समग्र शिक्षा राज्य कार्यालय की वार्षिक कार्य योजना वर्ष 2022- 23 के अनुसार।

फिंगेश्वर :- गरियाबंद जिले के कक्षा छठवीं से आठवीं तक के कुल 28277 विद्यार्थियों तथा कक्षा नौवीं से बारहवीं तक कुल 30392 विद्यार्थियों का उपचारात्मक शिक्षण के अंतर्गत स्पेशल कोचिंग दिए जाने हेतु 150 रुपये प्रति विद्यार्थी की दर से 88 लाख 350 रुपये जारी किए गए हैं और मार्च एंडिंग को देखते हुए आनन-फानन में शिक्षकों के खातों में फर्जी तरीके से राशि अंतरित कर बंदरबांट करने का प्रयास किया जा रहा है। समाचार पत्रों में लगातार इस संबंध में समाचार प्रकाशित होने पर समग्र शिक्षा के प्रबंध संचालक ने प्रदेशभर के समस्त जिला शिक्षा अधिकारी और जिला मिशन समन्वयकों को पत्र जारी कर दिया है और उपचारात्मक शिक्षण कक्षाओं के सत्यापन, छात्रों की संख्या, एवं शिक्षकों द्वारा ली गई कक्षाओं का सत्यापन परीक्षण करने के बाद ही भुगतान का आदेश जारी किया है साथ ही कुछ संकुल का जांच कर प्रतिवेदन उच्च कार्यालय को प्रेषित करने को कहा गया है। इसके साथ ही प्रबंध संचालक ने यह भी स्पष्ट कर दिया है यदि गलत भुगतान किया जाता है तो सारे मामले की जिम्मेदारी जिला शिक्षा अधिकारी और जिला मिशन समन्वयक की होगी। परंतु प्रबंध संचालक के निर्देश की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए अधिकारी अपनी जेब गर्म करने में लगे हुए हैं। इस संबंध में हमारे संवाददाता ने जिला शिक्षा अधिकारी जिला मिशन समन्वयक विकास खंड शिक्षा अधिकारी सहायक विकास खंड शिक्षा अधिकारी एवं विकासखंड के विभिन्न संकुल प्राचार्य से संपर्क कर उपचारात्मक शिक्षण के कक्षा संचालन की जानकारी प्राप्त करने की कोशिश की। चर्चा करने पर ज्ञात हुआ कि उपचारात्मक शिक्षण की कक्षाएं कहीं पर भी नहीं लगी है और न ही विद्यार्थियों की शैक्षिक स्तर में वृद्धि हुई। चूंकि यह कार्य शाला समय से पृथक समय एवं अवकाश के दिनों में अतिरिक्त कक्षाएं लेकर कराया जाना था, इसलिए किसी भी शिक्षक ने उपचारात्मक शिक्षण हेतु कोई रुचि नहीं दिखाई। जिले के उच्च अधिकारियों के द्वारा इस महत्वपूर्ण परियोजना की वास्तविक मानिटरिंग नहीं किए जाने के कारण यह योजना सिर्फ कागजों में चली और वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर इस हेतु राज्य शासन से प्राप्त राशि की बंदरबांट इन अधिकारियों के द्वारा स्वयं की जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम का दुखद पहलू यह है कि कोरोना कॉल में बच्चों का शैक्षिक स्तर जो गिर चुका था उसमें वृद्धि किया जाए परंतु कागजी योजना के कारण जिले के विद्यार्थियों को इसका वास्तविक लाभ नहीं मिल पाया। क्या कहते हैं अधिकारी-

“मेरे को इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है इसके बारे में जिला मिशन समन्वयक ही बता पाएंगे। ” डीएस चौहान जिला शिक्षा अधिकारी गरियाबंद”
आपके माध्यम से जानकारी प्राप्त की है मामले की जांच कराई जाएगी गलत पाए जाने पर शिक्षकों से वसूली भी की जाएगी। “श्याम चंद्राकर जिला मिशन समन्वयक गरियाबंद “उक्त कक्षाएं मेरे कार्यकाल में कहीं नहीं हुई है। इस संबंध में पूर्व विकास खंड शिक्षा अधिकारी ही जानकारी दे पाएंगे।” रामेंद्र कुमार जोशी विकास खंड शिक्षा अधिकारी फिंगेश्वर “मैंने रजकट्टी, लचकेरा, खपरी, बोरीद, सरकड़ा सहित 20 से 25 स्कूलों का निरीक्षण किया है। लेकिन किसी भी स्कूल में न तो कोई रजिस्टर, न कोई रिकार्ड और न ही उपचारात्मक शिक्षण की कक्षाएं संचालित होते पाया गया। “हेमंत कुमार साहू सहायक विकास खंड शिक्षा अधिकारी फिंगेश्वर “उपचारात्मक शिक्षण संबंधी कक्षाएं विधिवत चल रही है जिसका मैंने खुद निरीक्षण किया है।” टिकेंद्र कुमार यदु
विकासखंड स्त्रोत केंद्र समन्वयक फिंगेश्वर इस प्रकार उपचारात्मक शिक्षण के नाम पर राशि आहरित कर अपनी जेब गर्म करने का दुस्साहस ऐसे अधिकारी कर रहे हैं जिन्हें खुद जांच कर प्रतिवेदन राज्य कार्यालय को देना है।