
एम सी बी :- चिरिमिरि में लगभग 150 साल पुराने बरगद की जड़ों से लिपटे गोदरीपारा के गुफा मंदिर में भीषण गर्मी में भी ठंडक रहती है। बरगद का विशाल पेड़ यहां आने वालों को छाया और सुकून दे रहा है। पेड़ के नीचे शीतल वातावरण व गर्मी से राहत के लिए अक्सर युवा समेत महिलाएं यहां एकजुट नजर आती हैं। गर्मी में भी पेड़ के नीचे का तापमान 5 डिग्री कम रहता है। मंदिर गोरखनाथ गुफा के नाम से पहचाना जाता है। मंदिर का निर्माण जिस तरह से किया गया है, उससे यह अपने आप में ही एक आकर्षण लगता है। गुफा की पत्थरों पर देवी-देवता की तस्वीर उकेरी गई है। बरगद से ढंके होने के कारण गर्मी में भी गुफा और आसपास का परिसर ठंडा रहता है। यहां एक मंदिर का निर्माण बरगद के तने पर किया गया है। गुफा सैकड़ों साल पुरानी है।उत्कल समाज करता है देखरेख : गुफा मंदिर और आसपास के परिसर की देखरेख उत्कल समाज द्वारा की जाती है। मंदिर के पुजारी कैलाश पंडा ने बताया कि गुफा प्राकृतिक है। बरगद का पेड़ करीब 150 साल पुराना है। हर साल महाशिवरात्रि के समय होने वाले रुद्र महायज्ञ में यहां काफी भीड़ रहती है। वट सावित्री पूजा में भी बड़ी संख्या में महिलाएं एकजुट होती हैं।
