कांग्रेस-भाजपा के समक्ष “बिपारजॉय” जैसी स्थिति, दोनों ही दलो में दावेदारों का हूजूम।

राजिम :– मई-जून की भीषण तपिशो के बीच केन्द्रीय निर्वाचन आयोग द्वारा छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों के विधानसभाओं के चुनाव आगामी नवंबर-दिसंबर माह में कराये जाने की घोषणा और प्रारंभिक तैयारियों के साथ ही दोनों प्रमुख राष्ट्रीय दलो भाजपा-कांग्रेस नेताओं के मध्य जुबानी जंग, वार-पलटवार तेज होने के साथ ही सभा-सम्मेलनों के माध्यम से अपने कार्यकर्ताओं को रिचार्ज करना शुरू कर दिया है। एक ओर जहां केन्द्र पदस्थ भारतीय जनता पार्टी द्वारा जहां प्रदेश में केन्द्रीय योजनाओं से लाभांवित लाभार्थी मतदाताओं के माध्यम से बूथ के अंतिम मतदाता तक पहुंचने की कवायदों में जुटी नजर आ रही हैं तो वहीं दूसरी ओर प्रदेश पदस्थ कांग्रेस पार्टी अपनी सरकार की किसानों की कर्जा माफी, गोधन-भूमिहीन न्याय योजना, 2500 रू. में धान खरीदी, बेरोजगारी भत्ता आदि योजनाओं से लाभांवित हितग्राहियों का बूथवार डाटाबेस तैयार कर इसके माध्यम से आसन्न चुनाव में प्रत्येक बूथ के अंतिम मतदाता तक पहुंच प्रदेश में पुनः दूसरी मर्तबा कांग्रेस की सरकार बनाने में कमर कसती दिख रही हैं।

इन सबके बावजूद दोनों ही प्रमुख दलो में ‘ ‘बिपारजॉय’ की चक्रवाती स्थिति से भी कम नहीं हैं। ‘अहम और वहम’ के चलते 2018 के चुनाव में करारी शिकस्त के साथ पंद्रह वर्षीय सत्ता सुख खोने वाली भाजपा ‘ सदमे’ की जद से आज भी उबरती नहीं दिख रही हैं मौजूदा हालातों में पार्टी को कर्नाटक की भांति प्रदेश स्तर पर सर्वमान्य नेतृत्व हीनता के दौर साथ लोक-लुभावन मुद्दों की कमी से जूझना पड़ रहा हैं बीते 3-4 वर्षो में विपक्षी पार्टी के रूप में भाजपा की भूमिका सिर्फ सदन में ही नजर आयी मैदानी इलाकों में नहीं, मौजूदा कांग्रेस सरकार के 2018 के घोषणा पत्र के शराबबंदी, बेरोजगारी भत्ता, आरक्षण नीति, पंचायत संविदा, अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण के मुद्दों को लेकर भाजपा जमीनी प्रदर्शन में पूरी तरह विफल रही और अब ये ब्रह्मास्त्र उनके हाथ से निकलते दिखाई पड़ रहा हैं तो वहीं दूसरी ओर इससेे कमत्तर स्थिति कांग्रेस की भी नहींं हैं कांग्रेस का सियासी पिच पूरी ‘वन मैन’ शो की तरह रहा तमाम लोक -लुभावन असरदार जमीनी योजनाओं के बावजूद पार्टी अस्त-व्यस्त नजर आ रही हैं जिले में कांग्रेस संगठन की बदहाली किसी से छिपी नहीं हैं, जिले में ‘ सत्ता-संगठन ‘ के केंद्रीयकृत व्यवस्था से समूचे कार्यकर्ताओं में हताशा के साथ खासी नाराजगी भी व्याप्त हैं उन्हें अपने ही छोटे -छोटे पारिवारिक कामों के लिए ही प्रशासन से जद्दोजहद करनी पड़ी सीएम के ‘ढाई-ढाई साल’ के फार्मुले और ईडी के झंझावतों से उपजी संशय पूर्ण स्थिति ने अफसरशाहो पूरी तरह से बेलगाम और निरंकुश बना दिया और इसका सीधा खामियाजा जिले की भोली – भाली जनता को भोगना पड़ा, कोरोना काल के दौरान क्षेत्रीय विधायक द्वारा क्षेत्र को अपने हाल में छोड़े जाने का मलाल आज भी लोगों के जेहन में हैं, अपने मौजूदा कार्यकाल में वे क्षेत्र को कोई बड़ी योजना उपलब्धि दिलाने में पूरी तरह विफल रहे।

