आदिवासी समाज की परम्परा प्राकृतिक से जुड़ी है-शिशुपाल सोरी।

मैनपुर :- तहसील मुख्यालय मैनपुर से लगभग 22 किलोमीटर दुर नेशनल हाईवे से लगा जिले के प्रमुख धार्मिक स्थल नवागढ़ पहुचे संसदीय सचिव एंव कांकेर विधायक शिशुपाल सोरी का आदिवासी समाज व ग्रामीणों ने जोरदार स्वागत किया इस दौरान नवागढ के पहाडी के उपर स्थित राजा कचना ध्रुर्वा एंव देवी देवताओं की स्थल पर पहुंचकर उन्होने पुजा अर्चना किया साथ ही पुरे प्रदेश में सुख शांति समृध्दि और खुशहाली के लिए प्रार्थना किया इस दौरान क्षेत्र के प्रमुख जागेश्वर कोमर्रा, जगदीश कोमर्रा, जयसिंह दाऊ, गुजरात कमलेश व क्षेत्र के लोगो ने संसदीय सचिव शिशुपाल सोरी को बताया कि बिन्द्रानवागढ़ के पहाड़ी पर महान वीर पराक्रमी राजा कचना ध्रुर्वा का स्थल है।

और कचना ध्रुर्वा राजा ने अपनी वीरता से 09 राज्यों को जीतकर नवागढ में अपना राज स्थापित किया था, कचना ध्रुर्वा को क्षेत्र के प्रमुख देवता के रूप में पुजा अर्चना करते है, ग्रामीणों ने इस नवागढ कचना ध्रुर्वा पहाडी स्थल के विकास के साथ पर्यटन स्थल के रूप मे विकसित करने की मांग की जिससे यहा पहुचने वाले श्रध्दालुओं को सुविधाये मिल सके ग्रामीणो ने बताया कि इस पहाडी में क्षेत्र के प्रमुख देवी देवताओं का मंदिर है जंहा लोग पहुचकर पुजा अर्चना करते है और प्रमुख धार्मिक आस्था का केन्द्र है पिछले दिनो नवागढ के समीप परियाबाहरा भेंट मुलाकात में पहुचे मुख्यमंत्री भुपेश बघेल ने इस स्थल को पर्यटन स्थल के रूप में घोषित करने की घोषणा भी किया है, संसदीय सचिव ने ग्रामीणों की मांगो से प्रदेश के मुख्यमंत्री भुपेश बघेल को अवगत कराते हुए नवागढ कचना ध्रुर्वा स्थल में प्रर्याप्त संसाधन व सुविधाये उपलब्ध कराने की बात कही है, पश्चात आदिवासी समाज का एक बैठक का आयोजन विश्राम गृह में किया गया जहां क्षेत्रभर से हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल हुये और संसदीय सचिव शिशुपाल सोरी का जोरदार स्वागत किया इस दौरान शिशुपाल सोरी ने कहा कि आदिवासियों की परम्परा प्रकृति से जुडी है, आदिवासी समाज के लोग सभी त्यौहार और पर्वो को परम्परा अनुसार मानते है यहा जो भी समस्याए बताई गई है सभी मांगो को पुरा किया जायेगा, इस क्षेत्र के विकास के लिए मुख्यमंत्री भुपेश बघेल से मुलाकात कर बजट की मांग करेंगे। इस मौके पर प्रमख रूप से गोंड महासभा के राष्ट्रीय महासचिव लोकेन्द्र सिंह कोमर्रा, खेदु नेगी, टीकम कपील, गुजरात कमलेश, भागचंद कोमर्रा, आर.एन.ध्रुव , जागेश्वर कोमर्रा, जगदीश कोमर्रा, जयसिंह, भगवान सोरी, हेमंत कोमर्रा, प्रकाश, उमेंश, लच्छु सोरी, आंनद ठाकुर, किशोर ध्रुव, प्रकाश ठाकुर, धनेश्वर ध्रुव, देवेन्द्र ठाकुर, लक्ष्मण यादव, अजय बाजपेयी, असगर खान, देवेन्द्र ठाकुर, सुदामा ठाकुर, रूकदेव यादव, महेन्द्र यादव, भगोलीराम यादव, जबलसिंह नागेश, केदार दाऊ सहित बडी संख्या में आदिवासी समाज के लोग उपस्थित थे।