रिपोर्टर संतोष सोनकर

राजिम :- पिछले 2 महीने से सब्जियों की कीमत लगातार गिरती जा रही है इससे सब्जी उत्पादक किसान के अलावा विक्रेता भी परेशान हैं। सही कीमत नहीं मिलने के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति डावाडोल होती हुई दिखाई दे रही है। कई ऐसे किसान है जो अपने सब्जियों को तोड़कर थोक बाजार तक पहुंचाते हैं। मजदूर से लेकर परिवहन चार्ज बहुत ज्यादा लग जाता है और जब उनकी कीमत सुनते हैं तो किसानों के आंखों से आंसू निकल जाते हैं क्योंकि वह जितनी लागत लगाए थे या फिर तोड़कर लाने में जो पैसा लगा है वही वसूल नहीं हो पा रहे हैं।
इससे किसानों की आर्थिक स्थिति दयनीय हो गई है। चमसुर के विजय कुमार साहू ने बताया कि सात मजदूरों के भरोसे उन्होंने 15 कैरेट टमाटर बाजार में लाए हुए थे। ₹60 कैरेट में बेचे हैं। कुल ₹900 का हुआ। इसमें से कमीशन, परिवहन चार्ज एवं मजदूरों के मजदूरी मिलाकर₹ 100 और जेब से डालना पड़ रहा है। बरोंडा के परस निषाद ने बताया कि वह 10 कैरेट टमाटर लाए थे जिनमें से बमुश्किल 5 कैरेट ₹60 के दर से बिका है बाकी के 5 कैरेट टमाटर नहीं बिकने के कारण छोड़कर जा रहा हूं। बिक गया तो अच्छी बात, नहीं बिकी तो नुकसान हमें ही उठाना पड़ेगा। टमाटर की यह दशा पहली बार नहीं है कई बार टमाटर किसान जानवरों के हवाले कर चुके हैं। एक किसान तो बरबटी लाए थे उसे खरीदने वाले नहीं मिला तो वहां उसे जानवरों के हवाले कर दिये।कठौली के किसान अमारी भाजी लाए हुए थे शुरू में तो वह ₹10 किलो में बिका। बाद में इनका पूछने वाला कोई नहीं मिला और इसे टोटल नुकसान हुआ है। इसी तरह से चौबेबांधा, सिंधौरी, श्यामनगर, सुरसाबांधा, तर्रा, कुरूसकेरा, देवरी, जेंजरा, हथखोज, पोखरा, पीरईबंद, बकली, रावड़, भैंसातरा, बेलटुकरी, कोंदकेरा, पारागांव, छांटा परसदा सहित आसपास के गांव के लोग बड़ी संख्या में सब्जी उत्पादन पर अपनी जीवकोपार्जन करते हैं परंतु कीमत नहीं मिलने के कारण बहुत परेशान दिख रहे हैं। किसान भानु प्रताप, दीनदयाल, यशवन्त सोनकर, गोकुल साहू, संतोष पटेल, विजय साहू, हेमलाल पटेल, प्रीतम साहू, रघुनंदन पटेल, होरीलाल पटेल, बाहरू सोनकर इत्यादि ने बताया कि खेती करना आज ज्यादा जोखिम हो गया है लगातार उर्वरक खाद की कीमत में बढ़ोतरी हुई है और न जाने उनकी कीमत कब तक बढ़ती रहेगी। सरकार इन पर लगाम नहीं लगा पा रही है और सब्जियों की कीमत पर ठोस निर्णय नहीं ले पा रही है। बताना होगा कि बगैर दवाई के सब्जी उत्पादन नहीं किया जा सकता इन्हें खरीदने में ही हजारों रुपया यूं ही खत्म हो जाता है। जुताई, सिंचाई, मजदूरी, खाद, बीज, दवाई इत्यादि में सबसे ज्यादा पैसा निवेश करना पड़ता है जैसे तैसे फसल प्राप्त होते हैं और उन्हें बेचने के लिए सब्जी मंडियों पर ले जाते हैं तो कीमत कम मिलती है जिसके कारण लगातार कीमत गिरने से हमारी आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर हो गई है। उल्लेखनीय है कि पिछले 2 से 3 महीने लगातार सब्जियों की कीमत गिरी है। वही पसरा बाजार में भी सब्जियों को खरीदने के लिए ग्राहक बहुत कम आ रहे हैं। विक्रेता सब्जी को लेकर बैठे रहते हैं और अंत में रात्रि काल 8:00 बजे के बाद फिर वही सब्जी घर ले जाते हैं इससे उनके बैठने की मजदूरी भी नहीं मिल पा रही है विक्रेता की परेशानी बढ़ती जा रही है। बाजार में यदि थैला लेकर एक ग्राहक भी चले गये तो विक्रेता उन्हें अपने पास रखे सब्जी को खरीदने के लिए जिद करते हैं। इससे विक्रेता को मानसिक टेंशन होना लाजमी हो गया है। सब्जी उत्पादक किसान से लेकर विक्रेता की आर्थिक स्थिति पतली हो रही है इससे मानसिक परेशानियां हो रही है। जिस तरह से धान का समर्थन मूल्य सरकार द्वारा लागू किया गया है उसी तरह से सब्जियों का भी समर्थन मूल्य दिया जाए तो किसानों को घाटा से उबरने का मौका मिल जाएगा। कमाई नहीं होगी तो लागत मूल्य तो जरूर निकलेगा ही। सब्जी मंडी संघ के अध्यक्ष विष्णु जांगड़े ने बताया कि शनिवार को शहर के थोक सब्जी मंडी में टमाटर ₹60 से लेकर ₹120 केरेट तक बिके। भिंडी 10 रुपए किलो, बरबट्टी 12, मुनगा 20, जरी 10, लौकी 6, मिर्चा 15, देसी मिर्ची 20, धनिया 25, डोढ़का 12, करेला 25, चेंज भाजी 12, अमारी भाजी 10, बोहार भाजी ₹130, फल्ली 35, पपीता 10, कद्दू 10, आमा 10 रुपया किलो में बिका।
