राजिम :- चिरायता मूल रूप से हिमालय में इम्यूनिटी वाली औषधीय जड़ी बूटी है, जिसका उपयोग पारंपरिक चिकित्सा में किया जाता है। इसके औषधीय उपयोग का जिक्र भारतीय, ब्रिटिश, अमेरिकी और यूनानी चिकित्सा से संबंधित किताबों में भी मिलता है। इसमें कई तरह के बायोएक्टिव कंपाउंड होते हैं, जो शरीर को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं। इस जड़ी-बूटी का इस्तेमाल बुखार, मधुमेह और मलेरिया जैसी बीमारी का आयुर्वेदिक इलाज करने के लिए किया जाता है ।
चिरायता के फायदे –चिरायता का उपयोग सालों से हेपेटाइटिस, सूजन और पाचन रोगों के उपचार के लिए किया जाता रहा है । ऐसे ही कुछ फायदों के बारे में हमने नीचे विस्तार से बताया है। बस ध्यान दें कि किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति को चिरायता पर निर्भर रहने की जगह इलाज के लिए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
बुखार, खांसी और जुकाम के लिए :- चिरायता से खांसी, बुखार और जुकाम का घरेलू इलाज किया जा सकता है। दरअसल, यह सारी समस्याएं वायरल इंफेक्शन की वजह से होती हैं । ऐसे में चिरायता में मौजूद एंटी-वायरल गुण फायदेमंद हो सकता है। बताया जाता है कि चिरायते की जड़ से खांसी, बुखार और जुकाम से राहत मिल सकती है ।
इम्यूनिटी के लिए :- शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में भी चिरायता फायदेमंद हो सकता है। चिरायता में मैग्निफेरिन बायोएक्टिव कंपाउंड होता है। यह यौगिक इम्यूनोमॉड्यूलेटरी प्रभाव प्रदर्शित करता है। इस प्रभाव की मदद से रोग प्रतिरोधक क्षमता शरीर की जरूरत के हिसाब से कार्य कर सकती है।
ब्लड शुगर :- चिरायता ब्लड शुगर लेवल को कम करने में लाभदायक हो सकता है। एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) की ओर से पब्लिश एक रिसर्च पेपर में भी इस बात का जिक्र है। शोध के मुताबिक, चिरायता में अमारोगेंटिन बायोएक्टिव कंपाउंड होता है। यह कंपाउंड एंटी-डायबिटिक प्रभाव दिखाता है। इसी वजह से माना जाता है कि चिरायता ब्लड शुगर को कम कर सकता है)।

एनीमिया :- चिरायता का उपयोग आयुर्वेद में जड़ी-बूटी के तौर पर किया जाता है। यह शरीर को खून की कमी से भी बचा सकता है। इसकी पत्तियों में मौजूद विटामिन और खनिज हेमाटिनिक () प्रभाव होता है। यह प्रभाव शरीर में खून को बनाने में सहायक हो सकता है, इसलिए एनीमिया के घरेलू उपचार में चिरायता का उपयोग किया जा सकता है ।
लीवर :- चिरायता के पौधे का इस्तेमाल लीवर संबंधी विकार को दूर करने के लिए वर्षों से किया जा रहा है। एक रिसर्च में बताया गया है कि चिरायता में स्वेरचिरिन कंपाउंड होता है, जो हेपटोप्रोटेक्टिव गतिविधि प्रदर्शित कर सकता है। यह प्रभाव लिवर को क्षति से बचाने में सहायक हो सकता है। इसके कारण लीवर संबंधी बीमारी, जैसे – हेपेटाइटिस, हेपेटाइटिस-बी और सी से भी बचा जा सकता है।
पाचन स्वास्थ्य के लिए :- चिरायता का उपयोग पाचन स्वास्थ्य को बेहतर कर सकता है। इस जड़ी-बूटी की कड़वाहट शरीर में लार और गैस्ट्रिक जूस को उत्तेजित करके अपच की समस्या को कम कर सकती है। साथ ही चिरायता गैस्ट्रिक एंजाइम को उत्पादित करके पाचन में सहायक हो सकता है। यह पित्त यानी बाइल के स्राव को बढ़ाकर भी पाचन को सुधारने और कब्ज को दूर करने का काम कर सकता है ।
खून साफ करने में मददगार :- चिरायता के गुणों का उपयोग खून साफ करने वाली आयुर्वेदिक औषधि बनाने के लिए भी किया जाता है। जी हां, चिरायता का सेवन करने से खून को साफ भी किया जा सकता है । फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि चिरायता में मौजूद कौन-सा गुण और तत्व खून साफ करने में मदद करता है।
भूख बढ़ाने में सहायक :- चिरायता का इस्तेमाल भूख बढ़ाने के लिए भी किया जा सकता है। एक रिसर्च पेपर में लिखा है कि यह पित्त यानी बाइल के स्राव को बढ़ाता है, जिससे भूख बढ़ सकती है। इसी वजह से वर्षों से चिरायता का उपयोग भूख को बढ़ाने के लिए किया जा रहा है ।
मलेरिया बुखार :- पारंपरिक तौर पर चिरायता का प्रयोग मलेरिया के बुखार से बचाव के लिए भी किया जाता रहा है। चिरायता में स्वेरचिरिन नामक तत्व होता है, जो एंटी-मलेरिया की तरह काम कर सकता है। इस प्रभाव के कारण मलेरिया और उससे संबंधित लक्षणों से राहत मिल सकती है। इसके लिए चिरायते का इस्तेमाल काढ़े के रूप में किया जा सकता है ।
