राम को निर्गुण रूप चाहने वाले रामनामी सम्प्रदाय के रूप में आज भी है। 

राम को निर्गुण रूप चाहने वाले रामनामी सम्प्रदाय के रूप में आज भी है।

राजिम। माघी पुन्नी मेला में कुछ ऐसी बातों की भी जानकारी मिलती है जो लोगों के लिए कोतुहल का विषय बन जाता है। इसी परंपरा में सन् 1890 में जन्म लिए परशुराम रामनामी ने रामनामी पंथ की स्थापना किया। जिनका मुख्य उद्देश्य था कि परशुराम एक दलित वर्ग से थे। उन्हें प्रभू श्रीराम की आराधना करने के लिए सक्त मना किया गया और कहा गया कि श्रीराम आप लोगों के भगवान नहीं है लेकिन परशुराम दलित ने इस बात का खण्डन करते हुए कहा की हम श्रीराम को निर्गुण रूप में मानेंगे। तब से आज तक रामनामी पंथ को मानने वाले लोग अपने पूरे शरीर में बिना जगह छोड़े राम, राम गोदना गोदवाते है। आज वर्तमान में रामनामी संप्रदाय जमगाहा, शिवरीनारायण के पास मिल जायेंगे लेकिन वर्तमान पीढ़ी के लोग इस परंपरा को नहीं मान रहे है और रामनामी सम्प्रदाय को मानने वाले कुछ लोग ही अब रह गये है। इस बात की जानकारी पर्यटन विभाग में रामवनगमन पथ के बारे में चर्चा के दौरान दी गयी और उनका मानना है कि ऐसे लोगों का संरक्षण किया जाना चाहिए।