*सोच सकारात्मक हो तो दिव्यांगता कभी बाधक नहीं हो सकती – जाकिर हुसैन*
कलाकार अच्छी गीतों का चयन करें तो फुहड़ता दूर हो जाएगी
बाॅलीवुड का बेस्ट सिंगर बनकर छत्तीसगढ़ का नाम एशिया में फेमश करना चाहता हूॅ
*राजिम।* कुछ करने की तमन्ना हो तो दिव्यांगता बाधक नहीं हो सकती। आत्मनिर्भरता हमारा लक्ष्य तय करता है। मैं हमेशा साकारात्मक विचार रखता हूॅ जिसके बदौलत नकारात्मकता मुझसे कोसो दूर है। यह सोच हर व्यक्ति रखें तो असफलता शब्द डिशनरी से गायब हो जायेगी। उक्त बातें माघी पुन्नी मेला में कार्यक्रम देने पहुंचे वाईस आॅफ छत्तीसगढ़ जाकिर हुसैन ने व्यक्त किये। उन्होंने महोत्सव मंच में शानदार प्रस्तुती से हजारों दर्शकों का मन मोह लिया। एक के बाद एक लगातार दो घंटे तक समां बांधे रखा। मीडिया सेंटर में उन्होंने पत्रकारों से चर्चा करते हुए बताया कि गुरू समाज में रहने का तरीका बताते है। जब मैं छोटा था तो लोग मुझे लंगड़ा, लुला कहकर उपहास करते थे। मैं उन्हें बुरा नहीं कहता लेकिन एक समय बाद उन्हें अफसोस होता और मुझसे माफी मांगने के लिए आ जाते थे। दुःख और सुख धूप छांव की तरह है। असफलता पर निराश होने की जरूरत नहीं है। हो सकता है आप जिसकी प्रतीक्षा में है उससे बड़ी सफलता आपकी इंतजार कर रही हो, क्योंकि दुःख का राज होता है। उसके बाद आने वाला सुख जीवन की दशा और दिशा दोनों बदल देती है। जाकिर हुसैन ने एक प्रश्न के जवाब में बताया कि हर पुरूष की सफलता में कहीं न कहीं औरत की हाथ होती है। मेरी माॅ की दुआ और पत्नी का साथ तथा मेरे तीनों बच्चों का उत्साह मेरी सफलता रूपी गाड़ी को रफ्तार दी। उन्होंने आगे बताया कि मेरा जन्म कोरबा में हुआ, पापा मो. हुसैन अक्सर गीत गुनगुनाते थे। फुफा शमशेर खान म्युजिक से जुड़े थे। संगीत मेरे खून में था, जो उपहार के बतौर परिवार से मिला। कक्षा आठवी में देश भक्ति गीत से मेरा संगीत का सफर शुरू हुआ। ए मादरे वतन तुझको सलाम…. गीत ने मुझे काफी प्रसिद्धि दिलाई। सरस्वती शिशु मंदिर में पढ़ा हूॅ। कक्षा ग्यारहवीं के बाद पहली बार कोई बड़ा मंच किया उस समय हरमोनियम भी बजाता था। दूसरे के ग्रुप में संगत के लिए गया तो 200 रू. का बक्सीस मिला। उस समय की-बोर्ड से मेरी पहचान बनी। मैं खुद मोहल्ले के लड़कों साथ में लेकर एक राइजिंग स्टार ग्रुप बनाया। सन् 2008 में मेरा म्युजिकल ग्रुप दौड़ने लगा। मेरे गुरू शमशेर खान, देवप्रसाद राठौर थे। प्राचीन कला केन्द्र चंड़ीगढ़ घराने से सुगम संगीत सीखा तब से लेकर अब तक देश भर के सभी राज्यों में लगातार कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी है। तालियाॅ मेरे उत्साह को बढ़ाती है आज मैं जिस भी पोजिशन पर हूॅ वह दर्शकों का प्यार है। कोरोना काल के बाद यह मेरा तीसरा कार्यक्रम है। कोरबा डिस्ट्रिक्ट एसोसिएशन का अध्यक्ष हूॅ। मेरे द्वारा कोरोना काल में लगातार आॅनलाइन सिंगिंग कराया गया। इसमें अनेक नवउदित गायकों ने भाग लेकर गानय की बारीकीयों को जाना। उन्होंने बताया कि कोरोना वायरस एवं लाॅकडाउन से कलाकारों का रोजगार छिन गया। जिसकी क्षतिपूर्ति अभी तक नहीं हो पायी है चूंकि कलाकारों के पास कोई दूसरा व्यवसाय नहीं है। हम उम्मीद करते है कि छत्तीगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कलाकारों के हित में जरूर काम करेंगे। कलाकारों को आगे बढ़ाने के लिए मंच के अलावा एसोसिएशन के द्वारा चेरिटेबल का कार्य करना अच्छा लगता है। उन्होंने अपनी दिव्यांगता के बारे में बताया कि मेरा पैर शुन्य हो गया है। बाथरूम में भी फिसल कर जाता हूॅ। पहले बैसाखी सेे चल लेता था लेकिन स्थिति ज्यादा खराब हो गई है ट्राइसिकल से आना-जाना होता है। पहले की अपेक्षा 70 प्रतिशत रिकवर हो गया हूॅ। मुझे उम्मीद है कि शीघ्र बैसाखी से चलुंगा। उन्होंने अपनी संदेश में कहा की कलाकार अच्छी गीतों का चयन करें तो फुहड़ता दूर हो जाएगी। इस वाॅइस आॅफ छत्तीसगढ़ का सपना है कि वह बाॅलीवुड का बेस्ट सिंगर बनकर छत्तीसगढ़ का नाम एशिया में फेमश करना चाहता हूॅ।
