आयुर्वेद में सदियों से पुदीने का इस्तेमाल औषधि के रुप में किया जा रहा है।

राजिम:- पुदीना सबसे ज्यादा अपने अनोखे स्वाद के लिए ही जाना जाता है। पुदीने की चटनी न सिर्फ खाने का जायका बढ़ाती है बल्कि स्वास्थ्यवर्द्धक भी होती है। आयुर्वेद में सदियों से पुदीने का इस्तेमाल औषधि के रुप में हो रहा है। सामान्य तौर पर पुदीने का उपयोग दंत-मंजन, टूथपेस्ट, चुइंगगम्स, माउथ फ्रेशनर, कैंडीज, इन्हेलर आदि में किया जाता है। इसके अलावा भी आयुर्वेद में पुदीने का प्रयोग अन्य रोगों के इलाज में भी होता है। चलिये पुदीने के बारे में विस्तार से आगे जानते हैं।

पुदीना क्या है?
पुदीना का पौधा की कई प्रजातियां होती हैं, लेकिन औषधि और आहार के लिए मेंथा स्पीक्टा लिन्न का ही प्रयोग किया जाता है। इस पुदीने को पहाड़ी पुदीना भी कहा जाता है; क्योंकि यह पहाड़ी इलाके में अधिक होता है। पुदीना एक गुणकारी पौधा है। इसकी पत्तियों का इस्तेमाल व्यंजनों का जायका बढ़ाने से लेकर कई शारीरिक समस्याओं के लिए प्राकृतिक औषधि के रूप में किया जाता है। इस पर हुए कई वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर यह माना गया है कि पुदीना सेहत पर सकारात्मक प्रभाव दिखा सकता है। यही वजह है कि स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम शरीर के लिए पुदीना के फायदे बताने जा रहे हैं। यहां आपको इसके उपयोग और वैकल्पिक उपचार के तौर पर पुदीना के लाभ जानने को मिलेंगे। साथ ही पुदीना के नुकसान से जुड़ी जानकारी को भी लेख में साझा किया गया है। पाठक इस बात का ध्यान रखें कि पुदीना लेख में बताई गई किसी भी बीमारी का इलाज नहीं है। यह सिर्फ समस्याओं के लक्षण और प्रभाव को कम करने में कुछ हद तक मदद कर सकता है।

पुदीना के पत्ते के फायदे –  पुदीना के बारे में जानने के बाद यहां हम पुदीना की पत्तियों के फायदे के बारे में बता रहे हैं।

इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम सुधार :-  एक आम विकार है, जो बड़ी आंत को प्रभावित करता है। इसकी वजह से पेट में दर्द, दस्त और कब्ज की समस्या होती है। पुदीने का उपयोग इस विकार को दूर करने में मददगार हो सकता है। शोध में पाया गया है कि पुदीने की चाय में एंटीसेप्टिक गुण होते हैं। पुदीने की चाय में पाए जाने वाले एंटीसेप्टिक गुण इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम में आराम पहुंचाने में मददगार हो सकते हैं ।

याददाश्त को बढ़ाने में फायदेमंद :- पुदीना के औषधीय गुण याददाश्त बढ़ाने में लाभदायक हो सकते हैं। इस संबंध में इंग्लैंड की एक यूनिवर्सिटी ने शोध किया गया है। इस शोध में 180 युवाओं को पुदीने की चाय का सेवन कराया गया। 20 मिनट बाद शोधकर्ताओं ने युवाओं में कई सकारात्मक परिणाम देखे, जैसे सजगता में वृद्धि और मस्तिष्क कार्य प्रणाली में तेजी। शोध में इस बात का भी जिक्र है कि पेपरमिंट चाय याददाश्त और याददाश्त की गति बढ़ाने में सहयोग कर सकती है। इस आधार पर माना जा सकता है कि पुदीने की चाय का सेवन याददाश्त को बढ़ाने में लाभदायक हो सकता है ।

