राजिम। राजिम माघी पुन्नी मेला में 14 फरवरी जनकी जयंती के अवसर पर दूसरा पर्व स्नान किया गया। जानकी जंयती के पावन अवसर पर कबीर पंथ एवं साहू समाज राजिम द्वारा भव्य जुलुस निकाला गया। यह जुलुस महामाया मंदिर से निकलकर सुंदरलाल शर्मा चौक, गायत्री मंदिर, वीआईपी रोड, श्रीराजीव लोचन मंदिर होते हुए कुंड में समापन हुआ। जानकी जयंती के अवसर पर श्रध्दालुओं ने स्नान कर पुण्य लाभ उठाया। महिलाएॅं सहित पुरूष व बच्चे स्नान उपरांत सूर्यदेव को अर्ध्य दिया तथा रेत से शिवलिंग बनाकर जलाभिषेक किया। ऐसी मान्यता है कि जानकी जयंती के दिन जो भी विधि-विधान पूर्वक पूजन कर व्रत रखता है, उसें सोलह महादान, पृथ्वी दान व समस्त तीर्थ दर्शन का फल मिलता है। इस दिन सुहागिनें व्रत रखकर अपने पति की लम्बी उम्र की कामना भी करती है।

उल्लेखनीय हैं कि छत्तीसगढ़ के प्रयाग भूमि राजिम में जानकी जंयती स्नान का विशेष महत्व हैं। लोककथा के अनुसार त्रेतायुग में वनवास के दौरान राम लक्ष्मण सहित देवी सीता ब्रम्हऋषि लोमश से मिलने नदी मार्ग से होते हुए आश्रम पहुंचे और चर्तुमास रूककर आसुरी शक्तियों का समूह नाश किया। इस दौरान नदी में स्नान कर देवी सीता ने रेत से शिवलिंग बनाकर जलाभिषेक कर पूजन किया। तब से रेत से शिवलिंग बनाने की परम्परा चल पड़ी। माना जाता है कि इस तरह अनुष्ठान करने से हरि और हर सहित देवी सीता प्रसन्न होकर अबाध कृपा बरसाती है। शोभायात्रा में प्रमुख रूप से राजिम भक्तिन मंदिर समिति के अध्यक्ष लाला साहू, कबीर पंथ के आचार्य श्रवण साहेब जी, महंत दाऊदास जी, महंत ननकू दास जी, महंत खगेश दास जी, महंत पप्पूदास जी, दीवान ठाकुर राम, पुराजी नारायण दास जी, इंदरमन दास, कृष्णा दास, कबीर आश्रम राजिम के अध्यक्ष मेघनाथ साहू, भवानी शंकर साहू, भोले साहू, श्याम साहू, रामकुमार साहू सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित थे।

