एक ऐसा पंचायत जहां भू माफियाओं ने किया है शासकीय भूमि पर कब्जा।

मैनपुर :- लेकिन हाई स्कूल भवन और अन्य शासकीय भवन हेतु नही है जगह मामला है गरियाबंद जिले के आदिवासी बहुल ब्लॉक मैनपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत खोखमा के आश्रित ग्राम धुरवागुड़ी का जहां कुछ सालों से लगातार अवैध अतिक्रमण जारी है माफियाओं द्वारा शासकीय जमीन पर दुकान मकान एवं गोदाम निर्माण किया जा रहा है साथ ही साथ शासकीय भूमि पर धड़ल्ले से अवैध कब्जा कर लगातार भवन निर्माण जारी है मामला उस समय उजागर हुआ जब धुरवागुड़ी में शासकीय हाई सेकेंडरी भवन बनने को आया जो कि लगभग 2 एकड़ भूमि पर बनना था लेकिन भवन हेतु सरपंच द्वारा ग्राम पंचायत में पर्याप्त भूमि नहीं है और भवन बनना संभव नहीं है कह के हाई सेकेंडरी स्कूल भवन को पड़ोसी गांव केंदूपाटी में बनने हेतु प्रस्तावित कर दिया गया जिससे गांव के युवा साथी काफी गुस्सा हो गए थे और सभी साथी मिलकर पटवारी को बुला करके ग्राम पंचायत में उपस्थित शासकीय भूमि के बारे में जानकारी मांगी काफी हैरान करने वाली बात थी लगभग 50 एकड़ शासकीय भूमि ग्राम पंचायत में होना पाया गया

पूर्व सरपंच के शासन काल से प्रस्तावित है हाई सेकेंडरी भवन बनाने हेतु जगह

पूर्व में सरपंच स्वर्गीय श्री सदन राम के कार्यकाल में ही खसरा नंबर 50को स्कूल भवन हेतु प्रस्तावित करके रखा गया था इसकी जानकारी जैसे ही युवाओं को हुई वो उस जमीन पे स्कूल भवन निर्माण के लिए अड़ गये

प्रस्तावित भूमि खसरा नंबर पचास में अवैध रूप से बसा लिया गया है बस्ती

अब शासन के लिए बड़ी समस्या ये है की उस भूमि पे लगभग घरों की संख्या दहाई के आंकड़ों को छू चुका है और कुछ जमीन खाली है जिसे गांव की ही पुजारी परिवार की विधवा महिला उस पर खेती का कार्य कर रही है प्रशासन इस मामले में अब क्या कार्यवाही करता है आने वाला समय ही बताएगा

माफियाओं द्वारा एक ही पंचायत में अलग अलग स्थानों पे शासकीय भूमि को किया गया है कब्जा

शासकीय भूमि पे गोदाम एवम दुकान आम बात हो गई है बकायदा दूकान निर्माण कर किरायानामा बना के बड़ा मुनाफा खोरी का काम चल रहा है धुरवागुडी के बीच चौराहे पे स्थित बस स्टेंड के इर्द गिर्द ऐसा बहुत सारी दूकान मौजूद है जिसकी जानकारी सभी को है बावजूद इसके कोई कार्यवाही नहीं होना दर्शाता है की प्रशासनिक व्यवस्था कितनी कमजोर है।

अतिक्रमण के चलते गांव का विकास हो रहा है बाधित

शासकीय जमीन पर हो रहे अतिक्रमण के चलते गांवों का विकास बाधित हो गया है। अतिक्रमणकारियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे बेरोकटोक खाली मैदान से लेकर तालाब, स्कूल परिसर, श्मशान घाट, गौचर जमीन पर भी कब्जा कर रहे हैं। दिन-ब-दिन बढ़ रहे अतिक्रमण के चलते लोगों का चलना दूभर होता जा रहा है। लोगों को मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित होना पड़ रहा है। गांव की तस्वीर व तकदीर बदलने पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा विकास कार्यों को गति प्रदान करने का प्रयास किया जाता है लेकिन शासकीय जमीन पर अतिक्रमण होने से विभिन्न विकास कार्य बाधित हो रहे हैं। पंचायत प्रतिनिधियों के शिकायत के बावजूद अधिकारियों द्वारा अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं किए जाने से उनके हौसले बुलंद हो गए हैं। गांवों के अन्य लोग भी इन अतिक्रमणकारियों के गलत कार्यों का अनुकरण करने लगे हैं। अतिक्रमण हर गांव के लिए विकराल समस्या बन गई है। शासन-प्रशासन के उदासीन रवैए के चलते हर गांव में लगभग 50-60 प्रतिशत लोग अतिक्रमण कर शासकीय जमीन को हड़प चुके हैं। ऐसे लोगों को गांव के विकास से कोई सरोकार नहीं है। अतिक्रमण को रोकने गांव स्तर पर किए जा रहे प्रयास भी महज इसलिए सफल नहीं हो पा रहे हैं क्योंंकि अतिक्रमणकारियों की तादात गांव में ज्यादा हैं। कई पंचायतों में जनप्रतिनिधि खुद इस कार्य में संलिप्त रहते हैं, जिस कारण अतिक्रमण के मामले में चुप्पी साध लेते हैं। जिले के अधिकांश गांव में अतिक्रमणकारियों की फौज है। एक की देखादेखी दूसरे, तीसरे के कारण गांव में न तो कांजी हाउस बच पाया है न ही पुराना पंचायत भवन की जमीन बचा है। और पहले से स्कूल के लिए आरक्षित भूमि पे भी अतिक्रमणकारियों द्वारा कब्जा कर लिया गया है
क्या है प्रावधान पंचायत राज अधिनियम में प्रावधान है कि पंचायत में प्रस्ताव कर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा सकती है। छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 के तहत गांव की सार्वजनिक भूमि का प्रबंधन एवं उसमें अतिक्रमण रोकने का दायित्व ग्राम पंचायत को दिया गया है। ग्राम पंचायत को अतिक्रमण को हटाने की शक्तियां पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 56 के तहत दी गई है। पंचायत के प्रस्ताव और समझाइश के बाद भी अतिक्रमणकारी द्वारा कब्जा न हटाने पर राजस्व विभाग के अधिकारी से शिकायत कर आगे की प्रक्रिया की जाती है। पंचायत में प्रस्ताव पारित कर सक्षम अधिकारी को सूचना के बाद शासकीय जमीन पर अतिक्रमण हटवाने की कार्रवाई की जा सकती है।

यदि गांव के लोगों द्वारा शिकायत की जाती है तो अतिक्रमणकारी के संबंध में पटवारी को निर्देशित कर जांच कराई जाती है। पटवारी के जांच प्रतिवेदन के आधार पर तहसीलदार द्वारा नोटिस भेजकर अतिक्रमण हटाने के लिए समय दिया जाता है। इसके बाद भी कब्जा न छोडऩे पर सक्षम अधिकारी द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाती है।सामुदायिक भवन, आंगनबाड़ी, स्कूल व खेल मैदान सहित अन्य भवन के लिए नहीं मिल पा रही जमीन l