
नवापारा राजिम :- विक्रम सम्वत 2080 से चैत्र मास शुरू हो रहा है, नगर के ज्योतिष भूषण पण्डित ब्रह्मदत्त शास्त्री ने इसके पौराणिक महत्व की महिमा बताते हुए कहा कि यह सृष्टि के प्रारम्भ की तिथि है, ब्रह्म वैवर्त पुराण के अनुसार इसी दिन पितामह ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना शुरू की थी, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक, धर्मराज युधिष्ठिर का राजतिलक एवम विक्रमादित्य के विजय दिवस के रूप में भी इस तिथि को एक पर्व के रूप में मनाया जाता है, आज के दिन ही उज्जैन नरेश विक्रमादित्य ने विक्रम सम्वत शुरू किया था, यह 2080 है, महान गणितज्ञ ज्योतिष शास्त्री आचार्य भास्कराचार्य जी ने पंचांग को प्रकृति और कलगणना के आधार पर तैयार किया था, विभिन्न तिथियों, पर्वों और ग्रहण आदि की सूचना हमे पण्डित गण पंचाग देखकर ही बताते हैं, शास्त्रीजी ने बताया कि आज से बासंती नवरात्र भी शुरू हो रहे हैं, इन नौ दिनों में हम सभी जगदम्बा का पूजन आराधान करते हैं, आज कलश स्थापना, ज्योत जलाने व जवारा जगाने का शुभ मूहर्त सूर्योदय से लेकर सुबह सवा नौ बजे तक, फिर सुबह 11:15 से लेकर 12 बजे तक श्रेयस्कर है, देवी की स्थापना व विसर्जन प्रातः काल ही करना चाहिए, ऐसा श्रीमद देवी भागवत में स्पष्ट उल्लेख मिलता है, सनातनी संस्कृति के इस नव वर्ष को हम सभी को बड़े हर्ष उल्लास के साथ मनाना चाहिए, ब्रह्म मुहूर्त में स्नान ध्यान, मन्दिरों में देव दर्शन, बड़ों के चरण स्पर्श से दिन की शुरुआत करनी चाहिए और घर पर भगवा ध्वज फहराना चाहिए, संध्या समय घर और दुकानों में दीप जलाने चाहिए और परस्पर शुभकनाए देकर, फल मिठाई खिलाकर यह त्यौहार मनाना चाहिए।
