कमलक्षेत्र के आराध्य देवी महामाया माता में जलेंगे मिट्टी के कलश पर ज्योत।

राजिम :- कमल क्षेत्र की आराध्य देवी मां महामाया मंदिर में इस बार नवरात्रि की तैयारी विशेष रुप से की जा रही है। प्रबंध समिति के द्वारा नए पदाधिकारियों का चयन किया गया है। पूरी उत्साह के साथ रंग रोगन एवं रसीद काटने का दौर चल रहा है मंदिर समिति के वाल्मीकि धीवर ने बताया कि अभी तक 500 से भी ज्यादा रसीद ज्योति कलश के लिए काटी जा चुकी है। प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी 1000 से भी ज्यादा ज्योति कलश प्रज्ज्वलित किए जाएंगे।

मां शीतला महामाया प्रबंध समिति के अध्यक्ष लीलेश्वर साहू ने बताया कि नवरात्र पर्व में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की दिक्कत ना हो इसलिए पूरे मंदिर परिसर में कुल 12 की संख्या में सीसीटीवी कैमरा लगा दिए गए हैं इससे पूरा परिसर एक स्क्रीन पर दिखेगा। इस बार मिट्टी के कलश पर ज्योति जलाई जाएगी। पिछली बार लोहे या तांबे के कलश पर जलाई जाती थी परंतु इस बार प्राकृतिक स्वरूप देने का निर्णय समिति द्वारा लिया गया है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र के सेवा मंडलियों को आमंत्रित किया जा रहा है ताकि प्रतिदिन माता सेवा में भाग ले सकें। मां महामाया देवी को कमलक्षेत्र के आराध्य देवी माना गया है। इसलिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु गण प्रथम दिन से ही पहुंचना शुरू हो जाते हैं सभी के लिए प्रसाद तथा ज्योति कलश गृह में दर्शन के लिए शीशा लगाया गया है। बताया गया कि घटस्थापना एवं ज्योति प्रज्वलित प्रतिपदा 22 मार्च बुधवार समय 11:36 से 12:24 तक होगी। 26 मार्च दिन रविवार को ललिता पंचमी मनाया जाएगा। 29 मार्च बुधवार को अष्टमी हवन पूजन दोपहर 2:00 बजे होगा उसके बाद 30 मार्च गुरुवार को नवमी जंवारा विसर्जन सुबह 9:00 बजे से होगा। पद भोग वितरण मां महामाया मंदिर में 31 मार्च दिन शुक्रवार तथा शीतला मंदिर में 2 अप्रैल रविवार को किया जाएगा।

प्राचीन है मां महामाया मंदिर

मां महामाया मंदिर अत्यंत प्राचीन है इनका निर्माण कब हुआ है कोई नहीं बता पा रहे हैं जब से यहां के लोगों ने देखा है तब से मां महामाया विद्यमान है अलबत्ता कुछ बुजुर्गों का कहना है कि एक समय यह स्थल निर्जन वन था जहां मां महामाया पूर्वाभिमुख प्रकट हुई थी। उस समय इनका स्वरूप अत्यंत विकराल थी जिसे आम श्रद्धालु देखने से डरते थे सब कुछ विद्वानों की राय से इनके स्वरूप को बदला गया और पुर्वाभिमुख से पश्चिमाभिमुख हो गया। धीरे से इस स्थल को मंदिर का रूप दिया गया बाद में इनका जीर्णोद्धार कर मंदिर को विशेष आकर्षक रूप से बनाया गया तब से लेकर मंदिर में अनवरत पूजा पाठ से माहौल अत्यंत भक्ति में रहता है। दिन में पूजा अर्चना के साथ ही भूख प्रसादी लगाया जाता है वर्ष के दोनों नवरात्र पर्व पर ज्योति कलश प्रचलित की जाती है।

शहर में है अनेक देवी मंदिर

धर्म नगरी में मां महामाया मंदिर के अलावा अनेक देवी मंदिर विराजमान है। मां महामाया मंदिर से पूर्व दिशा की ओर 100 कदम की दूरी पर देवी चंडी विराजमान है। नदी के किनारे शीतला माता शीतलता प्रदान कर रही है। चौबेबांधा मार्ग पर सत्ती माता का मंदिर है प्रतिवर्ष यहां पर ज्योति कलश प्रचलित की जाती है। त्रिवेणी संगम के मध्य में स्थित कुलेश्वर नाथ महादेव मंदिर के द्वितीय गर्भगृह में देवी दुर्गा विराजमान है। आमापारा में ब्रह्मचारिणी दरबार है।