भ्रष्टाचार – फिंगेश्वर जलसंसाधन विभाग की बड़ी लापरवाही, किसान हितैषी कार्यों में जमकर मनमानी किसानों के हितों के लिए हो रहे कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं किया जाएगा:सांसद चुन्नीलाल साहू अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत से चल रहा है सरकडा में गुणवत्ताहीन निर्माण सामाग्री से नहर लाइनिंग का कार्य निर्माण कार्य में बालश्रमिकों से लेे रहा है काम

भ्रष्टाचार – फिंगेश्वर जलसंसाधन विभाग की बड़ी लापरवाही,
किसान हितैषी कार्यों में जमकर मनमानी

किसानों के हितों के लिए हो रहे कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं किया जाएगा:सांसद चुन्नीलाल साहू
अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत से चल रहा है सरकडा में गुणवत्ताहीन निर्माण सामाग्री से नहर लाइनिंग का कार्य

निर्माण कार्य में
बालश्रमिकों से लेे रहा है काम

परमेश्वर कुमार साहू, संभाग ब्यूरो,20 जनवरी 2021

सरकार ने किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए नहर नाली जैसे विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए करोड़ों रुपए की राशि खर्च कर रहे। ताकि किसान आसानी से अपने खेतों और फसलों तक सिंचाई के लिए पानी ले जा सके। लेकिन किसानों के लिए बनाई जा रही निर्माण कार्यों का क्या हश्र है ? जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी व क्रियान्वयन एजेंसी जमीनी स्तर पर अपने कार्यों को क्या ईमानदारी से निभा रहा है? यह सवाल जल संसाधन विभाग के कारनामो को देख कर उठने लगा है। और सवाल इसलिए क्योंकि किसानों के हित के लिए बन रहे इस महत्वपूर्ण कार्य को देखने वाला कोई नहीं ।जिसके कारण विभाग के अधिकारी ठेकेदार के साथ सांठ गांठ कर गुणवत्ताहीन निर्माण सामग्री का इस्तेमाल कर शासन की राशि को डकारने में लगे हैं ।लिहाजा सरकार की किसान हितैषी महत्वपूर्ण कार्य भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा है। सरकार की ना खाऊंगा और ना खाने दूंगा कि नीति जल संसाधन विभाग फिंगेश्वर में उनके उलट नजर आ रहा है। जिसके कारण बड़ा काम और बड़े कमीशन का खेल इन दिनों जल संसाधन विभाग फिंगेश्वर में विभाग के अधिकारी और ठेकेदार मिलकर खूब खेल रहे हैं ‌।

गौरतलब है कि गरियाबंद जिले के फिंगेश्वर जल संसाधन विभाग अंतर्गत सरकडा जलाशय में नहर नाली लाइनिंग निर्माण कार्य चल रहा है ।जिसके लिए शासन द्वारा करोड़ों रुपए की राशि स्वीकृत हुई है उक्त निर्माण कार्य को रमेश अग्रवाल को विभाग द्वारा टेंडर दिया गया है। लेकिन जल संसाधन विभाग फिंगेश्वर के जिम्मेदार अधिकारी एसडीओ अरुण कुमार साहू और सब इंजीनियर कुलेश्वर जोशी की एक बड़ी लापरवाही उजागर हो रही है ।विभाग के अधिकारियों द्वारा जानबूझकर कमीशन के चक्कर में सारे नियमों को ताक में रखकर घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल करवा कर शासन को करोड़ों रुपए का चूना लगाने में लगे हैं और सारे नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए शासन को ठेंगा दिखा रहे हैं। नहर लाइनिंग कार्य में निम्न स्तर और थर्ड क्लास का मटेरियल इस्तेमाल कर थूक पॉलिश का गोरखधंधा जिम्मेदारों द्वारा किया जा रहा है। जिसके कारण निर्माण कार्य अभी से ही टूटने और उखड़ने लगा है । निर्माण कार्य में स्टीमेट को दरकिनार कर जिम्मेदार खुलेआम अपनी मनमानी करने में लगे है। मनमानी इस कदर है की ड्रेसिंग के नाम पर मुरूम के जगह मिट्टियुक्त मुरूम को डाला जा रहा है । तो वहीं इस निर्माण कार्य को देखने वाला एक भी कर्मचारी निर्माण स्थल पर नहीं।कुल मिलाकर भ्रष्टाचार करने की नियत से जिम्मेदार अधिकारी और ठेकेदार जानबूझकर निर्माण कार्य में लीपापोती कर रहे है।

