बालोद जिले के सभी न्यायालयों में नेशनल लोक अदालत का हुआ आयोजन।

बालोद /हाशिम कुरैशी

बालोद:- राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार बालोद जिले के सभी न्यायालयों में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया जिनमें राजीनामा योग्य प्रकरणों में पक्षकारों की आपसी सहमति व सुलह समझौता से निराकृत किये गये है। प्रकरणों के पक्षकारों की भौतिक तथा वर्चुअल दोनों ही माध्यमों से उनकी उपस्थिति में निराकृत किये जाने के अतिरिक्त स्पेशल सिटिंग के माध्यम से भी पेटी अफेंस के प्रकरणों को निराकृत किया गया। इस सिलसिले में न्यायमूर्ति श्री गौतम भादुड़ी कार्यपालक अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने इस संपूर्ण लोक अदालत को सफल बनाये जाने हेतु निरंतर प्रयास करते हुए वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से भी लगातार अधिक से अधिक मामलों को निराकृत किये जाने हेतु प्रेरित किया।

इसी तारतम्य में जिला व सत्र न्यायालय बालोद एवं व्यवहार न्यायालय स्तर पर डौण्डीलोहारा, दल्लीराजहरा, गुण्डरदेही में और राजस्व न्यायालयों में भी नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया । जिला एवं सत्र न्यायाधीश बालोद के निर्देशानुसार इस लोक अदालत के लिए कुल 09 खण्डपीठ का गठन किया गया इसमें राजीनामा योग्य दांडिक प्रकरण, सिविल प्रकरण, चेक बाउंस के प्रकरण तथा प्री–लिटिगेशन के बैंक, विद्युत, जलकर, बीएसएनएल आदि प्रकरण राजीनामा हेतु रखे गये । उक्त प्रकरणों में कुल 21096 प्रकरणों का निराकरण इस नेशनल लोक अदालत में हुआ । तथा 16881027 रूपये की राशि का अवार्ड पारित किया गया। इस नेशनल लोक अदालत में राजस्व न्यायालयों में भी कुल 10 खण्डपीठ का गठन किया गया उक्त खण्डपीठों के समक्ष कुल 20543 प्रकरण रखे गये है जिसमें से 19638 प्रकरणों का निराकरण इस नेशनल लोक अदालत के माध्यम से किया गया ।प्री लिटिगेशन के कुल 2141 प्रकरणों को निराकरण के लिए इस नेशनल लोक अदालत में रखा गया जिसमें 39 प्रकरणों का निराकरण हुआ उक्त प्रकरणों में लगभग 1472294 /- रूपये की राशि का अवार्ड पारित किया गया है। इस नेशनल लोक अदालत में “टूटता परिवार हुआ एक “आवेदिका “क” का विवाह अनावेदक ” ख के साथ दिनांक 07.07.2021 को हिन्दू रीति रिवाज के साथ संपन्न हुआ था। शादी के बाद अनावेदक, आवेदिका के चरित्र पर शंका करता था और उसके साथ मारपीट गाली गलौच करता था जिसके कारण आवेदिका अपने मायके आकर रहने लगी। आवेदिका द्वारा माननीय कुटुम्ब न्यायालय प्रधान न्यायाधीश बालोद गिरिजादेवी मेरावी के समक्ष धारा 125 द.प्र.सं के अंतर्गत भरण पोषण ” का आवेदन पेश किया । उक्त प्रकरण को इस नेशनल लोक अदालत में रखा गया जहां खण्डपीठ के पीठासीन अधिकारी गिरिजादेवी मेरावी जी व सुलहकर्ता सदस्यों द्वारा आवेदिका एवं अनावेदक को समझाया कि वे अपने आपसी मतभेद और विवाद को भूलकर पुनः अपना दाम्पत्य जीवन स्थापित करे । उक्त समझाईश देने पर दोनों पति पत्नी एक साथ रहने के लिए तैयार हो गये । पीठासीन अधिकारी श्रीमती गिरिजादेवी मेरावी जी के द्वारा पति पत्नी को भेट स्वरूप पौधा प्रदान कर उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। मामला माननीय न्यायालय के समक्ष पेश हुआ तो उन्हें न्यायाधीश एवं अधिवक्तागण द्वारा सौहार्द्रपूर्ण समझौता का सुझाव देते हुएउनके मध्य सुलह की कोशिश की गई। जिसके पश्चात् यह पाया गया कि प्रार्थियां एवं अभियुक्तगण एक ही मोहल्ले में रहते है और उनके बीच आपसी प्रेम, घनिष्टता एवं पारिवारिक संबंध है एवं इससे पहले इस प्रकार का कोई विवाद उनके मध्य नहीं हुआ था जिससे उक्त मामले का निराकरण नेशनल लोक अदालत जिला बालोद के माध्यम से की गई साथ ही आपसी मन मुटाव, द्वेष व लड़ाई झगड़े को खत्म कर राजीनामा माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय श्रेणी के समक्ष किया गया। ऐसा करके अपने नेशल लोक अदालत के उद्देष्य को पूर्ण किया है एवं आपने मानवता का परिचय दिया है। इस नेशनल लोक अदालत में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा मोबाईल वेन की व्यवस्था रखी गई थी जिसके माध्यम से ऐसे पक्षकार जो किसी कारणवश लोक अदालत के दिन न्यायालय में आने में असमर्थ है उनके घर जाकर वर्चुअल माध्यम से राजीनामा की कार्यवाही संबंधित खण्डपीठ के निर्देशानुसार किया गया,जिसमें माननीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीमती श्यामवती मराबी के न्यायालय का एक प्रकरण आया जो कि ग्राम नेवारीकला के निवासियों का था जिसमें मोबाईल वेन के माध्यम से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पैनल अधिवक्ता श्री पंकज राजपूत एवं पैरालिगल वालिंटियर द्वारा मौके पर जाकर राजीनामा की कार्यवाही माननीय खण्डपीठ के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया ।