
अमलीपदर :- अमलीपदर थाना क्षेत्र के खरीपथरा पंचायत से 8 किमी दूरी पर हाड़ाखाल पारा जंगल में रह रहे कमार जनजाति के 40 वर्षीय बलमत सोरी के सर पर गोली मारकर 8 मई की दरम्यानी रात को हत्या कर दी गई थी। इस रात बलमत की पत्नी अपने 3 बच्चों के अलावा मोहल्ले में रहने वाले 8 परिवार के ज्यादातर सदस्यों के साथ कूहीमाल में चल रहे नामजाप यज्ञ देखने गए हुए थे।मोहल्ले में कुछ पुरुष ही रह गए थे।सुबह जब परिवार घर लौटा तो घर के मुहाने पर लहूलुहान शव देख चीख पड़े।

वारदात की सूचना ग्राम सरपंच के माध्यम से अमलीपदर पुलिस को दी गई।थाना प्रभारी चंदन मरकाम ने बताया की सूचना के बाद मौका पर पहुंच पंचनामा की कार्यवाही किया गया।पीएम रिपोर्ट में सर में गोली लगने से मौत होने की पुष्टि के बाद अज्ञात आरोपी के खिलाफ 9 मई को 302 भादवी के तहत मामला पंजीबद्ध कर विवेचना किया जा रहा है। 40 से ज्यादा लोगो से हुई पूछताछ, अब फोरेंसिक टीम की मदद-वारदात के तरीके से पुलिस ने शुरू से ही रंजिश एंगल से जांच शुरू किया, परिजनों के आशंका व पुराने विवाद से जुड़े लोग मिलाकर पिछले तीन दिनों में पुलिस ने 40 से ज्यादा लोगो से पूछताछ किया। पूछताछ में वारदात की रात गोली की आवाज सुनने व जमीन कब्जे से जुड़ी विवाद के अपूष्ट तथ्य सामने आए। एसडीओपी अनुज गुप्ता ने बताया की घटना से जुड़ी तकनीकी साक्ष्य व हत्यारो तक पहुंचने के लिए फोरेंसिक जांच की आवश्यकता थी। आज विधिवत शव का दोबारा खनन करवा कर रायपुर से आई फोरेंसिक टीम से परीक्षण कराया गया है। जल्द ही मामले का खुलासा कर दिया जाएगा। इन कारणों से माना जा रहा नक्सली हाथ नही-क्षेत्र नक्सल प्रभावित है, जंहा वारदात हुई उस इलाके में नक्सली मूवमेंट भी है लेकिन वारदात के बाद सामने आई कुछ तथ्यों के चलते इसे नक्सली घटना नही माना जा रहा। जानकारों के मुताबिक जंगल में बसे लोगो पर नक्सली मूखबीर के आरोप में जानलेवा हमला करते हैं, दहशत फैलाना उनका मकसद रहता है,

इसलिए वे हत्या के बाद पर्चा फैंक कर घटना की जवाबदारी ले लेते हैं। मृतक के शव के एक हाथ में कटार नुमा हथियार था, माना जा रहा है विवाद के बीच मृतक जान बचाने का प्रयास किया होगा।
