दशहरा अवकाश में भी शिक्षा के प्रति समर्पित खोमन गुरुजी, गृह-भ्रमण नवाचार से बच्चों की पढ़ाई को दे रहे नई दिशा

फिंगेश्वर :- सिर्रीखुर्द शिक्षा केवल विद्यालय की चारदीवारी तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए शिक्षक का समर्पण हर समय आवश्यक है। इसी भावना को साकार करते हुए प्राथमिक शाला सिर्रीखुर्द के सहायक शिक्षक खोमन लाल सिन्हा (खोमन गुरुजी) ने दशहरा अवकाश के दौरान विद्यार्थियों के घर पहुँचकर उनकी पढ़ाई-लिखाई की जानकारी ली तथा अभिभावकों से संवाद कर बच्चों की शैक्षिक प्रगति का जायजा लिया।

इस अभिनव पहल को “दशहरा अवकाश गृह-भ्रमण नवाचार” नाम दिया गया है। इसके अंतर्गत खोमन गुरुजी विद्यार्थियों के घर पहुँचकर उनकी अध्ययन गतिविधियों, गृहकार्य तथा पढ़ाई में रुचि की जानकारी ले रहे हैं। साथ ही अभिभावकों को बच्चों की नियमित पढ़ाई के प्रति जागरूक करते हुए घर में अध्ययन का सकारात्मक वातावरण बनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।इस पहल का मुख्य उद्देश्य दशहरा अवकाश के दौरान भी विद्यार्थियों का पढ़ाई से जुड़ाव बनाए रखना, नियमित अध्ययन की आदत विकसित करना तथा अभिभावकों की सहभागिता से बच्चों की शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार लाना है। गृह-भ्रमण से शिक्षक और अभिभावकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होता है, जिससे विद्यार्थियों की सीखने संबंधी कठिनाइयों को समझकर उनके समाधान के लिए प्रभावी प्रयास किए जा सकते हैं।खोमन गुरुजी का यह प्रयास संदेश देता है कि एक समर्पित शिक्षक की जिम्मेदारी केवल विद्यालय में पढ़ाने तक सीमित नहीं होती, बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी के घर तक पहुँचकर उसके उज्ज्वल भविष्य की राह प्रशस्त करना भी है। यह नवाचार शिक्षा के प्रति समर्पण, सामाजिक सहभागिता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल है।

“अवकाश हो या विद्यालय का समय, बच्चों की शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य के लिए शिक्षक का संकल्प सदैव जारी रहता है, तब कहीं बच्चों का सर्वांगीण विकास संभव है।