तिल के उपयोग से न सिर्फ स्वस्थ रहा जा सकता है, बल्कि बीमारी की अवस्था में कुछ लक्षणों को कम भी किया जा सकता है।

राजिम:-  अक्सर मकर संक्रति के त्योहार पर दिखने वाला तिल आकार में छोटा होता है, लेकिन इसमें पाए जाने वाले औषधीय गुण लाभकारी होते हैं। सामान्य तौर पर तिल के बीज तीन रंगों के होते हैं- सफेद, काले और भूरे। कई औषधीय गुणों से भरपूर इस तिल का प्रयोग कई प्रकार से किया जा सकता है। इसके सेवन से कई रोगों को दूर रख सकता है। यही नहीं इस तिल से बनाए गए तेल का प्रयोग त्वचा और बालों के लिए किया जा सकता है।

तिल क्‍या है?
तिल का वैज्ञानिक नाम सेसमम इंडिकम है, और इसे बेनी भी कहा जाता है। इसका पौधा पेडालियासी  परिवार से संबंधित है। इसका उपयोग विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाने और अन्य भोजन का स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है। साथ ही इससे तेल भी निकाला जाता है, जो बेहद फायदेमंद होता है। खासकर, मकर संक्राति में तिल का उपयोग करना सबसे शुभ माना गया है। तिल को विश्व का सबसे पहला तिलहन माना गया है। तिल के बीज का पौधा लगभग एक मीटर ऊंचा होता है। वहीं, इसकी पत्तियां चार से आठ इंच तक लंबी और तीन से चार इंच चौड़ी होती हैं। इसके फूल गिलास के आकार के होते हैं, जो चार भागों में बंटे होते हैं। तिल का सेवन कच्चे या सूखे रूप में या फिर भुने हुए स्नैक्स के रूप में किया जा सकता है। तिल के फायदे कई हो सकते हैं, जिनके बारे में आप लेख में आगे जानेंगे।

तिल के औषधीय गुण :- तिल औषधीय गुणों से भरपूर होता है। तिल में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन-बी1, फास्फोरस, आयरन, मैग्नीशियम, कैल्शियम, कॉपर व जिंक आदि गुण पाए जाते हैं । इसमें सेसमीन और सेसमोलिन नामक दो सबसे महत्वपूर्ण कंपाउंड भी पाए जाते हैं, जो कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोक सकते हैं। साथ ही तिल में फाइटोस्टेरॉल, पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड होता है, जो शरीर से कोलेस्ट्रोल को कम करता है। यह दिल से जुड़ी बीमारियों के लिए भी फायदेमंद हो सकता है । इसलिए, कहा जा सकता है कि तिल खाने के फायदे कई सारे हैं।

तिल के फायदे –तिल के बारे में जो बातें हम बताने जा रहे हैं, वो गुणकारी हो सकती हैं। काले, भूरे और सफेद तिल के फायदे लगभग बराबर ही हैं, क्योंकि सभी में औषधीय गुण मौजूद हैं। तिल के उपयोग से न सिर्फ स्वस्थ रहा जा सकता है, बल्कि बीमारी की अवस्था में कुछ लक्षणों को कम भी किया जा सकता है। हां, अगर कोई गंभीर रूप से बीमार है, तो सिर्फ तिल ही उसका इलाज नहीं हो सकता है। ऐसी अवस्था में डॉक्टर से इलाज करवाना ही एकमात्र सही विकल्प होता है। तो आइए, अब तिल के विभिन्न फायदों के बारे में जानते हैं।

उच्च प्रोटीन शाकाहारी आहार :- तिल के बीज को शाकाहारी आहार के लिए सबसे अच्छा विकल्प हो सकता है, क्योंकि इसे प्रोटीन का अच्छा स्रोत माना गया है । दरअसल, प्रोटीन एक महत्वपूर्ण पोषक तत्व है, जो मांसपेशियों और हड्डियों का निर्माण करता है। साथ ही शरीर को ऊर्जा भी प्रदान करता है। यही नहीं प्रोटीन वजन नियंत्रण में भी मदद कर सकता है ।

मधुमेह से बचाव :- तिल के बीज में ऐसे कई पोषक तत्व होते हैं जो, मधुमेह का मुकाबला करने में मददगार साबित हो सकते हैं। एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) की वेबसाइट पर उपलब्ध एक शोध के अनुसार, तिल मधुमेह के रोगियों में हृदय संबंधी समस्याओं को सुधारने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, तिल शरीर में इंसुलिन के स्तर को भी नियंत्रित कर सकता है, जिससे डायबिटीज के लक्षणों को सामान्य करने में मदद मिल सकती है । वहीं, एक अन्य शोध से पता चलता है कि तिल के बीच का सेवन टाइप 2 मधुमेह की रोकथाम में कुछ हद तक लाभदायक सिद्ध हो सकता है ।

 

उच्च एंटीऑक्सीडेंट :- तिल में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट बेहद लाभकारी होते हैं। दरअसल, फ्री रेडिकल्स शरीर के स्वस्थ सेल के साथ मिलकर शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे में तिल में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट फ्री रेडिकल्स को खत्म करके शरीर को बीमारी से बचाने में मदद कर सकते हैं। है हाल ही में हुए एक शोध से पता चला है कि तिल में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट हृदय की सुरक्षा और ट्यूमर की रोकथाम में भी प्रभावी है ।

 

स्वस्थ हृदय के लिए :- जब शरीर में कोलेस्ट्रोल की मात्रा बढ़ जाती है, तो हृदय संबंधी रोग होने का खतरा बढ़ जाता है। इस लिहाज से स्वस्थ हृदय के लिए के लिए तिल के बीज का सेवन लाभदायक हो सकता है। तिल के बीज में सेसमोल नामक कंपाउंड होता है, जिसमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रभाव होता है। साथ ही तिल के बीज में एंटी-एथेरोजेनिक गुण भी होता है, जिससे यह हृदय को स्वस्थ रखने में मदद मिल सकती है ।

कैंसर से बचाए :- जैसा कि हमने अपने लेख के शुरुआत में ही बताया कि तिल खाने के फायदे कई सारे हैं, क्योंकि तिल के बीज में कई औषधीय गुण पाए जाते हैं। तिल में मौजूद एटीकैंसर और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण कैंसर के खतरे से बचाने में मदद कर सकता है। एनसीबीआई की वेबसाइट पर उपलब्ध एक शोध के अनुसार, तिल में मौजूद लिग्नांस पर व्यापक रूप से अध्ययन किया गया है। इस अध्ययन के अनुसार इसे एंटीजिंग, एंटीकैंसर, एंटीडायबिटीज, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के लिए जाना जाता है । ध्यान रहे कि तिल का सेवन सिर्फ कैंसर से बचा सकता है। इसे कैंसर का इलाज समझना गलत होगा। अगर कोई कैंसर से पीड़ित है, तो उसे डॉक्टर से इलाज करवाना चाहिए।

रेस्पिरेटरी हेल्थ के लिए लाभदायक :-अस्थमा श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारी है। ऐसे में तिल का सेवन करने से इस समस्या को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। बता दें कि तिल में एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होता है। चुहों पर किए गए एक शोध से पता चलता है कि तिल के तेल से ब्रॉन्काइटिस के कारण होने वाली सूजन यानी ब्रोन्कियल न्यूट्रॉफिलिक को कम करने में मदद मिल सकती है ।

हड्डियों को करे मजबूत :- हड्डियों को मजबूत करना भी तिल के गुण में शामिल है। तिल के बीज में पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड होता है, जो एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी से होने वाले ओस्टियोपोरोसिस की समस्या को ठीक कर सकता है। इसके अलावा, ताहिनी यानी तिल के तेल से बनने वाले पेस्ट कैल्शियम होता है। इस लिहाज से यह हड्डियों को मजबूत बाना सकता है ।

आंखों के लिए:- तिल आंखों के लिए भी बेहद फायदेमंद साबित होता है। एनसीबीआई की ओर से उपलब्ध रिसर्च पेपर के अनुसार, तिल में एंटीबैक्टीरियल गुण होता है, जो आंखों की रोशनी को कुछ हद तक ठीक कर सकता है। अभी इस संबंध में और शोध किए जा रहे हैं।

लो ब्लड प्रेशर के लिए लाभकारी :-तिल के गुण की बात करें, तो यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। एनसीबीआई की वेबसाइट पर उपलब्ध रिसर्च पेपर की बात करें, तो उसमें बताया गया है कि तिल में एंटीहाइपरटेंसिव गुण पाया जाता है। इस गुण के कारण यह उच्च रक्तचाप में प्रभावी साबित हो सकता है। इसके अलावा, तिल में मौजूद सेसमीन और सेसमोलिन कंपाउंड उच्च रक्तचाप को कम कर सकते हैं ।

सूजन कम करने में उपयोगी :- तिल खाने के फायदे कई सारे हैं। तिल का इस्तेमाल सूजन कम करने में भी किया जा सकता है। जैसा कि हमने अपने लेख के शुरुआत में यह बताया कि तिल के बीज में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होता है, जो सूजन में मदद कर सकता है ।


तिल के नुकसान – तिल के तेल के फायदे तो कई हैं, लेकिन कई बार इसका अधिक उपयोग नुकसानदायक भी हो सकता है, जो इस प्रकार है:

  • कुछ लोगों को तिल के तेल के उपयोग से एलर्जी हो सकती है ।
  • अधिक मात्रा में तिल का सेवन करने से त्वचा प्रभावित हो सकती है, जिसमें खुजली व लालिमा आदि शामिल है ।
  • गर्भवती को तिल का सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए, ताकि तिल से होने वाले किसी भी नुकसान से बचा जा सके।