नगरपालिका चुनाव का शोर शराबा थमा प्रत्याशी घर घर देने लगे दस्तक, चुनाव बना दोनों दलों के लिए प्रतिष्ठा, कई वार्डों में कांटे का मुकाबला
मतदाताओं की खामोशी क्या गुल खिलाएगी, असमंजस के बावजूद दोनों दलों के नेता कर रहे हैं अपनी अपनी जीत का दावा 
तिलक माथुर
केकड़ी_राजस्थान
नगरपालिका चुनाव अपने अंतिम पड़ाव पर है चुनाव प्रचार का शोर शराबा थम गया है, उम्मीदवारों ने घर घर दस्तक देना शुरू कर दिया है। दोनों दलों के नेताओं के बीच जुबानी जंग थम गई लेकिन दोनों ओर जुबानी जंग की टीस अब भी बरकरार है। कांग्रेस के दिग्गज चुनावी हवा का रुख अपनी ओर करने की जी तोड़ कोशिश कर रहे हैं वहीं भाजपा भी कोई कसर नहीं छोड़ रही है। क्षेत्रीय विधायक व राज्य के चिकित्सा मंत्री डॉ रघु शर्मा जहां अलग-अलग विभिन्न समाज, संगठनों व वर्गों की बैठकें लेकर चुनाव का रुख कांग्रेस की ओर करने की कवायद में जुटे हैं वहीं युवा नेता सागर शर्मा व ब्लॉक अध्यक्ष शैलेन्द्र सिंह शक्तावत अपनी टीम के साथ शहर के विभिन्न वार्डों का दौरा कर मतदाताओं से सम्पर्क कर हवा का रुख कांग्रेस के पक्ष में करने की जद्दोजहद कर रहे हैं। उधर भाजपा के चुनाव संयोजक अनिल मित्तल व उनकी टीम ने अपनी पूरी ताकत वार्डों में झोंक रखी है। मित्तल के नेतृत्व में भाजपा का चुनावी मैनेजमेंट कहीं कमजोर दिखाई नहीं दे रहा, वह मजबूती के साथ दम ठोक रहा है। भाजपा ने पांच-पांच वार्डों में अपने क्षेत्रीय व स्थानीय नेताओं को बागडोर सम्भलाई है जो पूरे दमखम के साथ उम्मीदवारों की मदद कर रहे हैं। केकड़ी शहर लंबे समय से भाजपा का गढ़ माना जाता रहा है जिसे लेकर भाजपाई अपनी जीत के प्रति आशान्वित हैं। हालांकि चुनाव में भाजपा के पास कोई बड़ा मुद्दा नहीं उसके उपरांत भी वह कांग्रेस की विफलताएं गिनाकर वोट मांग रही है। उधर कांग्रेस विकास के मुद्दे को लेकर चुनाव मैदान में है। कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में शहर के सौंदर्यीकरण व मूलभूत आवश्यकताओं व सुविधाओं के बड़े बड़े वादे किए हैं। दोनों दलों के नेता अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। एक ओर जहां भाजपा लगातार तीसरी बार अपना बोर्ड बनाने का दावा कर रही है वहीं दूसरी ओर कांग्रेस भाजपा की परंपरा को तोड़ने और विकास के बलबूते अपना बोर्ड बनाने का दावा कर रही है।दोनों दलों के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा बन गया है। चुनाव के अंतिम दौर तक मतदाता शांत हैं, मतदाताओं की खामोशी क्या गुल खिलाएगी यह तो चुनाव परिणाम ही बताएंगे लेकिन यह तय है कि चुनाव परिणाम इस बार चोंकाने वाले होंगे। इस बार भी कई वार्डों में जातिवाद हावी होता दिखाई दे रहा है, हालांकि दोनों दलों ने टिकट वितरण में जातिगत समीकरण का विशेष ध्यान रखा है। कांग्रेस की ओर से टिकट वितरण में सावधानी बरती गई थी उसके बावजूद कुछेक सीटें उसके लिए घातक साबित हो रही है यही हाल भाजपा का है टिकट वितरण के दौरान भाजपा की गुटबाजी उसे नुकसान पहुंचा रही है। अधिकांश वार्डों में मुकाबला कांटे की टक्कर का बन चुका है वहीं कुछ वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी दोनों दलों का समीकरण बिगाड़ रहे हैं ऐसे में चुनाव परिणाम कुछ भी हो सकते हैं, कई वार्डों की स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है। जिन वार्डों में कांग्रेस की बहुत अच्छी स्थिति मानी जा रही थी उन वार्डों में भाजपा ने अपनी स्थिति सुधारी है जिसकी वजह से मुकाबला टक्कर का हो गया है। चुनाव के अंतिम दौर में दोनों दलों के प्रत्याशियों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है वहीं निर्दलीय भी दम ठोक रहे हैं। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि अगर मतदाताओं ने कांग्रेस के विकास के मुद्दे पर भरोसा दिखाया तो कांग्रेस का बोर्ड बनेगा वहीं मतदाताओं ने अगर अपनी परम्परा को बरकरार रखा तो भाजपा का बोर्ड बनेगा। यूं तो केकड़ी शहर को भाजपा का गढ़ माना जाता रहा है, लेकिन इस बार कांग्रेस ने इसे भेदने की रणनीति बनाई है अब उसे कितनी सफलता मिलती है यह तो चुनाव परिणाम बताएंगे। बहरहाल चुनाव में दोनों ओर से मतदाताओं की खातिरदारी व उन्हें आकर्षित करने में कोई कमी नहीं रखी जा रही। मतदाता भी दोनों तरफ से खातिरदारी का पूरा लुत्फ उठा रहे हैं। मतदान में मात्र एक दिन का समय बचा है, इस एक दिन में कौन कितनी दौड़ लगाता है यह देखना है।
