रार नहीं मानूंगा हार नहीं ठानूंगा, वाजपेई की जयंती के अवसर पर जिला रत्नाचल साहित्य परिषद ने किया ऑनलाइन साहित्यिक संगोष्ठी।

राजिम, सन 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के साथ छत्तीसगढ़ियों की किस्मत में चार चांद लग गई। अटल जी ने ना सिर्फ राज्य निर्माण किया बल्कि इनको उंगली पकड़कर चलाने में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उक्त बातें जिला रत्नांचल साहित्य परिषद गरियाबंद द्वारा भारत के पूर्व प्रधानमंत्री एवं कवि हृदय अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर आयोजित ऑनलाइन साहित्यिक संगोष्ठी में लेखक पुरुषोत्तम चक्रधारी ने कही। उन्होंने बताया कि कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता, जनसंचार विश्वविद्यालय रायपुर, तकनीकी विश्वविद्यालय, सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय बिलासपुर, 1980 मेगावाट क्षमता की विशाल सुपर थर्मल बिजली घर की बुनियाद आदि की स्थापना में वाजपेयी जी के नाम को कभी भुलाया नहीं जा सकता। खुटेरी के साहित्यकार वेदप्रकाश नागरची अपने लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ने की कला अटल जी से सीखना जरूरी है उन्होंने असफलता पर कभी निराश नहीं हुआ और सकारात्मक ऊर्जा के साथ गति को निरंतर जारी रखा। उनकी प्रसिद्ध कविता हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा, काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूं, गीत नया गाता हूं गीत नया गाता हूं।

हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। फिंगेश्वर के व्याख्याकार थानुराम निषाद ने कहा कि युगों युगों में ऐसे राष्ट्रभक्त का जन्म होता है जो अपना पूरा जीवन देश हित में समर्पित करके हर बार यही कहता है जब भी मेरा जन्म हो हर बार भारत भूमि मिले। अटल जी ऐसे राजनेता थे जिनका सभी दल के नेता बराबर रूप से सम्मान एवं आदर देते थे। सब के दिलों में जगह बनाना अटल की सूझबूझ थी। कोपरा के फनेंद्र साहू मोदी ने कहा कि 25 दिसंबर सन 1924 को पिता पंडित कृष्ण बिहारी एवं माता कृष्णा बिहारी की गोद में ग्वालियर की धरती पर राष्ट्रपुरुष, युगदृष्टा, जननायक पुत्र का अवतरण हुआ। जिन्होंने आजीवन अविवाहित रहते हुए राष्ट्र सेवा में अपने आप को समर्पित कर दिया। छात्र जीवन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य बने और यही बालक आगे चलकर डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी एवं पंडित दीनदयाल उपाध्याय के सानिध्य में राजनीति के गुर सीखें। वह कुशल राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ प्रखर वक्ता एवं कवि हृदय थे तथा सुप्रसिद्ध काव्य संग्रह मेरी इनकावन कविताएं थी। प्रयाग साहित्य समिति के अध्यक्ष टीकमचंद सेन ने कहा कि उन्होंने पोखरण में परमाणु परीक्षण कर विश्व में भारत का कद बढ़ा दिया।

कारगिल विजय सहित कारीडोर परियोजना सहित अनेक देश हित के कार्य हमेशा स्मरण रहेगा। राजेश साहू राज ने बताया कि सन 1993 में कानपुर विश्वविद्यालय द्वारा दर्शनशास्त्र में पीएचडी की मानद उपाधि प्राप्त किया। 18 वर्ष की उम्र में सन् 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने के कारण जेल गए तथा 1951 में गठित राजनीतिक दल भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य थे। वाजपेयी जी राष्ट्रधर्म मासिक पंचजन्य, सप्ताहिक स्वदेश, दैनिक और वीर अर्जुन जैसे पत्र-पत्रिकाओं का संपादन भी किया। उन्हें पद्मभूषण, लोकमान्य तिलक अवार्ड, बेस्ट सांसद अवार्ड, पंडित गोविंद बल्लभ पंत अवॉर्ड, तथा भारत के सबसे बड़े सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया। पटल प्रभारी कवि एवं साहित्यकार संतोष कुमार सोनकर मंडल ने बताया कि जिला रत्नांचल साहित्य परिषद के द्वारा लगातार साहित्यिक परिचर्चा, संगोष्ठी ऑनलाइन किया जा रहा है जिससे जिले में कवि एवं साहित्यकारों को लिखने पढ़ने व सुनने का मंच मिला हुआ है। लिखने वाले रचनाकारों की संख्या में इजाफा हुआ है तथा साहित्य प्रगाढ़ हुआ है