छत्तीसगढ़ की बेटी प्रसिद्ध पांडवानी गायिका किरण साहू से वार्तालाप के कुछ अंश।

राजिम :- पग-पग में मिले ठोकर परेशानी और दर्द एक नया इतिहास लिखती हैं। सपने देखना कोई बुरी बात नहीं लेकिन उसे पूर्ण करने की कोशिश न करना ग़लत हैं जिंदगी इतनी आसान नहीं होती हर पग पर मिले ठोकर परेशानी और दर्द ही सफ़लता के नए इतिहास लिखती हैं।मन को मंदिर बनाकर अपने कर्म की पूजा करने वाले व्यक्ति की कभी हार नहीं होती। अपने व्यक्तित्व के मालिक आप स्वयं बनिए अपना मूल्यांकन दूसरों को करने के लिए छोड़ देंगे तो असमंजस में रहेंगे किसी और की दृष्टि से दुनिया को नहीं देख सकते इसलिए जब ठान लिए तो कभी पीछे नहीं देखना और अपनी पुरातन परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए प्रयास करना आने वाली पीढ़ी को विरासत के रूप में उत्कृष्ट संस्कृति हस्तांतरित करें यही प्रयास होना चाहिए।


एक कलाकार ही अपनी समृद्ध संस्कृति को संरक्षित रख सकते हैं छत्तीस़ढ की अस्मिता को बचाए रखना एक कलाकार का प्रमुख उद्देश्य होना चहिए। बेटी आज दोहरी भूमिका का निर्वहन करते हुए अपनी अलग पहचान बनाने के लिए आतुर है। बेटी किसी पर बोझ नहीं वह नाजुक है पर कमज़ोर नहीं ख़ुद को साबित कर दुनिया को दिखाना चाहती हैं की बेटी भोग की वस्तु नहीं वो भी राष्ट्र की ग़ौरव हैं और खुले आसमान में उड़ना चाहती हैं उसके इस उड़ान में हौसलों के पंख लगाने का कार्य कर रही हैं छत्तीस़गढ़ सरकार भव्य आकर्षक सांस्कृतिक मंच प्रदान करके।
राजिम माघी पुन्नी मेला के सातवें दिन भी एक बेटी ने खुद को साबित किया। सांस्कृतिक मंच क्रमांक दो में छत्तीसगढ़ की बेटी जय मां कर्मा पंडवानी लोककला मंच की किरण साहू ग्राम बोरिद ने कापालिक शैली में ओजस्वी स्वर में सुंदर हावभाव के साथ पांडवानी की प्रस्तुति देने के बाद दैनिक अजय उजाला और सप्ताहिक खबरगंगा संयुक्त अख़बार कार्यालय में पहुंची रिपोर्टर सरोज कंसारी से अपने पांडवानी गायन के सफर को सांझा करते हुए कहा की आज मंच पर दानवीर कर्ण के प्रसंग के माध्यम से संदेश देने का एक छोटा सा प्रयास किया गया।दान मनुष्य का आभूषण हैं जो भी हमारे पास है एक दिन सब छोड़कर जाएंगे इसलिए जरुरत से ज्यादा एकत्रित न करे दिन-दुखी गरीब असहाय की सेवा में अपना जीवन समर्पित कर दीजिए। ससुराल आने के बाद अपने ससुर से पांडवानी की प्रशिक्षण ली और उन्हें गुरू मानकर एकलव्य की भांति उनकी वाणी को सुनकर अभ्यास किया।शिक्षा मात्र पांचवीं तक प्राप्त करने का अफसोस है लेकिन खुश हूं आज पांडवानी के माध्यम से अपनी संस्कृति को सहेजने का अवसर मिला। बचपन में ग्रामीण परिवेश में रहते हुए सादा जीवन उच्च विचार के भाव को लेकर पली बढ़ी। लगभग दस वर्ष से पंडवानी गायन कर रही हैं आगामी योजना गांव की बेटियो को प्रशिक्षण देकर उन्हें इस विधा में पारंगत करना हैं छत्तीसगढ के सभी स्थानों मे लगभग कार्यक्रम दिए इसके अलावा उड़ीसा मे सबसे अधिक छह बार जाने का सौभाग्य मिला ।राजिम की मिट्टी में अपनेपन की महक हैं इस पावन मंच पर आकर जीवन धन्य हो गया देश के कोने-कोने में कई महान कलाकार हैं जरूरत होती है उन्हे अवसर प्रदान करने की वर्तमान शासन के द्वारा बहुत ही सराहनीय कार्य किया जा रहा हैं। एक ही आग्रह है कलाकारों को उचित पारिश्रमिक दे जिससे उनका मनोबल बढ़े अभी तक शासन से हमे कोई लाभ नहीं मिला राजिम में पहली बार कार्यक्रम दिए कई बार प्रयास और भागदौड़ के बाद यहां आए हैं।आज की युवापीढी बहुत जल्दी सफ़लता पाना चाहते हैं लेकिन मेहनत करने में पीछे हो जाते है कम समय में प्रसिद्ध होने के लिए दर्शकों को फूहड़ता परोसना सर्वथा ग़लत हैं।अपनी सभ्यता को धूमिल न करें। लुप्त हो रही विधा को पुनर्जीवित करना हम सभी का दायित्व हैं दैनिक अजय उजाला के प्रधान संपादक अजय देवांगन सप्ताहिक खबरगंगा की स्थानीय संपादक सुश्री पिंकी साहू रिपोर्टर सरोज कंसारी ने उन्हें पुष्प गुच्छ भेंट कर आत्मीय स्वागत किया।