विशेष पिछड़ी जनजाति कमार आदिवासी ग्राम के लोग सुखे नदी में रेत हटाकर बूंद-बूंद पेयजल की व्यवस्था कर रहे है।

अख्तर मेमन

मैनपुर :- एक एक कर आजादी के 75 वर्ष पूरा हो गया और पूरा देश अभी आजादी का अमृत महोत्सव मना रही है लेकिन कौन मानेगा गरियाबंद जिले के आदिवासी विकासखण्ड मैनपुर क्षेत्र के पहाड़ी के ऊपर लगभग एक दर्जन पाराटोला ग्रामो में बूंद -बूंद पीने के पानी के लिए ग्रामीणों को मीलो पैदल सफर करना पड़ रहा है और तो और इन ग्रामो में अब तक हैंडपंप नही लगाये जाने के कारण ग्रामीण सूख चुके नदी नाले के सीने को चीरकर बूंद बूंद पानी का इंतिजाम करते और पूरा दिन पानी के लिए मशक्कत करते देखा जा सकता है।

ऐसा नही की इसकी जानकारी संबंधित लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को न हो हर वर्ष गर्मी के दिनों में इन ग्रामो में हाथ से बोर खनन करवा कर पानी उपलब्ध कराने का दावा विभाग द्वारा किया जाता है लेकिन अब तक कही कोई पानी की व्यवस्था नही कराई गई ग्रामीण इन समस्याओं से समय -समय पर क्षेत्र में पहुंचने वाले मंत्री, विधायक, सांसद व आला अफसरो को आवेदन देकर समस्या से अवगत कराते थक चुके है लेकिन अब तक समस्या का समाधान नही हुआ है और यह समस्या उन ग्रामो में बनी हुई है जहां सन् 1985 को देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी कुल्हाड़ीघाट पहुंचे थे और यह गांव कुल्हाड़ीघाट ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम है जिसमें ताराझर, कुर्वापानी, मटाल जैसे कई ग्रामो में अभी से बूंद बूंद पानी के लिए ग्रामीणों को जद्दोजहद करते देखा जा सकता है।

गरियाबंद जिले के आदिवासी विकासखण्ड मैनपुर क्षेत्र के पहाड़ी इलाके के गांवो में मार्च में ही पेयजल की विक्राल समस्या उत्पन्न हो गई है तहसील मुख्यालय मैनपुर से लगभग लगभग 30 किमी. दूर इन ग्रामो में निवास करने वाले ग्रामीण मुखिया सुकड़ूराम कमार, सुकलाल कमार, धरमसिंह कमार, पुनीत राम सोरी, लीलाराम, चरण सिंह, पान सिंह, पीलुराम सोरी, अमरसिंह, धनसिंह, चैतीबाई, इतवारिन, फूलबती, रामबाई चांदनी बाई, सनोबाई ने बताया गांव में पेयजल की गंभीर समस्या है कई बार इस समस्या से सरपंच व समय -समय पर पहुंचने वाले ब्लाॅक मुख्यालय के अधिकारियो को अवगत कराया जा चुका है।

डडईपानी में आजादी के 75 वर्षो बाद भी एक हैंडपंप नही लगाया जा सका, मैनपुर विकासखण्ड के ग्राम पंचायत दबनई के आश्रित ग्राम डडईपानी, कुल्हाड़ीघाट के आश्रित ग्राम ताराझर, कुर्वापानी, मटाल में आजादी के 75 वर्षो भी एक हैंडपंप नही लगाया जा सका है यहा के ग्रामीण बारोह माह नदी में झरिया खोदकर पानी की व्यवस्था करते है डेढ़ किलोमीटर दूर से यहा के ग्रामीण पैदल पानी लाने को विवश होते है कई बार समस्या निवारण शिविर, जिला स्तरीय शिविर के साथ अफसरो को आवेदन देकर थक चुके है लेकिन लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के जिम्मेदार अफसरो के उदासीन रवैया का खामियाजा ग्रामीण भुगत रहे है। ऐसा एक गांव की स्थिति नही है देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी जिस ग्राम पंचायत कुल्हाड़ीघाट में पहुंचे थे उस ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम मटाल, कुर्वापानी, ताराझर में भी आज तक एक हैंडपंप खनन नही किया जा सका है और यहां के ग्रामीण वर्षो से नदी नालो झरिया का पानी पीने को विवश हो रहे है।

क्या कहते है अधिकारी

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के गरियाबंद सब इंजिनियर बी एस यादव ने बताया मैनपुर विकासखण्ड के पहाड़ी ऊपर के ग्रामो जैसे ताराझर, कुर्वापानी, डडईपानी में पेयजल उपलब्ध कराने के लिए विभाग द्वारा सर्वे किया जा चुका है लेकिन बजट के अभाव में हैंडपंप खनन में परेशानी आ रही है। बी एस. यादव सब इजिनियर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग गरियाबंद

क्या कहते है सरपंच

ग्राम पंचायत कुल्हाड़ीघाट के सरपंच धनमती सोरी ने बताया पहाड़ी के ऊपर बसे ग्राम ताराझर, मटाल, कुर्वापानी ग्रामो में इन दिनों पेयजल की गंभीर समस्या है ग्रामीण झरिया खोदकर घंटो मशक्कत करने के बाद बूंद बूंद पीने के पानी एकत्र कर रहे है कई बार इस समस्या से विभाग के अधिकारियों को अवगत करा चुके है।