बाल विवाह रोकने लगातार की जा रही कार्यवाही ।

गरियाबंद। बाल संरक्षण समिति से प्राप्त सूचना के आधार पर महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यक्रम अधिकारी श्री अशोक पाण्डेय के मार्गदर्शन व जिला बाल संरक्षण अधिकारी श्री अनिल द्विवेदी के निगरानी में जिला बाल संरक्षण इकाई से श्री यशवंत ध्रुव (आउटरीच वर्कर) एवं चाईल्ड लाईन 1098 से श्री धनीराम बरेठ (टीम मेंबर) एवं देवभोग पुलिस के द्वारा बाल विवाह स्थल पर पहुंचकर पूछताछ कर पांचवी के अंकसूची अनुसार बालक के आयु का सत्यापन किया गया। बाल संरक्षण समिति के माध्यम से दूरभाष में सूचना प्राप्त हुई कि देवभोग विकासखण्ड के ग्राम पंचायत चिचिया में एक बाल विवाह होने की तैयारी चल रही है। जहां जिला बाल संरक्षण इकाई (मबावि) एवं चाईल्ड लाईन की संयुक्त टीम द्वारा घटना स्थल पर पहुंच कर बालक की आयु संबंधी दस्तावेज अंक सूची के आधार पर बालक की आयु सत्यापन किया गया, जिसमें बालक की आयु 17 वर्ष 03 माह होना पाया गया। 18 जनवरी को बारात प्रस्थान से पूर्व सूचना प्राप्त होते ही तत्काल कार्यवाही करते हुये बारात को रोका गया। विवाह के लिये बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के अनुसार बालिका की आयु 18 वर्ष एवं लड़के की आयु 21 वर्ष पूर्ण होना अनिवार्य है। निर्धारित आयु से कम आयु में महिला / पुरुष का विवाह करने या करवाने की स्थिति में सम्मिलित व सहयोगी सभी लोग अपराध की श्रेणी में आते है। जिन्हें 02 वर्ष तक का कठोर कारावास एवं 01 लाख रुपये का जुर्माना अथवा दोनों से दण्डित किया जाने का प्रावधान है। जिला बाल संरक्षण इकाई की टीम द्वारा अग्रिम कार्यवाही करते हुए बालक उसके माता पिता व परिवार वालों एवं ग्रामीण जनों को समझाइश दिया कि बालक की आयु 21 वर्ष पूर्ण होने पश्चात ही विवाह करें। सभी लोग बाल विवाह रोकथाम टीम की समझाइश पर सहमति जताई। फलस्वरूप बालक एवं उसके माता-पिता को बाल कल्याण समिति, गरियाबंद में प्रस्तुत होने को कहा गया है। टीम द्वारा उपस्थित ग्रामीण जनों से आग्रह किया कि निर्धारित आयु सीमा के पश्चात् ही विवाह करें। जिससे बालक-बालिका के शिक्षा, स्वास्थ्य, कुपोषण, परिवार नियोजन आदि में बेहतर सुधार में योगदान दिया जा सके।