
रायपुर :- गुरु पूजा के अवसर पर महात्मा दीप्ति बाई जी, महात्मा प्रभुचरणानंद जी, महात्मा धारानंद जी एवं महात्मा विलक्षणा बाई जी ने सभी धर्म ग्रंथों पर आधारित सारगर्भित सत्संग प्रवचन दिए। यहां दूर-दूर से भक्तगण गुरु का आशीर्वाद लेने कार्यक्रम में पहुंचे। इस दिन 39 लोगों ने गुरू दीक्षा ली। कार्यक्रम का आरंभ दीप प्रज्वलन के साथ सदगुरुदेव श्री सतपाल जी महाराज के पावन छवि पर माल्यार्पण कर किया गया। तत्पश्चात महात्मा दीप्ति बाई जी ने अपने प्रवचन के माध्यम से गुरु की महिमा का बखान किया। उन्होंने कहा कि गुरु शब्द ‘गु’ और ‘रु’ से मिलकर बना है।

इसमें गु का अर्थ अंधकार, अज्ञान से है तो वहीं रु का अर्थ दूर करना या हटाना है। इस तरह से गुरु वह है जो हमारे जीवन से अज्ञानता के अंधकार को दूर करते हैं और हमें ज्ञानी बनाते हैं। गुरु से ही जीवन में ज्ञान की ज्योति से सकारात्मकता आती है। शास्त्रों में भी गुरु को देवताओं से भी ऊंचा स्थान प्राप्त है। स्वयं भगवान शिव गुरु के बारे में कहते हैं, ‘गुरुर्देवो गुरुर्धर्मो, गुरौ निष्ठा परं तपः। गुरोः परतरं नास्ति, त्रिवारं कथयामि ते।।’ यानी गुरु ही देव हैं, गुरु ही धर्म हैं, गुरु में निष्ठा ही परम धर्म है।इसका अर्थ है कि गुरु की आवश्यकता मनुष्यों के साथ ही स्वयं देवताओं को भी होती है। गुरु को लेकर कहा गया है कि, ‘हरि रूठे गुरु ठौर है, गुरु रूठे नहिं ठौर’ यानी भगवान के रूठने पर गुरु की शरण मिल जाती है, लेकिन गुरु अगर रूठ जाए तो कहीं भी शरण नहीं मिलती। आगे उन्होंने महाभारत के कृष्ण-अर्जुन संवाद के माध्यम से कहा कि किस प्रकार मन माया में बांधना चाहता है। जब रणभूमि में अर्जुन युद्ध करने से मना करते हैं तो श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि आज तुम्हारे पास युद्ध करने का समय और अवसर है और तुम युद्ध नहीं करना चाहते हो। कृष्ण कहते है कि तुम जिसे अपना कह रहे हो वास्तव में यहां कोई किसी का नहीं है। ये दुनिया स्वार्थ की दुनिया है। यहां कोई किसी का नहीं हैं। वे आगे कहती हैं कि दुनिया में हर कोई स्वार्थ को छोड़ना नहीं चाहता है। ये मेरा है ये तेरा है ये मन से नहीं जाता है जो कि यही माया है। जब ये मन भक्ति में लग जाए और संसार से बैरागी बन जाए और व्यक्ति स्वयं भक्ति की मार्ग पर चलने लग जाए तो संसार में भगवान को आने की जरूरत नहीं है। पर मन है कि माया के रंग दिखाता और तरंगों के पीछे भगाता है। मन को वश में करना अति आवश्यक है।विचलित मन को गुरु के चरणों में जाकर उनके बताए मार्ग का अनुसरण करने से ही मन को वश में किया जा सकता है। उन्होंने गुरु की निंदा न करने और न सुनने की सलाह दी। गुरु पूजा के पावन अवसर पर जरूरतमंद बच्चों के लिए मिशन एजुकेशन का डोनेशन बॉक्स भी लगाया गया जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने स्टेशनरी सामग्री का दान किया। जिसे जरूरतमंद बच्चों को उनकी शिक्षा को निर्बाध रूप से पूर्ण करने हेतु प्रदान किया जा सके। कार्यक्रम में महात्मा दीप्ति बाई जी ने आए हुए सभी भक्तगणों को संस्था द्वारा संचालित 2 जुलाई से 16 जुलाई तक वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम हेतु प्रोत्साहित किया। साथ ही एक-एक पेड़ लगाने एवं उसके संरक्षण का संकल्प भी कराया। कार्यक्रम में 300 पौधे वितरित किए गए।कार्यक्रम की समाप्ति गुरुदेव की आरती और भजन से हुई। उसके बाद भंडारा प्रसाद वितरण किया गया। उपरोक्त समाचार सत्य प्रकाश साहू मीडिया प्रभारी मानव उत्थान सेवा समिति रायपुर से प्राप्त हुई।
