
छुरा :- जल जंगल जमीन पर आदिवासियों और भूमिहीनों के अधिकारों के लिए राष्ट्रीय एकता परिषद की सतत अभियान के 33 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की बैठक मझगवां, (कटनी मध्य प्रदेश) में आयोजित की गई। संगठन के सभी कार्यकर्ताओं और ग्रामीण मुखियाओं की ओर से एकता परिषद के संस्थापक पी. व्ही. राजगोपाल को दुनिया के प्रतिष्ठित नुवाना शांति सम्मान मिलने पर बधाई दी गई, 11 मई को यह पुरस्कार जापान के टोकिया में राज गोपाल जी को प्रदान किया जाएगा।

एकता परिषद के सभी प्रांतों के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के द्वारा देश के अलग-अलग हिस्सों में जल जंगल जमीन के अधिकारों के लिए जारी आंदोलन की गहन समीक्षा की गई। एकता परिषद द्वारा वन अधिकार अभियान के तहत जिन हजारों लोगों का अधिकार हासिल हुआ उन्हें तत्काल जैविक और प्राकृतिक खेती के प्रयासों को तेज करने का निर्णय लिया गया। एकता परिषद के कार्यकर्ताओं ने चिंता व्यक्त किया कि वन अधिकार कानून 2006 की अत्यंत धीमी गति के चलते अभी भी लाखों पात्र काबीज लोग अपने अधिकारों से वंचित हैं विगत कुछ वर्षों में तमाम प्रयासों के बाद भी महिलाओं को भूमि अधिकार देने और उन्हें महिला किसान का दर्जा देने में सरकारों की ओर से की गई महत्वपूर्ण प्रयास पुरे सफल हुए नहीं हुआ है। एकता परिषद के सभी कार्यकर्ताओं के द्वारा सामूहिक रूप से अनेक प्रस्ताव पारित किए गए, जिनमें से प्रमुख है वन अधिकार कानून के क्रियान्वयन को मजबूती देने के लिए जमीनी अभियान चलाया जाएगा, महिलाओं को भूमि अधिकार दिलाने और महिला कृषक की मांगों को लेकर प्रांतीय और राष्ट्रीय स्तर पर आयोजन किया जाएगा, शहरी क्षेत्रों में आवासहीनों के आवासीय अधिकार हेतु सघन अभियान चलाया जाएगा, विशेष पिछड़ी जनजातियों को प्राथमिकता के आधार पर व्यक्तिगत सामुदायिक और पर्यावरण के अधिकार हेतु आंदोलन और जन वकालत किया जाएगा, एकता परिषद और भारत सरकार के मध्य हुए समझौते के अनुपालन हेतु सरकार से संवाद और कानूनी कार्रवाई प्रारंभ की जाएगी, एकता परिषद की अभियानों से जिन लोगों को भूमि अधिकार मिला उन्हें जैविक और प्राकृतिक खेती से जोड़ा जाएगा, पर्यावरण और जंगलों के संरक्षण और संवर्धन हेतु जल केंद्रित पहल को और अधिक सघन किया जाएगा, ग्राम स्वराज और स्वावलंबन को साकार करने हेतु 100 गांव को विशेष रूप से तैयार किया जाएगा, इन प्रमुख प्रस्ताव के साथ ही एकता परिषद की नई कार्यकारिणी की भी घोषणा की गई सर्वसम्मति से रणसिंह परमार जी को अध्यक्ष, श्रद्धा कश्यप, प्रदीप प्रियदर्शी एवं सीताराम सोनवानी को उपाध्यक्ष तथा रमेश शर्मा और अनीष कुमार को राष्ट्रीय महासचिव मनोनीत किया गया, इसके साथ ही सचिवों और राष्ट्रीय समिति के सदस्यों का भी मनोनयन किया गया नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी के द्वारा यह भी घोषणा की गई कि गरीबों का गांधी के साथ महात्मा गांधीजी के अहिंसा, शांति और सद्भावना पर आधारित समाज को मजबूती प्रदान किया जाएगा। राजगोपाल जी के मार्गदर्शन में एकता परिषद के जमीनी आंदोलनों को और अधिक सघन और सशक्त बनाने के संकल्प के साथ बैठक समाप्त की गई।
इस अवसर पर राष्ट्रीय कार्यकारिणी एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रनसिंह परमार, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्रद्धा कश्यप, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रदीप प्रियदर्शी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सीताराम सोनवानी, राष्ट्रीय महामंत्री रमेश शर्मा, राष्ट्रीय महामंत्री अनीश कुमार के के, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष निर्भय सिंह, राष्ट्रीय सचिव संतोष सिंह , प्रशांत कुमार पी व्ही, सरस्वती उईके, चुन्नीलाल सोरेन, निर्मला कुजुर, के बीजू, नयनतारा, राष्ट्रीय कला मंच श्रीमती प्रवासिनी राउत, राष्ट्रीय सदस्य कस्तूरी पटेल, शोभा तिवारी, भरत भूषण ठाकुर, मेवा सहरिया, राज्यों के प्रतिनिधि के रुप में राष्ट्रीय सदस्य उड़ीसा विजय कुमार प्रधान, राष्ट्रीय सदस्य उत्तर प्रदेश सियाराम सहरिया, राष्ट्रीय सदस्य मध्य प्रदेश डोंगर शर्मा, राष्ट्रीय सदस्य छत्तीसगढ़ मुरली दास संत, राष्ट्रीय सदस्य झारखंड रामस्वरूप तिवारी, राष्ट्रीय सदस्य असम डिंबेश्वरनाथ, राष्ट्रीय सदस्य मणिपुर ऋषि कुमार, राष्ट्रीय सदस्य केरला संतोष मलमपुझा, राष्ट्रीय सदस्य तमिलनाडु धनराज राधई उपस्थित रहे।
