फिंगेश्वर :- जिला शिक्षा विभाग में इन दिनों अधिकारियों के द्वारा जमकर बंदरबांट की जा रही है, जिसका साक्षात उदाहरण बेसलाइन एवं एंड लाइन मूल्यांकन है। समग्र शिक्षा राज्य कार्यालय की वार्षिक कार्य योजना वर्ष 2022 23 के अनुसार गरियाबंद जिले के कक्षा छठवीं से आठवीं तक के कुल 28277 विद्यार्थियों तथा कक्षा नौवीं से बारहवीं तक कुल 30392 विद्यार्थियों का उपचारात्मक शिक्षण के अंतर्गत स्पेशल कोचिंग दिए जाने हेतु प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई थी। इस हेतु ₹150 प्रति विद्यार्थी की दर से शिक्षकों को भुगतान किया जाना था परंतु न तो उपचारात्मक शिक्षण की कक्षाएं लगी और न ही विद्यार्थियों की शैक्षिक स्तर में वृद्धि हुई। परंतु अधिकारियों के द्वारा उक्त राशि का जमकर बंदरबांट किया जा रहा है। उपचारात्मक शिक्षण नामक खेल माह अक्टूबर 2022 से प्रारंभ हुआ जिसके अंतर्गत सर्वप्रथम बेसलाइन आकलन का आयोजन जिले की समस्त शासकीय शालाओं में किया गया। इस बेस्ट लाइन आकलन के परिणाम के आधार पर कमजोर शैक्षिक स्तर के बच्चों का चिन्हांकन किया जाना था। बच्चों के उपलब्धि स्तर के अनुरूप विषय विशेषज्ञ शिक्षकों द्वारा उपचारात्मक शिक्षण कराया जाना था। यह कार्य शाला समय से पृथक समय एवं अवकाश के दिनों में अतिरिक्त कक्षाएं लेकर कराया जाना था। इस उपचारात्मक शिक्षण को 3 माह तक कराया जाना था। इसे एक विषय विशेषज्ञ पीएलसी के माध्यम से ऑनलाइन कक्षाएं भी ली जानी थी परंतु जिले के उच्च अधिकारियों के द्वारा इस महत्वपूर्ण परियोजना की वास्तविक मानिटरिंग नहीं किए जाने के कारण यह योजना सिर्फ कागजों में चली और वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर इस हेतु राज्य शासन से प्राप्त राशि की बंदरबांट इन अधिकारियों के द्वारा स्वयं की जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम का दुखद पहलू यह है कि कोरोना कॉल में बच्चों का शैक्षिक स्तर जो गिर चुका था उसमें वृद्धि किया जाए परंतु कागजी योजना के कारण जिले के विद्यार्थियों को इसका वास्तविक लाभ नहीं मिल पाया। इस योजना के उचित निर्वहन हेतु प्रत्येक संकुल समन्वयकों को ₹1000 तथा प्रत्येक शाला को इंटरनेट की सुविधा हेतु 2500 रुपए वार्षिक की दर से भुगतान किया गया। साथ ही प्रत्येक विकासखंड के विकासखंड स्त्रोत समन्वयकों को ₹6000 की दर से मानिटरिंग हेतु मानदेय दिया गया। इस संबंध में हमने विकासखंड स्त्रोत केंद्र समन्वयक फिंगेश्वर से चर्चा की तो उन्होंने बताया की उपचारात्मक शिक्षण संबंधी कक्षाएं विधिवत चल रही है जिसका मैंने खुद निरीक्षण किया है। परंतु जब इस संवाददाता ने विकासखंड की विभिन्न स्कूलों का निरीक्षण किया तो किसी भी प्रकार की उपचारात्मक शिक्षण संस्थाएं संचालित होना नहीं पाई गई। इस प्रकार उपचारात्मक शिक्षण के नाम पर राशि आहरित तो जरूर कर ली गई पर बच्चों को इसका लाभ प्राप्त नहीं हुआ।
