बस्तर की बर्बादी की नींव मजबूत करता चला आ रहा है आर्सेलर मित्तल निप्पन एण्ड स्टील।

किरंदुल /रणवीर सिंह चौहान

किरंदुल :- सत्ता, बाहुबल और पैसे के गठजोड़ की अनोखी मिशाल है आर्सेलर मित्तल यह सच है की औद्योगिकरन देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन आर्सेलर मित्तल जैसी कम्पनी शासन प्रशासन के नियमों को ताक में रखकर अपना उल्लू सीधा करती आ रही है।

वैसे तो सदियों से बस्तर ने अपने आप को आधुनिकता, औधोगीकरण से दूर रखा, व खुद की संस्कृति व सभ्यता पर ज्यादा भरोसा दिखाया, नदियों, झरनों, पहाड़ों,वादियों, के बीच व खुले आकाश के नीचे शुद्व प्राकृतिक परिवेश के बीच अपना जीवन यापन करने वाले भोले भाले आदिवासियों ने कभी स्वप्न में भी नहीं सोचा होगा कि उनकी भावी पीढ़ी के मध्य एक आर्सेलर मित्तल जैसी कंपनी कदम रखेगी व उनके जीवन और जीवन शैली में भूचाल खड़ा कर देगी।

उनके प्राकृतिक पर्यावास की धज्जियां उड़ा कर उन्हें तिल तिल मरने को विवश कर देगी उनके नदी नालों पर भी अपना अधिकार जमा लेगी और यह सिलसिला रुकेगा नहीं कम्पनी व सत्ता के गठजोड़ कि यह एक अलग ही दास्तान होगी, चारों तरफ लाल धूल के गुबार उड़ते हैं।

किन्तु किसी को दिखता नहीं, अंधाधुंध रफ्तार से लाल जहरीली धूल उड़ाते व लौह चूर्ण का परिवहन करते टिप्पर दिन रात यमराज कि तरह कालोनी व गांव की रोड पर गश्त करते रहते है किन्तु इस पर किसी को ध्यान जाता ना हीं कम्पनी के द्वारा किरंदुल नगर जो कभी मिनी कश्मीर के नाम से जाना जाता था उक्त मिनी कश्मीर में जगह जगह अपने जहरीले अपशिष्टों के ढेर लगा दिए हैं किन्तु किसी को दिखता नहीं अब सब के सब सूरदास क्यों बने हुए हैं शासन प्रशासन क्यों खामोश है इसका विवरण देने की तो कोई आवश्यकता नहीं, इतनी समझ तो सभी रखते हैं, आर्सेलर मित्तल एक विशेष प्रकार से तैयार किये गए अपने माल को विशाखपट्नम की तरफ पाइप लाइन के माध्यम से भेजती है जिसके लिए प्रचुर मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है और यह पानी सुकमा से 300 एम् एम् पाइप लाइन के जरिए किरन्दुल में संयंत्र के भीतर बने रिजर्व वायर तक लाया जाता है।

जो कि लगातार तीव्र गति से रिजर्व वायर में जमा होता रहता इसकी एक भारी मात्रा का उपयोग माल को पानी की तीव्रता व शक्ति से विशाखापत्तनम की ओर भेजने में खर्च हो जाता है जल की दूसरी बढ़ी मात्रा कम्पनी द्वारा संयंत्र व परिसर को साफ सुथरा रखने के लिए किया जाता है, संयंत्र के अन्दर 2 इंच के आठ दस पाइप इसी कार्य में लगे होते हैं, जिस तरह सयंत्र को साफ़ सुथरा रखा जाता है इसी तरह आस पास के क्षेत्र वासियों का ख्याल रख उनके जन जीवन का ख्याल रखना इनका कर्तव्य नहीं है। जहाँ एक तरफ पूरा शहर पानी की कमी से जूझ रहा है लोग बून्द बून्द पानी के लिए तरसते हैं वहीं आर्सेलर मित्तल रोजाना बेहिसाब शबरी से मिलने वाले पानी का दुरुपयोग करने में मशगूल है, बस्तर के संसाधनों का जम कर दोहन करने वाली उक्त कंपनी बदले में यहाँ के निवासियों को धूल के गुबार व लाल पानी के साथ लाल जहर परोस रही है और प्रस्तुत कर रही है।