
राजिम – ग्रीष्मावकाश का सदुपयोग बच्चे श्रीराम संगीत कला केंद्र राजिम में आकर के विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण में सम्मिलित होकर कर रहे हैं श्रीराम संगीत कला केंद्र राजिम के खुलने से अंचल के लोगों में संगीत के प्रति रुचि लगातार बढ़ रही है उक्त बातें संगीत केंद्र राजिम के संचालक तुला राम साहू ने बताया कि श्रीराम संगीत कला केंद्र के माध्यम से लोगों को आज उचित मार्गदर्शन व प्रशिक्षण प्राप्त हो रहा है कई ऐसे लोग होते हैं जो संगीत तो सीखना चाहते हैं लेकिन अवसर या वाद्य यंत्रों की कमी या फिर प्रशिक्षक नहीं होने की वजह से अपनी कला को भरने से पहले ही दफन कर देते हैं क्षेत्र का यह विद्यालय ऐसे कला प्रेमियों के लिए वरदान साबित हो रहा है संचालक साहू ने बताया कि अभी अलग-अलग विधाओं में कुल 105 बच्चे प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं जिसमें 7 वर्ष से लेकर 50 वर्ष तक के संगीत प्रेमी संगीत सीखने में खूब मेहनत कर रहे हैं राजिम के अलावा अंचल के विभिन्न गांवों से आकर बच्चे प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं संगीत केंद्र में अभी हारमोनियम, तबला, गिटार, ऑक्टोपैड ,केसियो, आर्गन कत्थक का प्रशिक्षण संचालित है यह सभी प्रशिक्षण लगातार साल भर संचालित रहता है जिसमें संगीत प्रेमी अपने समय के अनुकूल आकर के प्रशिक्षण में सम्मिलित होते हैं
कई नामचीन कलाकार निकले यहां से
संगीत केंद्र से कई नामचीन कलाकार निकले जिन्होंने सिर्फ प्रदेश नहीं बल्कि प्रदेश के बाहर भी छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को बिखेरने का काम किया है जिसमें रामकुमार देवांगन, योगेश सोनकर, डीगेश्वर बंजारे, युगल किशोर साहू, मनोज देवांगन, देव नारायण यादव, बेदराम निषाद, जुगन किशोर, टेकसिंह निर्मलकर, नारायण साहू, ओजस्व दास, हेमंत साहू, सुमित श्रीवास, रोशन देवांगन ,द्रोण साहू, ओम प्रकाश पटेल इन्होंने प्रदेश के अलावा मध्य प्रदेश महाराष्ट्र उड़ीसा उत्तर प्रदेश इत्यादि राज्यों में भी बखूबी प्रस्तुति देकर केंद्र के नाम को रोशन किया है यहां समय-समय पर अनेक गतिविधि संचालित की जाती है जिससे कि संगीत को कैसे रोचक बनाया जाए और विद्यार्थियों का मन लगा रहे , अनेक सार्वजनिक आयोजन किए जाते हैं जिसमें तबला हारमोनियम गायन नृत्य प्रतियोगिता के अलावा वार्षिक उत्सव प्रतिवर्ष आयोजित होते हैं जिसमें छात्र अपने कला का प्रस्तुतीकरण दर्शकों के बीच करते हैं
