उफनती नदी में भैंसों ने की नदी पार l 

राजिम :- पिछले तीन-चार दिनों से हो रहे अनवरत बारिश के चलते नदी नाले उफान पर आ गए हैं। जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। कच्ची घर में रहने वाले लोगों को बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गांव शहर सभी जगह कुछ ऐसे परिवार मिट्टी के बने घर में रहते हैं जहां पानी टपक रहा है और लोग

कमरा भरने के बाद पानी को बाहर निकालने में मशक्कत कर रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास के इंतजार में समय बीतता जा रहा है लेकिन अभी तक उनके घर पक्की नहीं बन पाए हैं इधर बारिश में सूखी पड़ी नदी में पानी ला दिया है। मंगलवार को सुबह 9:00 बजे सोंढूर, पैरी नदी चौबेबांधा पुल से 100 मीटर की दूरी पर नदी में दो भैंस जोखिम ले लिया और धमतरी जिला के नवागांव खार से सीधे नदी में उतर गए। दोनों भैंस आगे बढ़ते गए और पानी की धार पहले घुटने तक हुए उसके बाद उनका शरीर डूबने लगा फिर भी दोनों भैंस आगे बढ़ते रहे। नदी पार करने के लिए इन भैंसों की जोखिम लेने के ढंग को देखकर देखने वाले हर कोई दंग रह गए। बताना होगा कि शाम तक तो तेजधार चलना शुरू हो गया जिसके चलते संगम में स्थित पंचमुखी कुलेश्वर नाथ महादेव मंदिर चारों ओर से पानी से गिर गया। संगम तट से पानी का नजारा मन मोह रहा था। उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार के द्वारा लगभग 35 करोड़ की लागत से 610 मीटर लंबी लक्ष्मण झूला का निर्माण कराया गया है जिनका लोकार्पण पिछले साल महाशिवरात्रि पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किया था उसके बाद से श्रद्धालुओं को महादेव मंदिर पहुंचने में सोहलियत हुई है।

       पानी बढ़ने पर जोखिम लेना ठीक नहीं

उफनती नदी पर जोखिम लेना ठीक नहीं है। इस समय सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। पशु मालिकों को चाहिए कि अपने गाय भैंस बैल को जतन कर रखें तथा उनकी चिंता करें। अक्सर देखा जाता है कि बाढ़ के पानी में पशु बह जाते हैं। वहीं दूसरी ओर लट्ठे के चक्कर में ग्रामीण नदी में छलांग लगा देते हैं और फिर कई बार दिक्कत की स्थिति भी निर्मित हो जाती है इसलिए सोच समझकर निर्णय लेने की आवश्यकता है। पिछले साल लकड़ी निकालने के चक्कर में शहर से लगे हुए गांव में तीन आदमी भंवर में फंसकर मर गए थे।

           जनजीवन हुआ अस्त व्यस्त

झड़ी के चलते जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है लोगों का अधिकांश समय घरों में ही बीत रहा है। ऐसे में परिवार की आवक ना के बराबर हो गई है लेकिन खर्चा बराबर हो रहे हैं। दिन भर पानी गिरने के कारण पांव में केंदुआ का अतिक्रमण हो रहा है इससे लोग आशा परेशान हैं। डॉक्टरों के पास सर्दी खांसी बुखार इत्यादि के लिए पेशेंट बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं।

                   बोनी कार्य पिछड़ी

धान बोने का कार्य बिछड़ते हुए दिखाई दे रहा है पहले पानी नहीं गिर रहे थे तब लोग पानी के इंतजार में दिन काट रहे थे अब पानी लगातार गिरने के कारण खेतों में पानी की मात्रा ज्यादा हो गई है उसे निकालने का कोई रास्ता नहीं है जिसके कारण इंतजार करने के सिवा और कुछ नहीं है। किसान राम प्रसाद सोनकर महंगी बीजहा धान खरीद लाए हैं। उसे छिड़कने के लिए सबसे पहले उन्होंने अंकुरण किया और जैसे ही खेतों में ले जाने के लिए तैयार हुआ पानी गिरने के कारण खेत लबालब भरा हुआ है इसी के चलते उनकी भी ज्यादा खराब हो रहे हैं जिससे उन्हें चिंता लगी हुई है। किसान लीला राम साहू ट्रैक्टर से खेत को मताई के लिए पानी की धार कम होने का इंतजार कर रहे हैं। किसान मंगलू, दीनानाथ, महेंद्र, संतोष, नेकराम इत्यादि बोनी कार्य पिछड़ने के कारण चिंतित दिखाई दे रहे हैं। वही कुछ किसान थरहा लगाने के काम में व्यस्त भी है।