आंखों के लिए फायदेमंद :- चिरायता को आंखों का टॉनिक कहा जाता है, इसलिए आंखों के स्वास्थ्य के लिए चिरायता का सेवन करने की सलाह दी जाती है । दरअसल, विटामिन-सी आंखों की रोशनी बेहतर रखने और उम्र से संबंधित आंखों की बीमारियों से बचाव कर सकता है । वहीं, चिरायता के पौधे में भी विटामिन-सी होता है । इसी वजह से चिरायता को आंखों के लिए फायदेमंद माना जाता है।
पेट के कीड़े :- चिरायता में एंथेल्मिंटिक प्रभाव होता है। यह एक तरीके का एंटीपैरासिटिक गुण होता है, जिससे पेट व आंतों में होने वाले कीड़ों को नष्ट करने में मदद मिल सकती है। इसी वजह से पेट के कीड़ों को मारने के तरीके के तौर पर इस जड़ी-बूटी को उपयोग किया जाता है।
जोड़ों के दर्द :- चिरायता की जड़ जोड़ों के दर्द से राहत दिला सकती है। दरअसल, चिरायता में स्वेरटियामारिन कंपाउंड होता है, जो एंटी-अर्थराइटिक गतिविधि दिखाता है। इस प्रभाव से अर्थराइटिस की समस्या कम हो सकती है। अर्थराइटिस यानी गठिया का सबसे बड़ा लक्षण जोड़ों में दर्द है। इसी वजह से माना जाता है कि चिरायता प्रभावी तरीके से जोड़ों के दर्द की समस्या को कम कर सकता है ।
त्वचा स्वास्थ्य :- चिरायता का इस्तेमाल त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए भी किया जा सकता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव होता है। यह गतिविधि फोटोएजिंग यानी सूरज की रोशनी से होने वाले एजिंग को कम कर सकती है। साथ ही इसे त्वचा को निखारने में भी सहायक माना जाता है । इसके अलावा, चिरायता त्वचा संबंधी बीमारियों को दूर करने में भी सहायक हो सकता है ।
कैंसर :- चिरायता का उपयोग कैंसर जैसी बीमारियों से बचाव के लिए भी किया जाता रहा है। दरअसल, चिरायता में अमारोगेंटिन कंपाउंड होता है। यह कंपाउंड एंटी-कैंसर गतिविधि प्रदर्शित करता है, जिससे कैंसर सेल्स को बढ़ने से रोकने में मदद मिल सकती है । ध्यान दें कि चिरायता कैंसर से बचाव का एक तरीका हो सकता है, लेकिन यह इस बीमारी का इलाज नहीं है। इसके इलाज के लिए चिकित्सक से संपर्क करना जरूरी है।
हिचकी और उल्टी के लिए :- एनसीबीआई द्वारा प्रकाशित एक रिसर्च पेपर में बताया गया है कि चिरायते के गुण उल्टी और हिचकी रोकने में मददगार हो सकते हैं। बताया जाता है कि चिरायता की कड़वाहट लार और बाइल को उत्तेजित करके हिचकी को कम कर सकती है। उल्टी में यह कैसे फायदेमंद है, यह स्पष्ट नहीं है। हां, उल्टी से राहत पाने के लिए बराबर मात्रा में शहद और चिरायता खाने से फायदा मिल सकता है ।

चिरायता का उपयोग – चिरायते का पौधा व जड़ दोनों का उपयोग किया जा सकता है। आइए, जानते हैं चिरायता का सेवन करने के तरीके और मात्रा के बारे में
दिन में दो बार खाना खाने से पहले 60ml चिरायते के अर्क का सेवन टॉनिक के रूप में किया जा सकता है। इससे शारीरिक कमजोरी दूर हो सकती है।
चिरायता को गर्म पानी और लौंग या दालचीनी के साथ तैयार किया करके 15 से 30 ml या 1 से 2 बड़े चम्मच पी सकते हैं।
चिरायता की जड़ हिचकी और उल्टी में फायदेमंद हो सकती है। खुराक के रूप में शहद के साथ 0.5 से 2 ग्राम तक इसका सेवन किया जा सकता है।
चिरायता के पत्तों का जूस निकालकर पी सकते हैं। यह कड़वा होता है, इसलिए इसमें शहद को मिलाया जा सकता है।
चिरायता के नुकसान –
भले ही चिरायता का सेवन लंबे समय से आयुर्वेदिक औषधि के रूप में किया जाता रहा है, लेकिन इसके अधिक सेवन से चिरायता के नुकसान भी हो सकते हैं। वैसे रिसर्च में कहा गया है कि मनुष्यों में चिरायता के कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं हैं। फिर भी चिरायता से होने वाले सामान्य नुकसान या यूं कहें कि सावधानी के बारे में नीचे जानते हैं ।
कम रक्तचाप वाले और ब्लड प्रेशर की दवाई लेने वालों को चिरायता का सेवन करने से बचना चाहिए, क्योंकि यह रक्त शर्करा के स्तर को कम कर सकता है।
गैस्ट्रिक (पेट के) और आंत के अल्सर की समस्या वालों को चिरायता का सेवन से बचना चाहिए।
गर्भवती महिलाएं और स्तनपान कराने वाली माताएं इसे खा सकती हैं या नहीं यह स्पष्ट नहीं है, इसलिए बिना डॉक्टर से परामर्श किए इसका सेवन न करें।
इसका स्वाद कड़वा होता है, जिसे खाने से मुंह कड़वा लग सकता है।
