परिक्षेत्रीय विकास निधि के तहत विकास का दावा करने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनी आर्सेलर मितल के पास नहीं है।

किरंदुल /रणवीर सिंह चौहान

किरंदुल :- दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल नगर के समीप स्थित बहुराष्ट्रीय कंपनी आर्सेलर मित्तल निप्पन स्टील इंडिया लिमिटेड जो की किरंदुल से विशाखपट्नम तक करीबन 267 किलोमीटर पाइप लाइन के माध्यम से लोह चूर्ण का परिवहन कार्य करते हुए दंतेवाड़ा जिले से अरबों खरबों रूपयों की कमाई सालाना करती हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार लाखो करोड़ो रूपये परिक्षेत्रीय विकास निधि यानी सीएसआर मद पर भी उसे खर्च करना है। परंतु आश्चर्य की बात है की किरंदुल स्थित आर्सेलर मितल निप्पन स्टील इंडिया लिमिटेड बैलाडीला के खुद के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए एक अस्पताल की भी व्यवस्था नहीं है। विदित है कि बहुराष्ट्रीय कंपनी आर्सेलर मितल के संयंत्र में भी कार्य के दौरान कई हादसे होते हैं साथ ही कई अधिकारी एवं कर्मचारी मौसमी बीमारियों का भी शिकार समय समय पर होते हैं।

जिनके उपचार के लिए बहुराष्ट्रीय कंपनी आर्सेलर मितल एनएमडीसी किरंदुल परियोजना के परियोजना चिकित्सालय पर जा कर इलाज करवाते हैं। सवाल यह उठता है कि क्या आर्सेलर मित्तल निप्पन स्टील इंडिया लिमिटेड पूर्व नाम एस्सार स्टील की स्थापना के समय बनी गाइड लाइन में कंपनी में कार्य करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के बेहतर इलाज के लिए सर्वसुविधायुक्त अस्पताल के निर्माण का ज़िक्र नहीं किया गया था। या गाइड लाइन में कंपनी के कर्मचारियों के लिए कंपनी के अंदर सर्वसुविधायुक्त अस्पताल का ज़िक्र किया गया था परंतु कंपनी ने उक्त गाइड लाइन का पालन करना उचित नहीं समझा। जब कोई शिक्षक, बच्चे या आम नागरिक आर्सेलर मित्तल की लाल लुगदी में गिर जाता है तो मित्तल प्रशासन तत्काल सक्रिय होते हुए संबंधित चोटिल व्यक्ति को एनएमडीसी के अस्पताल में पहुंचा देता है और किसी।को कानो कान खबर भी नहीं हो पाती सर्व सुविधा युक्त अस्पताल, शानदार चिकने रास्ते, मोबाइल हॉस्पिटल, फलों के बागान, इमारती व्रक्षो के जंगल, मीठे पानी के जल कूप और आदिवासियो। को फ्लैट बना कर देने का वादा करने वाली इस कंपनी ने उन्हें केवल झुनझुना ही दिया है लेकिन अपने लाल जहर रूपी गार्बेज को उपजाऊ मिट्टी बताने में प्रचार प्रसार करने पर करोड़ों रुपए खर्च करने में आर्सेलर मित्तल प्रशासन का कोई परहेज नहीं है।