
गुरु की कीजै नित सम्मान
जन्म मरण का भेद बताया
अंतस का सब भेद मिटाया
सद्गुरु को सादर है प्रणाम
गुरु की कीजै नित सम्मान
जीवन का अँधियार मिटाकर
जीवन मे नवज्योति जलाकर
जीवन का बढ़ाया जैसे मान
गुरु की कीजै नित सम्मान
सद्गुरु मिले जीवन सुलझे
जीव आशा तृष्णा मे उलझे
कीजिये गुरुवर का ही गान
गुरु की कीजै नित सम्मान
गुरु से निज की गुरुता बढ़े
ज्ञान और मान सम्मान बढ़े
चरणरज से मिटे अभिमान
गुरु की कीजै नित सम्मान
गुरु ही भ्रम जाल मिटाये
आचरण से मान दिलाये
गुरुवर को कोटिशः प्रणाम
गुरु की कीजै नित सम्मान
रचनाकार
प्रमेशदीप मानिकपुरी
आमाचानी धमतरी छ.ग.
9907126431
