चारागाह की भूमि पर प्रशासन का कब्जा ग्रामीणों ने लगाई जनहित याचिका । 04 करोड़ 50 की लागत से होना है आदर्श कन्या छात्रावास का निर्माण ।

पखांजुर-बिप्लब् कुण्डू-7 जनवरी 21

चारागाह की भूमि पर प्रशासन का कब्जा ग्रामीणों ने लगाई जनहित याचिका ।
04 करोड़ 50 की लागत से होना है आदर्श कन्या छात्रावास का निर्माण ।

छत्तीसगढ़ सरकार शिक्षा को बढावा देने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर करोड़ों का बजट शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिवर्ष खर्च कर रही है मांग के अनुरूप नये स्कुल छात्रावासों का निर्माण भी कराया जा रहा है खासकर प्रदेश के नक्सल प्रभावित इलाकों में शिक्षा के प्रचार प्रसार में खासा ध्यान दिया जा रहा है ताकि नक्सल प्रभावित इलाकों में आदिवासी बच्चे शिक्षित हो और नक्सलवाद से ना जुड़ पाए और नक्सलवाद बस्तर से हमेशा के लिए खत्म हो विकास के नई इबारत लिखी जा सके….लेकिन कांकेर जिले में शिक्षा जगत की भ्रष्ट अधिकारी कर्मचारियों ने ऐसी तस्वीर बनाई है की हवालात के दरवाजे खुल जेल यात्रा तक अफसर बाबू और सप्लायरों कर चुके है….शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कांकेर जिले में करोड़ों की लागत से बनने वाला छात्रावास शुरुवाती दौर से ही विवादित रहा है ।
चाहे निविदा आमन्त्रण हो या छात्रावास निर्माण के भूमि अधिग्रहण का मामला हो….विवाद इस कदर बढा की ग्रामीणों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने से भी परहेज नहीं किया….जिले के चारामा ब्लाक के ग्राम कानापोड़ में करोड़ो की लागत से बन रहे दो मंजिला १०० सीटर आदर्श कन्या छात्रावास के निर्माण में एक बार फिर से ग्रहण लगता नजर आ रहा है….०४ करोड़ ५० लाख की लागत से निर्मित होने वाले सर्व सुविधायुक्त आदर्श कन्या छात्रावास के निर्माण में ग्रामीणों ने आपति जता हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर किया है जिस पर हाईकोर्ट ने ०६ जनवरी तक निर्माण कार्य बंद रखने का आदेश कर जवाब प्रस्तुत करने को निर्देशित किया है….करोडों की लागत से बनने वाले आदर्श कन्या छात्रावास निर्माण का विवाद कोई नया नहीं है जब विवाद देखा जा रहा है इसके पूर्व भी चहेते ठेकेदार को ठेका देने के लिए निविदा के नियम शर्तों में आंशिक संशोधन कर काम देने का भी आरोप लग सरकार की किरकिरी हो चुकी है….आदर्श कन्या छात्रावास निर्माण को लेकर न्यायालय पहुचे ग्रामवासियों ने इस पुरे मसले पर बताते है की जिस खसरा नंबर की पर आदर्श कन्या छात्रावास निर्माण किया जा रहा वह भूमि ग्राम की चारागाह की भूमि है जिसमें गाँव के ५०० मवेशियों के लिए ग्रामवासियों ने सुरक्षित रखा था लेकिन बंदोबस्त त्रुटि की वजह से उक्त भूमि को शाला प्रबन्धन का दस्तावेजों में बता बिना पंचायत प्रस्ताव और ग्रामसभा सहमति के बगैर कब्जा कर आनन-फानन में आदर्श कन्या छात्रावास निर्माण प्रारंभ कर दिया गया….छात्रावास निर्माण से पहले ही ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर सहित मंत्री नेताओं का अपनी फरियाद कर चुके थे लेकिन उनके फरियाद में किसने कोई पहल नहीं की और निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया….जिसके बाद ग्रामीणों ने मामले के निबटारे के लिए एकमत हो हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर किया गया ।
जिस माननीय उच्चत्तम ने ०६ जनवरी तक उक्त आदर्श कन्या छात्रावास निर्माण बंद कर जवाब प्रस्तुत करने को निर्देशित किया है….ग्रामीण आगे इस मसले पर कहते है की एक ओर तो सरकार नरवा गरवा घुरवा बाडी योजना बनाकर पशुपालन को बढ़ावा दे रही है वही दुसरी और चारागाह की भूमि में बिना सहमति के कब्जा कर छात्रावास निर्माण कर रही है जो सरासर गलत है….आदर्श कन्या छात्रावास निर्माण से किसी ग्रामवासियों को कोई आपत्ति नहीं है बल्कि ग्रामीणों ने बकायदा चारागाह भूमि के बदले अन्य स्थान पर ०५ एकड़ जमीन देने का भी ग्रामीणों ने सहमति दे दिया था….लेकिन चारागाह की भूमि पर इस तरह निर्माण करने पर आपत्ति है….करोड़ों की लागत से बन रहे आदर्श कन्या छात्रावास के निर्माण पर ग्रामवासी सवाल उठा आरोप लगाते है कन्या छात्रावास का निर्माण निर्माण एजेंसी कौन है।
….कितनी लागत से निर्माण होने सहित कार्ययोजना की कोई सुचना पटल तक नहीं है साथ डिजाइन में परिवर्तन कर दिया गया है जो भ्रष्टाचार को दर्शाता….वे चारागाह की जमीन को बचाने के लिए आगे भी कानूनी लड़ाई लड़ने का दावा करते है….ऐसे में सवाल उठना लाजमी है की ग्रामीणों और शासन प्रशासन के बीच चल रहे रस्साकशी में ०६ महीने के भीतर दो मंजिला १०० सीटर आदर्श कन्या छात्रावास निर्माण कब तक पूरा हो पायेगा ये भी एक बड़ा सवाल है