( पालिकाध्यक्ष बदलते गए पर साप्ताहिक बाजार को नहीं करवा पाए हाट बाजार में शिफ्ट )
( 10 सालों से व्यापारियों और ग्राहकों की राह ताक रहा 69 लाख का हाट बाजार )
किरंदुल – छत्तीसगढ़ राज्य की सबसे अमीर नगर पालिका में सुमार किरंदुल नगर पालिका में वाकई में सबसे अमीर नगर पालिका होने के संकेत नगर पालिका परिषद की स्थापना के समय से ही दिखाई देते नजर आए हैं जैसे कि बुजुर्गों की एक कहावत है कि नवजात शिशु के गुण उसके पालने में ही नज़र आ जाते हैं ।उस ही तरह का एक मामला किरंदुल पालिका क्षेत्र में करीबन 10 सालों पुराना है विदित हो कि किरंदुल के वार्ड नं 17 में गांधीनगर के समीप नगर पालिका द्वारा करीबन 10 सालों पूर्व लाखों रुपये की लागत से तैयार किए गए हाट बाजार को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। नगर पालिका की ओर से बाजार तैयार कर स्थानीय व्यापारियों और आम नागरिकों को व्यवस्थित बाजार की सुविधा उपलब्ध कराने का उद्देश्य रखा गया था, लेकिन इसके नियमित और प्रभावी संचालन को लेकर अब तक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नजर नहीं आ रही है।उल्लेखनीय हैं कि नगर पालिका द्वारा तैयार किए गए इस हाट बाजार में बुधवार और रविवार को हाट बाजार लगाया जाना है। इसके बावजूद बाजार के संचालन, व्यापारियों को स्थान उपलब्ध कराने तथा बाजार की व्यवस्थाओं को लेकर स्पष्टता का अभाव दिखाई दे रहा है। उल्लेखनीय हैं कि इन सालों के दौरान किरंदुल पालिका ने निर्दलीय अध्यक्ष के साथ साथ कई राजनेतिक पार्टियों के अध्यक्ष देखे परंतु किसी भी पालिकाध्यक्ष के कार्यकाल में किरंदुल के पुराने मार्केट में लगने वाले साप्ताहिक बाजार को नवीन हाट बाजार में शिफ्ट नहीं करवाया जा सका । सियासी नज़र के हिसाब से चाय ठेलों में चल रही आम चर्चा के अनुसार अगर मुख्य बाजार में लगने वाले साप्ताहिक बाजार को नवीन हाट बाजार में शिफ्ट करना ही नही था तो शासन के 69 लाख रुपये को खर्च करने की जरूरत ही क्या थी ।होटलों में तो यह भी चर्चा है कि की कहीं यहाँ शतरंज के खेल की तरह वोट की राजनीति तो नही खेली जा रही हैं क्योंकि किरंदुल के मुख्य बाजार यानी वार्ड नं 08 को हमेशा से ही एक राजनैतिक पार्टी का गढ़ माना जाता है । खैर जो भी हो परंतु 10 सालों पूर्व निर्मित हाट बाजार जो व्यापारियों और ग्राहकों की राह ताक रहा है उसका जवाब कौन देगा ।
