस्तान में ही नहीं बल्कि विदेश में भी इन्हें जाना जाता है नतीजा प्रतिदिन देश-विदेश के बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं। इन दिनों धर्मनगरी राजिम का दृश्य भी अत्यंत सुहावना है। तीन नदियां सोंढूर, पैरी एवं महानदी के संगम में पानी भरा हुआ है। जिसके कारण श्रद्धालु सीधे लक्ष्मण झूला से होकर विश्व के प्रसिद्ध पंचमुखी कुलेश्वरनाथ महादेव मंदिर पहुंच रहे हैं और दर्शन पूजन का लाभ ले रहे थे। बताना जरूरी है कि कुलेश्वरनाथ महादेव मंदिर का निर्माण छठवीं- सातवीं शताब्दी माना गया है। महामंडप में शिलालेख उत्कीर्ण है। कलचुरी कालिन भगवान राजीव लोचन का विशाल मंदिर के साथ ही अनेक मंदिर यहां मौजूद है जिसमें मूर्ति कला के शानदार नमूना देखने को मिलता है। इस नगरी की अनेक खूबियां तथा पौराणिक महत्व श्रद्धालुओं को बरबस अपनी ओर खींच लाते हैं।

उड़ीसा से पहुंचे लोगों ने लक्ष्मण झूला से होकर महादेव का दर्शन किया। उन्होंने सबसे पहले त्रिवेणी संगम में स्नान किया पश्चात भगवान राजीव लोचन का भी दर्शन पूजन किया। सभी श्रद्धालु अत्यंत प्रसन्न थे। इनमें से कुछ लोगों ने बताया कि हम पहली बार लक्ष्मण झूला चढ़े हैं बहुत अच्छा लगा और सबसे बड़ी चीज स्नान व दर्शन से मन प्रसन्न हो गया है। दुर्ग जिले के गांव से श्रद्धालु राम वन गमन परिपथ के अंतर्गत रामचंद्र की विशाल प्रतिमा को देखकर अभिभूत हो गए। वह लगातार वहां बैठकर सेल्फी ले रहे थे। अनुमान के मुताबिक सुबह से लेकर देर शाम तक 50 हजार श्रद्धालुओं के पहुंचाने की जानकारी मिली है। दिनों दिन धर्म नगरी में पर्यटकों की संख्या बढ़ती जा रही है। यहां आकर लोग शांति का अनुभव कर रहे हैं तथा हरि और हर दोनों से अपनी मन की बात जरूर कर रहे हैं। कहना होगा कि प्रतिदिन पहुंच रहे श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों की बढ़ती संख्या के बावजूद यहां पर्यटन विभाग का अभी तक कोई कार्यालय नहीं है। जिनका मलाल पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को जरूर हो रही है। जानकारी के मुताबिक जिला मुख्यालय यहां से 45 किलोमीटर दूर गरियाबंद में है लेकिन यहां भी कोई पर्यटन विभाग का कार्यालय मौजूद नहीं है अलबत्ता राजधानी रायपुर की दूरी भी 45 किलोमीटर है। कई बार जानकारी के अभाव में पर्यटक भटक जाते हैं। जिले के पर्यटन क्षेत्र की जानकारी लोगों तक ठीक से नहीं पहुंच पा रही है। पहुंचे कुछ लोगों ने कहा कि यहां ठहरने के लिए कोई बड़ा सा होटल भी मौजूद नहीं है। छोटे-छोटे होटल या फिर धर्मशाला में रुककर रात्रि विश्राम करना पड़ेगा। इनमें से कुछ लोगों ने तो राजिम को जिला समझ रहे थे और कह रहे थे कि जिले जैसी सुविधाएं नहीं है लेकिन उन्हें बताया गया कि यह गरियाबंद जिले में है और जिला मुख्यालय की दूरी यहां से 45 किलोमीटर है। तब उन्होंने कहा कि धर्म नगरी होने के कारण सरकार को इन्हें जिला बना देना चाहिए।