जिला का मुद्दा फिर गरमाया
जिला बनाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन।।
कोरिया एस के मिनोचा/
मनेंद्रगढ़ जिला बनाओ संघर्ष समिति की ओर से मनेंद्रगढ़ को जिला बनाने की मांग को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल
को ज्ञापन प्रस्तुत कर ध्यानाकर्षण कराया गया है साथ ही समिति की ओर से यह भी कहा गया है कि आने वाले 23 मार्च शहीदी दिवस से मनेंद्रगढ़ को जिला बनाने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन प्रदर्शन शुरू होगा इस संबंध में एक बैठक पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष रामानुज अग्रवाल के निवास में आयोजित की गई बैठक में राम चरित दिवेदी, विनीत जायसवाल, रामचंद्र अग्रवाल, अरुण श्रीवास्तव ,धनपत पतवार ,जगदीश पाठक, मनीष रैकवार समेत युवा जन काफी संख्या में मौजूद थे बैठक में पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष रामानुज अग्रवाल ने बताया कि मनेंद्रगढ़ क्षेत्र एवं अंचल के नागरिकों द्वारा सन 1983/84 में एक वृहद क्रमिक आमरण अनशन किया गया था , जो कि 84 दिन तक चला था | क्रमिक अनशन होने के कारण तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री अर्जुन सिंह के द्वारा चर्चा करने हेतु एक प्रतिनिधि मंडल को भोपाल आहूत किया गया था.स्वर्गीय रतन लाल मालवीय के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल भोपाल गया था | प्रतिनिधि मंडल से चर्चा के उपरांत माननीय न्यायमूर्ति श्री बी आर दुबे को आयोग का अध्यक्ष बनाने कि अनुशंसा की गई और मनेंद्रगढ़ और चिरमिरी के मध्य में मनेंद्रगढ़ के समीप जिला बनाया जाने की मांग की गई।आयोग ने बैकुंठपुर को जिला बनाने के प्रस्ताव को निरस्त कर दिया | परंतु राज्य शासन द्वारा राजतंत्र के दबाव के कारण बैकुंठपुर को अस्थाई रूप से जिला मुख्यालय घोषित कर दिया । जिससे मनेंद्रगढ़ के नागरिक काफी उद्वेलित हो गए और मनेंद्रगढ़ में वृहद आंदोलन चालू हो गया । जिसके फलस्वरूप मनेंद्रगढ़ 13 दिन तक पूरी तरह से बंद था | मनेन्द्रगढ़ में 13 दिन
कर्फ्यू लगा रहा.आंदोलन के दौरान मध्यप्रदेश शासन में लिखित में
यह सूचित किया गया कि जिला मुख्यालय आयोग के अनुशंसा के अनुरूप ही बनाया जाएगा और स्थल चयन के लिए आयुक्त बिलासपुर की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन कर दिया । परंतु गठित कमेटी ने आयोग की अनुशंसा को दरकिनार करते हुए बैकुंठपुर को जिला मुख्यालय हेतु हुए अपना प्रतिवेदन दिया और वैकुंठपुर को स्थाई जिला घोषित कर दिया गया । मध्यप्रदेश शासन की इस घोषणा के कारण मनेंद्रगढ़ की जनता बहुत ज्यादा उद्वेलित हो गई और
मनेंद्रगढ़ में एक ऐतिहासिक आंदोलन किया गया | तत्कालीन विधायक श्री गुलाब सिंह एवं नागरिक आमरण अनशन पर बैठे ।लगभग 7 दिन पश्चात मनेन्द्रगढ़ को पूरी तरह छावनी में तब्दील कर दिया और पुलिस का एक प्रदर्शन पूरे हथियारों के साथ भय उत्पन्न करने के लिए मनेन्द्रगढ़ नगर में घुमाया गया और आधी रात को पुलिस द्वारा बलपूर्वक अनशन करने वालों को उठा लिया गया |
यह आमरण अनशन लगभग11 माह तक चला और पुलिस सातवें दिन अनशन करने वालों को उठा लेती थी | अंत में 85 वर्षीय वृद्धा श्रीमती
बच्ची बाई के नेतृत्व में महिलाओं का एक जत्था आमरण अनशन पर बैठे और उसी समय रामानुज अग्रवाल साथ ही श्री अजीमुद्दीन गुड्डा एवं जहूर भाई आदि भोपाल जाकर आमरण अनशन पर बैठे और अनशन के सातवें दिन तत्कालीन मुख्यमंत्री राजा श्री दिग्विजय सिंह ने रविंद्र चौबे को अनशन स्थल पर भेजा और उन्होंने प्रकरण के निराकरण के लिए आश्वस्त किया परंतु उनका आश्वासन भी प्रांत के सामंतों द्वारा बाधित कर दिया गया । आंदोलन के दौरान कई बार प्रतिनिधि मंडल आदरणीया श्रीमती सोनिया गांधी से मिला उन्होंने हर बार प्रतिनिधि मंडल को आश्वासन दिया कि आपके साथ न्याय होगा परंतु कुछ भी नहीं हुआ | एक बार फिर एक प्रतिनिधि मंडल जिसमें रामानुज अग्रवाल तत्कालीन विधायक श्री गुलाब एवं चार पांच अन्य लोग शामिल थे , दिल्ली गए | जब प्रतिनिधि मंडल चर्चा करके निकलने वाला था उस समय रामानुज अग्रवाल ने श्रीमती सोनिया गांधी को कहा कि मैडम आप बुरा ना माने तो एक बात कहूं उस समय श्रीमती सोनिया गांधी ने कहा हा कहिए मैंने ( रामानुज अग्रवाल ) उनसे कहा कि स्व आदरणीया श्रीमती इंदिरा गांधी के समय अगर किसी जायज काम के लिए आते थे तो हम लोगों का अनुभव था कि 7 दिन में वह काम पूरा हो जाया करता था | मेरी इस बात को सुनकर श्रीमती सोनिया गांधी ने तत्काल अपने निजी सचिव श्री बी जॉर्ज को बुलाया और आदेश किया कि प्रतिनिधि मंडल कि बात को सुने और जो यह कहते है वह काम हो जाना चाहिए | कुछ दिनों के पश्चात ही मध्यप्रदेश दो प्रांतों में विभाजित हो गया | इसके चलते जिले का मुद्दा स्थगित हो गया । छत्तीसगढ़ बनने के बाद छत्तीसगढ़ के कुर्सी में बैठे पदाधिकारियों द्वारा लगभग 10 नए जिले बनाए गए परंतु मनेन्द्रगढ़ को सदैव उपेक्षित रखा गया | आयोग के गठन से लेकर अभी तक जितने भी जिले के संबंध में जो भी निर्णय लिए गए हैं उससे प्रतीत होता है कि मनेंद्रगढ़ भारतवर्ष का हिस्सा नहीं है इस धारणा से मुक्त होने के लिए एक अंतिम निवेदन आप के समक्ष उचित कार्यवाही एवं आदेश हेतु प्रेषित है वर्तमान में छत्तीसगढ़ शासन के जो जिले हैं उनके क्षेत्रफल एवं जनसंख्या का चार्ट संलग्न है कम से कम कांग्रेस का शासन होने के कारण हम पूरी तरह से आश्वस्त हैं कि इस बार मनेंद्रगढ़ की जनता को न्याय जरूर मिलेगा।
