किरंदुल /रणवीर सिंह चौहान

किंरदुल :- एनएमडीसी किरंदुल कॉम्प्लेक्स एवम बचेली कॉम्प्लेक्स द्वारा नियमित भर्ती से बचने के लिए एक सुनियोजित साजिश के तहत हाउस कीपिंग के नाम पर बेरोजगार युवकों को 15,20 हजार प्रति माह की दर पर स्थानीय लोगों वा श्रमिक संघ के अव्वल दर्ज के चाटुकारों को हाउस कीपिंग के नाम पर परियोजना में नियुक्त किया गया था। तत्पश्चात आदिवासी संगठनों ने उक्त मामले में संज्ञान लिया एवम विशुद्ध रूप से केवल लोकल एवम आदिवासी की भर्ती उक्त योजना में करने की मांग को लेकर कड़ा रुख अपना लिया है अब हालात यह हो चुके है की इन मजदूरों को एनएमडीसी के स्थाई कर्मचारियों की तरह सभी सुविधा दिए जाने की मांग उठ रही है, प्रबंधन के मुंह पर ताला लग चुका है अब प्रबंधन की मंशा इन सबको निकाल बाहर करने की है किंतु आदिवासी संगठन की मजबूत पैरवी वा एकता की वजह से यह संभव प्रतीत नहीं होता आज उक्त विषय पर यहां के मजबूत यूनियन के पदाधिकारियों से बयान देने हेतु जब कहा गया तो उन्होंने यह तो स्वीकार किया की हाउस कीपिंग अब यूनियन के लिए सिरदर्द बन चुका है किंतु।आदिवासी संगठनों के दहशत का आलम यह है की कैमरे के सामने। आने पर साफ लफ्जों में इनकार। कर दिया, ऑफ द कैमरा यह भी स्वीकार किया की हम सब विवश हैं आज हम प्रमुख श्रमिक संगठन होने के बावजूद किसी एक को भी हाउस कीपिंग मे भर्ती नहीं करा पा रहें है बातचीत में यह भी बताया कि हाउस कीपिंग मे भर्ती युवक काम भी नहीं करते किंतु परियोजना प्रशासन उन्हे प्रति माह निर्धरित रकम देने।के लिए विवश है यह एक गंभीर समस्या है एवम निकट भविष्य में इसके घातक परिणाम आ सकते हैं।