मतली की अवस्था में सुधार करे :- बार-बार उल्टी आने की इच्छा ही मतली की समस्या है। यहां पुदीना के फायदे देखे जा सकते हैं। एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफार्मेशन) की वेबसाइट पर पुदीने पर एक शोध प्रकाशित किया गया है। शोध में पुदीना अरोमाथेरेपी का उल्टी और मतली की समस्या पर सकारात्मक प्रभाव देखा गया। इस शोध के आधार पर कहा जा सकता कि मतली के साथ उल्टी की समस्या से आराम पाने के लिए पुदीना की अरोमाथेरेपी कारगर साबित हो सकती है । फिलहाल, मतली की समस्या को दूर करने वाले पुदीना के औषधीय गुण अभी शोध का विषय हैं।

सिरदर्द की समस्या को दूर करने के लिए :-सिरदर्द की समस्या रातों की नींद गायब कर सकती है। इस समस्या को दूर करने के लिए पुदीना मददगार साबित हो सकता है। रिसर्च जनरल ऑफ मेडिसिनल प्लांट के एक शोध के अनुसार पुदीना (इसके रस या एसेंशियल ऑयल) को सिर पर कुछ देर लगाने से सिरदर्द में आराम मिल सकता है। इसके दर्दनिवारक गुण के पीछे इसमें मौजूद मेंथॉल का प्रभाव हो सकता है ।

पाचन में फायदेमंद :- पुदीने पर किए गए एक अध्ययन में जिक्र मिलता है कि यह पाचन में मददगार हो सकता है । दरअसल, यह पेट की मांसपेशियों को आराम पहुंचाने के साथ-साथ पाचन में सहायक बाइल्स (पाचक रस) के प्रवाह में सुधार का काम कर सकता है। परिणामस्वरूप, भोजन आसानी से पचता है स्तनपान के दौरान लाभदायक :-  पुदीने का उपयोग स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए कुछ हद तक फायदेमंद हो सकता है। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, पिपरमिंट जेल या सोल्युशन स्तनपान कराने वाली महिलाओं के निप्पल में दर्द, उनमें आई दरारें और स्तन या निप्पल के चारों को पड़ने वाले दाग से बचा सकता है। हालांकि, यह किस प्रकार ये काम करता है, इस पर अभी और शोध की आवश्यकता है ।

कोल्ड और फ्लू की समस्या से निजात पाने के लिए :- कोल्ड और फ्लू की समस्या को दूर करने के लिए पुदीना का उपयोग फायदेमंद हो सकता है। रिसर्च जनरल ऑफ मेडिसिनल प्लांट के अनुसार, पुदीना में पाया जाने वाला मेन्थॉल, बलगम को बाहर निकालने में मददगार हाे सकता है। यह जमे हुए कफ को बाहर निकालने में मदद कर सकता है और खांसी को कम करने में फायदेमंद हो सकता है। इसके अलावा, यह गले में खराश और सूखी खांसी को दूर करने में भी मदद कर सकता है ।

सांस की बदबू को दूर करे :- दांत के रोगियों में मुंह की दुर्गंध सबसे आम शिकायतों में से एक है। यह अक्सर पीड़ित व्यक्ति के लिए शर्मिंदगी का कारण बन सकती है। इस समस्या को दूर करने में भी पुदीना का उपयोग किया जा सकता है। इसकी पुष्टि के लिए 84 छात्रों पर एक सप्ताह तक शोध किया गया। उन्हें दिन में तीन बार पुदीने के पानी से कुल्ला करना था। किये गये शोध में पाया कि पुदीना के पानी से कुल्ला करने वाले छात्रों के मुंह की दुर्गंध कम हो गई। इससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि पुदीना मुंह की दुर्गंध को कम करने में मददगार हो सकता है ।

