
राजिम :- किसानों के केसीसी ऋण माफ करने सरकार से गोहार पहले खरीब फसल में तनाछेदक की मार झेलने के बाद अब पुनः रबी फसल में खरीब की भांति तनाछेदक का तबाही प्रकोप से अंचल के किसान सदमे में आ गए हैं। किसानों के मुताबिक प्रति एकड़ 50 से 70 प्रतिशत तनाछेदक ग्रीष्म कालीन धान पर हमला से किसानों को खेती बाड़ी करने बैंकों से लिए गए कर्ज चुकाने की चिंता सता रही है।
फसल में लगे बेतहाशा बीमारियों को दिखाते परेशान किसान – राजिम फिंगेश्वर ब्लॉक के ग्राम सिर्रीखुर्द, तरीघाट, कुडेंल,खुटेरी, बिजली ,मडवाडिही क्षेत्र के गांवों में धान फसलें तनाछेदक सहित भूरा माहो जैसे बीमारी पर ब्रांड कंपनी के दवाईयां भी फेल हो गई है कोराजन, बाईफ्रेन थ्री, क्रटाप एसपी जैसे महंगे दवा बेअसर साबित हुई है। किसानों ने सरकार को कोसते हुए कहा कि बाजार में नकली दवाइयां की वजह से किसान बर्बाद हो रहे हैं। सरकार को किसानों की कोई चिंता नहीं है नकली दवाइयां को रोकने शासन प्रशासन द्वारा कोई पहल नहीं होने के चलते नकली दवाइयां बनाने वाले कंपनियों की हौसला बुलंद हो गई है और केमिकल युक्त दवाइयां को ऊंचे दामों में बेच रहे हैं इधर किसान साहूकार से कर्जा लेकर खाद, दवाई लेकर किसानी कर रहे हैं अभी स्थिति ऐसी है कि किसानी में लगाया गया लागत मिलना मुश्किल है। किसानों की मांग केसीसी ऋण माफ करें नहीं तो आने वाले दिनों में छोटे किसानों की जमीन नहीं बचेगी।
कृषि विभाग किसानों की नहीं ले रहे सुध – किसान बीमारी के लक्षण बताकर खुद ही दुकान से दवा खरीद कर खेतों में छिड़क रहे हैं जबकि किसानों को किसानी से संबंधित जानकारी देने कृषि विभाग के माध्यम से कर्मचारी नियुक्त है अधिकांशतः दुकानदार अपने फायदे को देखते हुए 3-4 प्रकार से दवाईयां थमा रहे हैं फिर भी बिमारी नहीं कट रहे हैं बीच-बीच में बारिश व बदली से जहां धान की फसल को बहुत ही ज्यादा नुक्सान पहुंचा है। किसानों ने बताया इस बार मताई में ज्यादा समय लगने, खाद भी इस बार दो बार एस्ट्रा डाला गया है उपर से मंहगाई बताकर हाईफाई कीमत में बेचा जा रहा है फिर भी किसानों के द्वारा खरीदा जा रहा है इस बार अच्छी फसल पैदा होने की संभावना थी पर तनाछेदक जैसे खतरनाक बिमारी ने लगातार दूसरी बार किसानों के कमर तोड़ी है इस बार प्रत्येक एकड़ में दवाईयां का बिल 12000 से 14000 रुपए तक लागत पहुंच गया है। दवा छिड़काव बीमारियों से परेशान किसानों को सलाह देने कृषि विभाग द्वारा कोई किसी प्रकार से पहल नहीं किया जा रहा है और न ही फिल्ड में पदस्थ कर्मचारी फिल्ड में जा रहे हैं।
