राजिम :- चना दाल को शाकाहारी लोगों के लिए प्रोटीन का बेहतर स्रोस है। इसमें बी-कॉम्पलेक्स विटामिन होता है जो ग्लूकोज मेटाबोलिज्म में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। साथ ही इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण भी होते हैं जो शरीर के अंगों को सूजन से बचाते हैं।
सेहत के लिए चना दाल के फायदे
ब्लड शुगर के स्तर को रखें सही- चना दाल में फाइबर की मात्रा काफी पाई जाती है । आपको बता दें कि फाइबर रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करता है। चना दाल डायबिटीज रोगियों के लिए बेहद फायदेमंद होता है। यदि आप इसका प्रतिदिन सेवन करें, तो आपको डायबिटीज जैसी बीमारी होने का कम खतरा हो सकता है।
वजन कम करने में करें मदद – चना दाल में फाइबर की मात्रा होने की वजह से इसका सेवन करने से पेट भरा रहता है और भूख कम लगती है। यदि आप इसका प्रतिदिन सेवन करें, तो आप अपने वजन को आसानी से कम कर सकते है।
हृदय को स्वस्थ रखने में मदद – चना दाल हमारे खून में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है। रिसर्च के अनुसार हृदय को स्वस्थ रखने के लिए कोलेस्ट्रोल के अस्तर का सही रहना बेहद जरूरी होता है। यदि आप चना दाल का प्रतिदिन सेवन करें, तो आप को हृदय संबंधित बीमारी होने का कम खतरा हो सकता है।
प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मददगार –चना दाल में प्रोटीन की मात्रा काफी होती है। इसका सेवन करने से शरीर का इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। यदि आप इनका प्रतिदिन सेवन करें, तो आप कई तरह की बीमारियों से बच सकते है।

हड्डियों को करें मजबूत – कैल्शियम की मात्रा सबसे ज्यादा दूध में पाई जाती है। यदि आप दूध की जगह चना दाल का भी सेवन करें, तो आपके शरीर को पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम मिल सकता है। इसका सेवन करने से ऑस्टियोपोरोसिस होने का कम खतरा होता है। यह हड्डी को मजबूत बनाने में मदद करता है।
टूटते बालों को रोके – अगर आप टूटते बालों या बालों के डैमेज होने से परेशान हैं, तो आपको नियमित चना दाल का सेवन करना चाहिए। यह फोलिक एसिड से भरपूर होता है, जो स्कैल्प को पोषण देता है और बालों को जड़ से मजबूत बनाता है। इससे बाल टूटने की समस्या कंट्रोल हो जाती है।
चना दाल को डाइट में शामिल करने के तरीके
प्रोटीन से भरपूर होने के कारण चना दाल सेहत के लिए फायदेमंद है। स्वस्थ शरीर के लिए नियमित इसे अपने आहार में शामिल करना चाहिए।

भुर्जी-सोया ग्रेन्यूल्स और शिमला मिर्च से बनी चना दाल भुर्जी में उतनी ही मात्रा में प्रोटीन होता है जितना अंडा या पनीर में होता है। इसमें अंडे और पनीर की तुलना में कम वसा और कैलोरी होती है। इस भुर्जी को रोटी या पराठा रोल या सैंडविच के रूप में खाया जा सकता है।
सूप-अगर आप शाम को कुछ हल्का खाना चाहते हैं, तो चना दाल का सूप बेहतर विकल्प है। यह हल्का होता है लेकिन इसे खाने से पेट भर जाता है। इससे शरीर को पर्याप्त प्रोटीन भी मिलता है।
हम्मस-यह स्नैक झटपट बन जाता है और इसे किसी भी चीज़ के साथ खाया जा सकता है। चना दाल से बनाया गया हम्मस आपको फाइबर के साथ प्रोटीन भी देता है। यह कम कैलोरी वाला स्नैक है जो वजन घटाने में मदद करता है।
पैनकेक-चना दाल से बनाया गया यह एक हेल्दी और पौष्टिक नाश्ते का विकल्प है। दाल को पानी में रात भर भिगो दें और इसे ब्लेंड करके अपनी पसंद की सामग्री डालकर पैनकेक बनाएं।
अधिक दाल का सेवन करने से ये समस्याएं हो सकती हैं :- चूंकि दाल में प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है इसलिए अधिक दाल खाने से आंत से जुड़ी समस्याएं जैसे- अपच या बदहजमी (), डिहाइड्रेशन, हद से अधिक थकान (), जी मिचलाना, चिड़िचड़ापन महसूस होना, सिरदर्द और डायरिया जैसी दिक्कतें हो सकती हैं.
- अगर किसी व्यक्ति को गाउट () की बीमारी हो तो आपको भी डॉक्टर से पूछे बिना दाल, बीन्स आदि का सेवन नहीं करना चाहिए. इसका कारण ये है कि दाल में प्यूरीन () की मात्रा अधिक होती है और इसलिए गाउट के मरीजों को सूखी मटर, बीन्स, दाल आदि का सेवन नहीं करना चाहिए
- जिन लोगों को पेट फूलना और पेट में गैस की समस्या रहती हो उन्हें भी बहुत अधिक दाल, सूखी बीन्स और मटर का सेवन करने से परहेज करना चाहिए. इसका कारण ये है कि जब दाल में मौजूद नैचरल शुगर को शरीर तोड़ता है तो गैस बनने लगती है. ऐसे में जिन लोगों को अधिक गैस बनने की समस्या है उन्हें दाल का सेवन कम ही करना चाहिए,
- दाल, पालक, चाय और चॉकलेट जैसी चीजों में प्राकृतिक रूप से ऑक्सलेट पाया जाता है और ऑक्सलेट का अधिक सेवन करने से किडनी में स्टोन बनने का खतरा अधिक होता है,
चना दाल को कैसे रखें - दाल को हमेशा ठन्डे व सूखे स्थान पर रखना चाहिएं
- दाल को बनाकर तुरंत उपयोग करना चाइये, बासा नहीं खाना चाइये। चना दाल बनाने एवं खाने का तरीका, चना दाल को आप सब्जी के तौर पर बना सकते हैं, साथ ही आप इसका इस्तेमाल डोसा बनाने में कर सकते हैं।