अवसाद और तनाव में फायदेमंद :- तनाव की स्थिति में भी पुदीना के फायदे देखे जा सकते हैं। हर्बल चाय पर किए गए एक शोध में पाया गया कि इनमें ऐसे कई गुण पाए जाते हैं, जो कई सारी समस्याओं को दूर करने के साथ ही तनाव जैसी स्थिति में लाभ पहुंचा सकते हैं। इन चाय में पुदीने की चाय के भी कई फायदे बताए गए हैं, जो तनाव को दूर करने के साथ ही पेट दर्द, पाचन से जुड़ी समस्या और मुंह की दुर्गंध को दूर करने में मदद कर सकती है । इस प्रकार माना जा सकता है कि तनाव को दूर करने वाले इसके सकारात्मक प्रभाव अवसाद जैसी स्थितियों के लिए भी लाभदायक हो सकते हैं। फिलहाल, पुदीना का कौन-सा गुण इन समस्याओं को दूर करने में फायदेमंद होता है, यह अभी शोध का विषय है।

वजन कम करने में मददगार :- पुदीना के पत्ते के फायदे मोटापे पर भी प्रभावशाली हो सकते हैं। एक वैज्ञानिक अध्ययन में भी माना गया है कि पेपरमिंट ऑयल भूख को कम कर सकता है, जिससे अधिक खाने की आदत पर रोक लग सकती है। फलस्वरूप वजन को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है । वहीं, एक अन्य शोध में यह पता चला है कि पुदीने का अर्क वजन को कम करने की जगह बढ़ा सकता है । इसलिए, वजन कम करने के संदर्भ में पुदीने का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टरी परामर्श जरूर लें।

त्वचा की समस्या को दूर करने के लिए : बैक्टीरियल संक्रमण की वजह से त्वचा संबंधी कई रोग हो सकते हैं, जिनमें खुजली और जलन की भी है। यहां पुदीना के एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटीवायरल गुण त्वचा संबंधी समस्याओं को दूर करने के मददगार साबित हो सकते हैं। रिसर्च जनरल ऑफ मेडिसिनल प्लांट के अनुसार, पुदीना में पाया जाने वाला मेन्थॉल त्वचा संबंधी खुजली और जलन को कम करने में फायदेमंद हो सकता है ।

पुदीना के फायदे जानने के बाद यहां हम आपको बता रहे हैं पुदीना के उपयोग के बारे में।

पुदीना का उपयोग –


पुदीना के फायदे प्राप्त करने के लिए इसका सही तरीके से इस्तेमाल करना जरूरी है। नीचे जानिए इसे उपयोग में लाने के कुछ आम तरीके। पुदीने की पत्तियों से चटनी बनाई जा सकती है।पुदीने की पत्तियों को सब्जियों में स्वाद बढ़ाने के लिए भी डाला जा सकता है।पुदीने की चाय बनाई जा सकती है।डॉक्टरी परामर्श पर पुदीने के रस को टॉनिक के रूप में भी लिया जाता है।मात्रा: 1 छोटे चम्मच सूखे पुदीने के पत्तों से पेपरमिंट टी बनाई जा सकती है, जिसे रोजाना दो से तीन बार लिया जा सकता है । इसके सेवन की सही मात्रा के लिए अच्छा होगा ।

पुदीना के नुकसान – जरूरी नहीं कि पुदीना के औषधीय गुण हर किसी के लिए फायदेमंद हों। कई स्थितियों में पुदीना के नुकसान भी देखने को मिल सकते हैं। यहां पर हम इससे होने वाले कुछ नुकसान के बारे में बता रहे हैं।

  • जिन्हें लो शुगर की समस्या है, वो पुदीने के सेवन से दूर रहें। इसके रस का सेवन रक्त में मौजूद शुगर के स्तर को कम कर सकता है ।
  • निम्न रक्तचाप के मरीजों को भी इसके सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए, क्योंकि इसका मेंथॉल नामक घटक रक्तचाप के स्तर को कम करके समस्या पैदा कर सकता है ।
  • गर्भावस्था के समय किसी भी प्रकार के नुकसान से बचने के लिए इसके सेवन से पहले संबंधित डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।
  • जिनकी त्वचा सेंसिटिव होती है, उन्हें मेंथॉल से एलर्जी हो सकती है। इसलिए, उन्हें इसके सेवन और संपर्क से दूर रहना चाहिए।