राजिम :- विश्व कविता दिवस के अवसर पर शहर के साहू छात्रावास राजिम भक्तिन माता कार्यालय में प्रांतीय छत्तीसगढ़ी साहित्य समिति जिला गरियाबंद तहसील इकाई राजिम के तत्वाधान में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें अंचल के कवियों ने कविता पाठकर शानदार माहौल बना दिया। हास्य व्यंग्य के खूब तीर चले तो छत्तीसगढ़ी गीतों ने माहौल में चार चांद लगा दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध व्यंग्यकार काशीपुरी कुंदन थे। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद कविताएं उभरकर बाहर आई है राजिम क्षेत्र के कवियों ने लगातार इतिहास बनाया है इसमें कोई दो मत नहीं है हालांकि यहां अलग- अलग समितियां है लेकिन ऐसे कार्यक्रमों में एक साथ बैठकर उसे सफल बनाने में सहयोग करें तो कार्यक्रम की रौनकता ही बढ़ जाती है। इस मौके पर उन्होंने व्यंग्य के टुकड़िया प्रस्तुत की और खूब गुदगुदाया। पंक्ति देखिए-शराब पीने से आदमी कभी बूढ़ा नहीं होता है, यह अलग बात है कि वह जवानी में ही चला जाता है। नई कविता के कवि नूतन साहू ने कहा कि तकदीर भी बदलेगा तस्वीर भी बदलेगा। वरिष्ठ साहित्यकारों का अनुसरण करो दोनों हाथों की लकीर भी बदलेगा। डॉ रमेश सोनसाइटी ने व्यंग्य रचना प्रस्तुत की। देखिएगा-हर रोज सवेरा होता है हर शाम अंधेरा होता है पर कुटिया में जाकर देखो मातम का बसेरा होता है। विश्व कविता दिवस पर शानदार कविता पढ़ते हुए गणेश गुप्ता ने कहा कि दुनिया हंसती है तो हंसती कविता। दुनिया रोती है तो रोती कविता। तन मन में आग लगी तो क्रोधित होती कविता। रामायण व्याख्या कार और कवि प्रहलाद गंधर्व ने जीवन की मार्मिक बात बताते हुए कविताएं पढ़ी। लोहरसी से पहुंचे गीतकार कमलेश कौशिक कठलहा छत्तीसगढ़ी में गीत पढ़ते हुए समा बांध दिया-डारी डारी मंमहाय पलासे। चौरा चौरा फागुन नाचे। गीतकार रमा भोसले ने होली पर गीत सुनाए। होली गीत में भोले साहू ने पूरा मंच लूट लिया।व्यंग्यकार संतोष सेन व्यंग्य रचना देकर हंसी के फुहारे प्रस्तुत की। कवि संतोष कुमार सोनकर मंडल ने बेटियों पर शानदार रचना प्रस्तुत की नवरात्रि का स्मरण कराते हुए 2 से 10 वर्ष की बालिका को देवी का स्वरूप बताया। इस मौके पर आभार प्रकट छत्तीसगढ़ी साहित्य समिति के तहसील इकाई के अध्यक्ष नूतन साहू ने किया। इस मौके पर अजीज खान, झाड़ू राम साहू, विकास कुमार सहित अनेक श्रोतागण उपस्थित थे।