बताना लाजमी है कि नहर लाइनिंग कार्य में स्लीपर जो नीचे हिस्से में बिम्ब कि तरह ऊपर बेसिंग को मजबूती प्रदान करने का कार्य करता है उसे स्टीमेट के सारे नियमो के उलट बनाया जा रहा है ।जिसमें गुणवत्ताहीन मटेरियल का इस्तेमाल किया का रहा है । ऐसे में नहर लाइनिंग के मजबूती और टिकाऊ पर सवाल खड़ा कर रहा है ।उक्त निर्माण कार्य में काम करने वाले मजदूरों ने खुद स्वीकार किया कि निर्माण कार्य में कमजोर मटेरियल का इस्तेमाल हो रहा है और मजदूरों ने कहा हम लोग तो मजदूर आदमी जैसे ठेकेदार और साहब लोग बोलेंगे उतना ही डाल रहे है।

बालश्रमिकों से विभाग करवा रहा है काम

किसी भी कार्यों में बाल श्रमिको को काम न करवाने कि नियम को विभाग खुलेआम ठेंगा दिखाते हुए अपने कार्य में बाल श्रमिको से काम ले रहा है।शासन के कार्यों में बाल श्रमिको को काम करवाना विभाग की एक बड़ी उदासीन रवैया को दर्शा रहा है ।वहीं निर्माण कार्य स्थल में सूचना बोर्ड भी नहीं लगाया गया है ।जबकि निर्माण कार्य स्थल पर सूचना बोर्ड लगाने शासन सख्त निर्देश है ।

वहीं विभाग के सब इंजीनियर कुलेश्वर जोशी से जब इस मामले को लेकर संपर्क किया गया तो क्या कहा ,आपको उनकी ही जुबानी बता रहे है
मै एक चीज बोलता हूं। आप खराब मटेरियल किस आधार पर कह रहे हो।आपके पास स्टीमेट है और आपको क्या क्या काम होना है मै क्यों बताऊं।आप इंजीनियर नहीं हो जो काम को गुणवत्ताहीन बोलो।कमजोर मटेरियल बोलने से हो जाएगा क्या आपके दावा करने से थोड़ी होता है।आप तो बहस ऐसी कर रहे हो जैसे आप इंजीनियर हो।और रही बात जिम्मेदारी कि तो मुझे मत सिखावो मुझे पता है ।ठेकेदार जब टूटेगा तब बनाएगा ।ठेकेदार 10 बार बनाएगा तो इसमें मनमानी कैसे।आप एक्स्पर्ट आदमी हो क्या जो काम को स्तरहीन बोल रहे हो।काम में कोई मनमानी नहीं है और न ही कोई स्तरहिन काम हो रहा है ।ठेकेदार अच्छा काम कर रहा है।
तो वहीं जिम्मेदार अधिकारी एसडीओ अरुण साहू ने भी सब इंजनियर की तरह ही जवाब देते हुए ठेकेदार के काम को नंबर वन बताते हुए मामले में पल्ला झाड़ रहे है और गोलमोल जवाब दे रहे है।सूत्र बताते है कि सब इंजीनियर जोशी ने वकालत कि भी पढ़ाई किए है ।जिसके कारण साहब इंजनियरिंग कम और मामले में वकालत ज्यादा कर रहे है।साहब कह रहे है कि ठेकेदार बढ़िया काम काम कर रहा है ।तो क्या साहब केवल पुस्तकी ज्ञान बस ही अर्जित किए है प्रेक्टिकल किए ही नहीं ऐसा लगता है ।जिसके कारण इंजीनियर जोशी थर्ड क्लास के कार्य को एक नम्बर का काम बता रहे है। क्या सब इंजीनियर जोशी केवल इंजीनियर की डिग्री तक ही सीमित है तभी तो किसानों के महत्वपूर्ण कार्यों में भी लीपापोती करने से भी गुरेज नहीं कर रहे है। ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे इन अधिकारियों को शासन के किसी भी नियम ,कायदे कानून का डर नहीं है ।जिसके कारण खुलेआम लापरवाही दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे है।आखिर इन लापरवाह अधिकारियों को संरक्षण कौन दे रहा है जिसके चलते इनके हौसले इतने बुलंद है , कही उच्च अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के सह पर ही तो नहीं हो रहा है सरकडा नहर लाइनिंग में लीपापोती का खेल ,ये सबसे बड़ा सवाल है।लेकिन इतना तो जरूर विभाग के अधिकारियों की भ्रष्ट नीतियों की वजह से सबसे ज्यादा नुकसान किसानों का होगा जो बाद में सामने उभरकर आएगा।क्योंकि विभाग द्वारा निम्न स्तर बनाया जा रहा नहर लाइनिंग कार्य जल्द ही टूट और उखड़ जाएगा।लेकिन जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारियों को निर्वहन में बड़ी लापरवाही कर रहे है।आखिर सरकार इन अधिकारियों वेतन और सारी सुविधाएं किस लिए देता है ये समझ से परे है ।

वहीं इस मामले को लेकर महासमुंद सांसद चुन्नीलाल साहू ने कड़े शब्दों में साफ कहा कि किसानों के हितों में हो रहे महत्वपूर्ण कार्य में लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।मै दौरा कर उन जगहों का खुद निरीक्षण करूंगा।