गीत के साथ संगीत का जादू चला सांस्कृतिक मंच पर
सूफी गायन और पारम्परिक गीतों की हुई बौछार
राजिम। माघी पुन्नी मेला में चैथे दिन सांस्कृतिक मंच राकेश और निशा शर्मा का ऐसा जादू चला जिससे कोई भी अछुता न रहा। पहली बार इस मंच पर नवीन वाद्ययंत्र का उपयोग कर कलाकारों ने समां बांधा। इनकी पहली प्रस्तुती थी मोसे नैना मिलाये के…. सूफी अंदाज में गीत सुन कर दर्शक भाव-विभोर हो गये। इसी के साथ राकेश शर्मा ने ऐकर का भरोसा चोला माटी के हे रे… गीत के माध्यम से लोगों को संदेश दिया की हमें कभी घमण्ड नहीं करना चाहिए बल्कि एक-दूसरे का सहयोग हमें करते रहना चाहिए। गुरू घासीदास बाबा का भजन प्रस्तुत किया गया तै आ जाबे गुरू घासीदास… अगली प्रस्तुती बासी के संसों म… सांसों की माला ने सुमिरू मैं प्रिये का नाम… जैसे ये गीत मंच में दर्शकगण सुने वैसे ही सभी जोरदार तालियों से मंच झुम उठा। इसके बाद एक बहुत प्रसिद्ध गीत दमादम मस्त कलंदर… की प्रस्तुती निशा शर्मा के द्वारा हुई उसी समय पूरा दर्शक भी अपने स्थान पर खड़े होकर झूमने लगे। फिल्म ’मया’ के सबसे सुपरहिट गीत लईका के खातिर रोवत हो लईका के महतारी… के गीत में तो महौल को और सुखमय व आनन्दित बना दिया। इसी के साथ छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध गायक लक्ष्मण मस्तुरिया को श्रद्धांजलि देते हुए जागों रे संगी रे गाॅव नगर मा… के गीत के माध्यम से छत्तीसगढ़ में हो रही विकास के बारे में बताया गया।
कार्यक्रम के द्वितीय कड़ी के रूप में संगीत का पर्यायवाची कहे जाने वाले रिखी क्षत्री लोक रागिनी भिलाई की प्रस्तुति हुई। इन्होंने 175 विभिन्न प्रकार के वाद्ययंत्रों को संजोकर नाटय शाला तैयार की हैं। विलुप्त हो रही प्राचीन वाद्ययंत्रों को संरक्षित करने का कार्य किया। तोर पईया लागव मोर छत्तीसगढ़ के मोर मयारू माटी…. की प्रथम प्रस्तुति में छत्तीसगढ़ की पावन माटी का चरण वंदन किया गया। जिसे दर्शकों ने खुब सराहा। देवी-देवताओं का आगाज देती गीत.. छत्तीसगढ़ की परम्परा है कि किसी भी शुभ कार्य की शुरूआत देवी वंदना से की जाती हैं। या कुण्देन्दु तुषार हार धवला… सरस्वती वंदना की सामूहिक नृत्य ने खुब तालिया बटोरी। गांव के देवी-देवता ल नेवता नेवत आबे… की नृत्य में बस्तर के कोण्डागांव की छलक दिखाई गई। जहां अंगा देव की पालकी सजाकर बस्तरी वेशभूषा में सुसज्जित होकर महिला व पुरूष ढोलक की थाप देकर नृत्य किए। पैरों में घुघरू बांधे झूम-झूमकर पूरे मंच को हिला देने वाली यह प्रस्तुति बहुत आकर्षक रहीं। जिसका सभी ने बहुत लुप्त उठाया। दंतेवाड़ा आदिवासी नृत्य में छत्तीसगढ़ के घने जंगल माड़िया बाहुल्य क्षेत्र की आदिवासी संस्कृति की जीवन झांकी प्रस्तुत किया गया। गढ़गे मंझनिया कोईकी कांटा ओ..ददरिया ने जिसे गीतों की रानी कहा जाता हैं। जो प्रणय पर आधारित होता हैं की प्रस्तुति ने दर्शको का मनमोह लिया। ढोलक की थाप में कर्मा नृत्य झपकी बजा दे राजा मोर कर्मा के ताल म…. मयूर पंख लगाकर एक ताल में बहुत ही सुंदर नृत्य की प्रस्तुति से दर्शक झूम उठे। रूम झोर तोर पावं के पैरी बजे ओ…… घुमर -घुमर नाचे ओ देखे तोला जबले गोरी ओ….. जैसे एक से बढ़कर छत्तीसगढ़ की झटा को बिखरते आदिवासी के बाहुल्य क्षेत्र के मनोरंजन रहन सहन परम्पराओं को समेटती अनेकों प्रस्तुतियों ने अंत तक दर्शकों को बांधकर रखा। साथ ही इसी मंच पर कृष्ण राधा के प्रेम प्रसंग को दर्शाते हुए ये का होगे मोला नींद नई आए रतिया के साथ ही सुन संगवारी मया के मुंदरी मोर चिन्हारी के गीत ने भी एक बार फिर दर्शकों अपनी ओर खीचनंे पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम की समाप्ति दर्शक अपनी जगह पर ही बैठे रहे। जैसे उनकों लग रहा था कि लोकरागिनी का कार्यक्रम एक बार और आरंभ होगा लेकिन हाईकोर्ट के आदेशानुसार 10 बजे कर देनी होती हैं। अतः मेला समिति इस बात का ध्यान रखते हुए मुख्यमंच का कार्यक्रम 10 बजे समाप्त कर दी जाती हैं। कलाकारों का सम्मान अपर कलेक्टर जेआर चैरसिया, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुखनंदन राठौर, नवापारा नगर पालिकाध्यक्ष धनराज मध्यानी, राजिम नगर पंचायत अध्यक्ष रेखा सोनकर, पूर्व उपाध्यक्ष जीत सिंह गोबरा नवापारा, राजा चावला, विकास तिवारी, तरूण साहू, प्रकाश साहू, रामानंद साहू आदि ने पुष्प भंेट कर आत्मीय स्वागत किया। कार्यक्रम का सचंालक निरंजन साहू, मनोज सेन द्वारा किया।
