राजिम :- राजिम माघी पुन्नी मेला 5 से लेकर 18 फरवरी का लगातार 14 दिनों तक चला। इस दरमियां त्रिवेणी संगम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने स्नान दान एवं मेला भ्रमण का लुफ्त उठाया। यहां शासकीय स्टाल भी लगे हुए थे इसके अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रम में हजारों प्रदेश के लोक कलाकारों ने शानदार प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रदेश की लोक संस्कृति को ऊंचा उठाने का महत्वपूर्ण काम किया है। इस दौरान आने वाले श्रद्धालुओं के द्वारा अपने साथ में तरह-तरह के गंदगी भी छोड़ चुके हैं जिन्हें साफ करने वाला कोई नहीं दिख रहा है एक ओर संगम नदी में कपड़े की ढेरी लग गई है जिधर देखो उधर कटे फटे हुए कपड़े बड़ी संख्या में दिख रहे हैं इनके अलावा प्लास्टिक झिल्ली के थैलियां, कागज के टुकड़े इत्यादि से संगम नदी प्रदूषित हो गई है इन्हें निकालना बहुत जरूरी है। प्रशासन द्वारा कुछ मेहनत किए गए हैं लेकिन पूरी मेहनत नहीं होने के कारण कुछ मेहनत भी व्यर्थ साबित हो रहे हैं। उल्लेखनीय है कि त्रिवेणी संगम में लाखों लोगों के श्रद्धा का केंद्र है। स्नान दान के साथ मंदिर दर्शन के अलावा पर्यटन करने के लिए भी बड़ी संख्या में सैलानी उपस्थित होते हैं मेले के दौरान तो विदेशी सैलानी भी यहां आए हुए थे। यहां की संस्कृति एवं संस्कार को वह अपने देश लेकर गए हैं। पूरे 15 दिनों तक तकरीबन तीस लाख से भी अधिक श्रद्धालु के आने का अनुमान है। मेला हो जाने के बाद जिला प्रशासन ने भी इस और पलट कर देखना मुनासिब नहीं समझ रहे हैं। मेला की तैयारी में पूरे जिला के जिम्मेदार अधिकारी राजिम में ही डेरा डाले हुए थे लेकिन मिला हो जाने के बाद कोई इसे देखने तक के लिए भी नहीं आ रहे हैं नतीजा गंदगी से त्रिवेणी संगम अटा हुआ है इनके अलावा बस स्टैंड से लगा हुआ मेला मैदान क्षेत्र में भी अब दुकान उठ चुकी है और वहां पर तो गंदगी का विकराल दृश्य देखने को मिल रहा है यहां स्वच्छता अभियान चलना बहुत जरूरी है यदि नहीं चलाया गया तो नगर वासियों को इनका दुष्परिणाम भोगना पड़ेगा। मेला समाप्त होने के बाद भी लोग त्रिवेणी संगम में स्नान करने के लिए तथा मंदिर दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में प्रतिदिन पहुंच रहे हैं।
सोनतीर्थ घाट की स्थिति अत्यंत दयनीय ।
त्रिवेणी संगम में अलग-अलग घाट है लेकिन उनमें से सोन तीर्थ घाट की अपनी अलग मान्यता है। बताया जाता है कि इस घाट में स्नान करने से सोना दान करने के बराबर फल मिलता है। बाहर से आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु अस्थि विसर्जन इसी स्थान पर करते हैं सारे अनुष्ठान करने के कारण हमेशा श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रहती है। घाट पर कपड़े का ढ़ेरी लग गया है यह हटाने के लिए श्रद्धालुओं एवं नगर वासियों के द्वारा बार-बार आवाज लगाई जा रही है की प्रतिदिन इस घाट की सफाई होना चाहिए लेकिन अभी तक स्थानीय प्रशासन से लेकर जिला प्रशासन गंभीर नहीं हुए हैं जिसके कारण आने वाले श्रद्धालु को इन का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
