पखांजुर, बंगाली मिठाई दुकान में बनती है खजूर गुड़ के रसगुल्ले…

पखांजुर में खजूर गुड़ का व्यवसाय कर बंगबंधु लाभान्वित हो रहे । परलकोट में शीत का आगमन और खजुर के मीठे रसपान की शौक इन दिनों लोगो में देखी जा रही । खजूर के मीठे रस को लोग तरल पदार्थ के रूप में सेवन कर स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रहे है । कहते है कि इसके सेवन से पाचन शक्ति में वृद्धि होती है। वहीं बंग बंधु इस व्यवसाय से जुड़कर पटाली गुड बनाकर अच्छी आमदनी कर रहे है । विदित हों की परलकोट के कई गांवों में बंगबंधु खजूर रस संचय कर गुड़ बनाने की कला में निपुण है । यह व्यवसाय बंग बंधुओ के लिए मुनाफे का सौदा साबित होता है। यह एक ऐसा व्यवसाय है जिसे पुरुष और महिला दोनों सहभागिता में अतिरिक्त आय कमाने का माध्यम बना लिया है।

गन्ने की रस से गुड बनाने कि भांति ही बंगबंधु खजूर पेड़ से रस निकाल कर पटाली गुड़ बनाकर उसे बाजारों में बेचते है जिससे उनके घर का खर्चा चला पाने में बड़ी आसानी होती है। विदित हो कि बंग बंधु खजूर गुड़ को कटोरी का आकार रूप देकर अन्य राज्य में भी निर्यात कर अच्छी आमदनी अर्जित कर रहे है। खजूर गुड़ से बनी मिठाई की भारी मांग बाजारों में रहती है। परलकोट अंचल के गुड़ व्यापारी से मिठाई दुकानदार भारी मात्रा में गुड़ स्टॉक करते है। उस गुड़ से तरह -तरह की मिठाईयां बनाई जाती है जैसे खजूर गुड़ के रसगुल्ले , मीठे चाशनी व पेडे , बंगाली घरों में खीर (पायेस) बनाने में चक्कर के जगह खजूर गुड़ का इस्तमाल किया जाता है जो बहुत ही स्वादिष्ट होता है दिसंबर से खजूर का गुड बनाने बंग बधू जुट जाते है.

ठंड के मौसम के शुरुवाती दिनों से ही गुड़ बनाने के व्यवसाय से जुड़ जाते है। जानकारी के लिए बता दे की शीत काल में यह व्यवसाय अतरिक्त आमदनी का जरिया होता है इस व्यवसाय से जुड़कर लोग लाभान्वित हो रहे है। प्रात: काल में बंगबंधु खजूर रस प्रति एक गिलास 10 रुपए की दर से बिक्री करते है जिसे ग्रामीण तरल पेय के रूप में सेवन करते है। वहीं पटाली गुड को 250 रुपए, दाना गुड़ की 150 रूपए, झोला गुड़ 120 रुपए प्रति किलो की दर से बेचा जाता है।
क्या है मीठा रस:- खजूर का मीठा रस के बारे में बता दे कि बंग बंधु इस रस को पाने के लिए कड़ी मेहनत करते है।

खजूर पेड़ से कटिले पत्तो को काट दिया जाता है। खजूर पेड़ के शीर्ष में पहुचकर तेजधारनुमा चाकू से व्ही आकार के फाइल को रस टपकने जैसा बनाते है। धीरे धीरे रस की धार उस फ़ाइल से निकलकर संचय के लिए रखी मिट्टी की हांडी में जाकर जमा होने लगती है प्रातःकाल तक हांडी रस से भर जाती है और उसे सूर्योदय के पहले निकाल लिया जाता है। बदली मौसम होने पर रस पीने योग्य नहीं होती और गुड़ भी अच्छी नहीं बनती इसलिए बंगबंधु मौसम की मिजाज को भांपकर खजूर पेड़ से रस पाने ( फ़ाइल ) बनाते है। मीठा रस पाने के लिए साफ मौसम का होना जरूरी होता है । परलकोट से बड़े शहरों में गुड़ निर्यात किया जाता है । छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्य जैसे – कोलकाता ,महाराष्ट्र ( चंद्रपुर) ,दिल्ली जैसे बड़े राज्यो मे निवासरत बंग बंधुओ में गुड़ की भारी डिमांड देखी जाती है।