शहर के छोटे राजीवलोचन मंदिर में आयोजित भागवत कथा में हुआ रुक्मणी विवाह

भागवत कथा मृत्यु के भय से छुटकारा दिलाती है: पं. कन्हैया महाराज


राजिम :- शहर के छोटे राजीवलोचन मंदिर में चल रहे श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह के छठवें दिन प्रवचनकर्ता पंडित कन्हैया तिवारी ने कालयवन की कथा को शानदार ढंग से रखा। उन्होंने कहा कि कालयवन एक यवन सम्राट था मलेच्छ देश पर शासन करता था वह कृष्ण को अपना शत्रु मानता था। एक बार कृष्ण को ही मारने के लिए उनका पीछा किया दौड़ते दौड़ते एक गुफा में घुस गया। उनका पीछा करते हुए कालयवन भी गुफा में चला गया वहां राजा मुचकुंद सो रहा था। उन्होंने सोने का वरदान प्राप्त किया था। कृष्ण को ढूंढते ढूंढते कालयवन जैसे ही मुचकुंद के पास पहुंचा कृष्ण ने चला कि करते हुए अपने कपड़े को मुचकुंद को ओढ़ा दिया। धोखे में कालयवन राजा मुचकुंद को पैर से 3 बार मारा इससे उनकी नींद टूट गई और क्रोधित होकर कालयवन की तरह आंखें खोली। उनकी आंखों के तेज से कालयवन तुरंत जलकर समाप्त हो गया। इस तरह से भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें अपने धाम में स्थान प्रदान किया। उन्होंने रुक्मणी विवाह प्रसंग पर 16107 रानियों के साथ हुए विवाह प्रसंग पर व्याख्यान दिया तथा उनकी झांकी भी दिखाई गई। छोटे-छोटे बच्चों ने रुकमणी कृष्ण का वेश धारण किया था। विवाह संस्कार पर टिकावन भी प्रदान किया गया। पंडित कन्हैया महाराज ने पर्यावरण की शुद्धता पर फोकस करते हुए कहा कि वर्तमान समय में पेड़ के महत्व को जानना बहुत जरूरी है। द्वापर युग में जंगलों की अधिकता थी। शुद्ध वातावरण के कारण लोग हिस्ट पुष्ट होते थे। लगातार कट रहे पेड़ पौधों के कारण तरह-तरह की बीमारियों ने जकड़ लिया है इस से मुक्ति पाने के लिए ज्यादा से ज्यादा संख्या में पेड़ पौधे लगाने की आवश्यकता है ताकि वातावरण की शुद्धता बनी रहे। पंडित जी ने आगे कहा कि भागवत कथा मोक्ष का द्वार है। नौ प्रकार की भक्ति बताई गई है जिनमें से एक श्रवण है। भगवान की कथा सुनना भक्ति है जिसे महाराज परीक्षित ने पूर्ण किया। लगातार 7 दिनों तक कथा सुनने के बाद उन्हें खुद मृत्यु का भय नहीं रहा। भागवत कथा मृत्यु के भय से छुटकारा दिलाने का काम करती है। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रोतागण मौजूद थे।