बहरहाल जमीं की तपिश तो कुछ दिनों के बाद सावन की बाछौरो से ठंडी हो जायेगी लेकिन सियासी पंडितो की माने तो राजिम विधानसभा क्षेत्र के ‘सियासी-जमीं ‘ की तपन निरंतर नवंबर-दिसंबर के भीषण शीतलहर के मध्य भी आगामी छै महिनों तक जारी रहने के संकेत हैं। आसन्न चुनाव को लेकर यदि दोनों ही दलों के भावी दावेदारों की फेहरिस्तों को देखें तो जूतम -पैजार की स्थिति हैं भाजपा के प्रमुख दावेदारों में मौजूदा सांसद चुन्नीलाल साहू, पूर्व सांसद चंदूलाल साहू, भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीप शर्मा, नगर पंचायत राजिम के दूसरी दफे निर्वाचित अध्यक्ष रेखा सोनकर, भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश साहू, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्वेता शर्मा, मजदूर संघ के गैंदलाल साहू, राजिम भक्तिन मंदिर समिति के अध्यक्ष लाला साहू, वरिष्ठ नेता राजू सोनकर, अशोक राजपूत, मुरलीधर सिन्हा, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. रामकुमार साहू , रिटायर्ड पुलिस अधिकारी बोधन साहू , जिला पंचायत सदस्य रोहित साहू ,चंद्रशेखर साहू , प्रीतम सिन्हा आदि के नाम चर्चे में हैं , यदि विपक्षी पार्टी में दावेदारों की संख्या दर्जनों में है तो रूलिंग पार्टी में यह संख्या दर्जनों से अधिक होना लाजिमी हैं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के ‘उदयपुर चिंतन शिविर ‘ के तयशुदा फार्मुले ने राजिम क्षेत्र के मौजूदा विधायक अमितेश शुक्ला गंभीर चुनौती खड़ी कर दी हैं चिंतन शिविर के तयशुदा मापदंड ‘ अंड़र फिफ्टी ‘ व ‘फार फिफ्टी ‘ के तहत 50 फीसदी सीटो पर 50 वर्ष से कम के युवा उम्मीदवारों को मौका देने का फैसला लिया गया हैं, यदि इसके साथ ही कांग्रेस की महासचिव, स्टार प्रचारक प्रियंका गांधी का उत्तरप्रदेश वाला चुनावी फार्मूला 50 फीसदी सीटो पर महिला उम्मीदवार चला तो कुल 90 सीटो में से लगभग 45 – 60 सीटो पर पार्टी का युवा एवं महिला उम्मीदवार उतारे जाने की संभावनाओं के चलते पूर्व मुख्यमंत्री पंद्रह. श्यामाचरण शुक्ल के परंपरागत सिपहसलार परिवार से ही अघोषित दावेदारियां शुरू हो गई हैं ।

पं.शुक्ल के करीबी रहे स्व. लालजी साहू परिवार से जिला पंचायत सदस्य बहू लक्ष्मी साहू , पौत्र शैलेन्द्र साहू, स्व. बल्देव पाण्डेय परिवार से पुत्र युगलकिशोर पाण्डेय, एवं कांग्रेस कमेटी के मौजूदा जिलाध्यक्ष भावसिंग साहू द्वारा अपनी दावेदारी के पक्ष में अंदरूनी तौर परअघोषित मुहिम छेड़ दी गई हैं स्थिति से निपटने और तयशुदा मापदंडों के मद्देनजर विधायक अमितेश शुक्ल द्वारा अपने परिवार की परंपरागत सीट पर कब्ज़ा बरकरार रखने अपने पुत्र अनादिशंकर शुक्ल के साथ पुत्रवधू प्रियंका शुक्ल को मैदानी इलाके मे सक्रिय किया जा चुका हैं। महिला कोटे और जातिगत समीकरणों को ध्यान में रख जिला पंचायत गरियाबंद सभापति मधुबाला रात्रे, फिंगेश्वर जनपद अध्यक्ष पुष्पा जगन्नाथ साहू, जनपद पंचायत सभापति अर्चना दिलीप साहू, द्वारा संघन जनसंपर्क प्रारंभ कर दिया गया हैं। इसके साथ ही फिंगेश्वर में पले – बढ़े और राजिम से छात्र राजनीति से अपने सियासी सफर की शुरुआत करने वाले कभी संत पवन दीवान और पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के रणनीतिकारों में सुमार रहे जिला कांग्रेस कमेटी रायपुर (ग्रामीण ) के पूर्व महामंत्री डीके ठाकुर की अप्रत्याशित सक्रियता के साथ संभावी दावेदारी चर्चे में होने के साथ डायरेक्ट सी एम हाऊस कनेक्टेड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संयुक्त महामंत्री, बाबूलाल साहू, जनपद पंचायत फिंगेश्वर के पूर्व अध्यक्ष जितेंद्र साहू, पूर्व जिला पंचायत सदस्य डॉ. आनंद मतावले, छुरा जनपद पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष, अवधराम साहू, जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष बैशाखूराम साहू, किसान कांग्रेस नेता अभिषेक मिश्रा की ओर से पूरे दमखम के साथ दावेदारी किये जाने की तैयारी के समाचार मिल रहे हैं इन दोनों दलों के अलावा छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस (जे), बहुजन समाज पार्टी, आम आदमी पार्टी, सर्व आदिवासी समाज, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी, आदि में उहापोह की स्थिति नजर आ रही हैं आसन्न चुनाव में जोगी कांग्रेस की ओर से विभिन्न राष्ट्रीय दलों से गठबंधन की पहल और कोशिशों के बीच अभी इन दलो के भावी दावेदारों को लेकर फौरी तौर पर कुछ कह पाना मुश्किल हैं। इनकी स्थिति आगामी कुछ महिनों के भीतर ही स्पष्ट हो पायेगी।